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भारतिय समाजके लिये संघर्ष करना हमारा मुल लक्ष्य हे,

Saturday, 18 July 2020

आपके हर सामाजिक जवाबदेही को लेकर सामाजिक कार्य कुएं करना जरूरी हैं ? सामाजिक दिशानिर्देश और समस्याओं को लेकर समाज का विश्लेषण.

ऐसे लोगों को ढूंढना मुश्किल है, जो सामाजिक समस्याओं पर  चिंतन करते हुये सही दिशा मे संघर्ष  करने अपना किरदार रखते हे, जिनके कार्यो मे बेहतरीन कार्यनीति  और  लक्ष्य को नजर  आते हो .

अक्सर इसकी वजह यह होती है कि वास्तव में वे निवेश नहीं कर रहे थे बल्कि सिर्फ अपना पैसा कभी एक तो कभी दूसरे इंस्ट्रूमेंट में लगा रहे थे. यह आपको बहुत सामान्य बात लगेगी, लेकिन निवेश का सही मतलब सिर्फ पैसा कहीं रखने से नहीं है बल्कि आखिरकार इस फंड के इस्तेमाल से है.

समस्या यह है कि जब तक किसी खर्च को ध्यान में रख निवेश की योजना नहीं बनाई जाती है तब तक व्यवस्थित रूप से निवेश करना मुश्किल है. इस काम को करने के लिए आपका ज्योतिष होना जरूरी नहीं है. आपको सिर्फ इतना करना है कि अपने जीवन के स्पष्ट वित्तीय लक्ष्य का सही अंदाजा लगाना है.

वित्तीय लक्ष्य को समझें
इस तरह आपके निवेश के लिए वित्तीय लक्ष्य का सही मतलब क्या है? इसका मतलब बहुत ज्यादा पैसा बनाने से नहीं है. इसमें उन कामों के लिए सही और सटीक वित्तीय योजना शामिल है, जिसे आप भविष्य में करना चाहते हैं. जब हम लक्ष्य तय कर लेते हैं तभी हम उस निवेश से जुड़े सवालों का जवाब दे सकते हैं, जो हमारे लिए जरूरी हैं.

यहा कुछ उदाहरण पेश हैं: आपको छह साल बाद अपनी बेटी की उच्च शिक्षा के लिए पैसे की जरूरत होगी. आज से करीब 10 साल बाद आप घर खरीदना चाहेंगे. आप इमर्जेंसी के लिए 5 लाख रुपये का फंड चाहते हैं. आप 18 साल में रिटायर हो जाएंगे और उसके बाद आप आज जैसी लाइफस्टाइल जारी रखना चाहेंगे.

अपनी जरूरतों को ठीक से समझे बगैर निवेश के सही विकल्प का चुनाव करना मुश्किल है. इस तरह का बयान देना आसान है-"पांच साल बाद मुझे एक करोड़ रुपये की जरूरत होगी." लेकिन, मान लीजिए पांच साल में इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए आप इसके लिए जरूरी निवेश नहीं कर सकते. फिर क्या होगा? सही लक्ष्य नहीं होने पर आप पैर पीछे खींच लेंगे. क्या 90 लाख रुपये पर्याप्त होंगे? पांच साल के बजाय समय सात साल कर दिया जाए तो? अभी के बजाय अगले साल निवेश शुरू करें तो? अगर यह सब भूलकर नया आईफोन खरीद लिया जाए तो?

कितना रिटर्न आपको चाहिए?
लेकिन लक्ष्य साफ होने पर विकल्प साफ दिखने लगता है. अगर आप किसी लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकते तो यह साफ हो जाता है कि आगे आपको क्या करना है. जब लक्ष्य स्पष्ट होता है तो यह भी पता चल जाता है कि आपको कितना रिटर्न की जरूरत है और अलग-अलग लक्ष्य के लिए यह कितना होना चाहिए.

इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि यह भी पूरी तरह साफ हो जाता है कि इनमें से हर लक्ष्य के लिए खास निवेश होना चाहिए, जिन्हें इन खास लक्ष्यों को पूरा करने के लिए चुना गया हो. दूसरे शब्दों में हमारे पास अलग-अलग लक्ष्य के लिए अलग-अलग पोर्टफोलियो होना चाहिए.

क्या है पोर्टफोलियो का मतलब?
आम तौर पर 'पोर्टफोलियो' शब्द का इस्तेमाल ऐसे सभी निवेश और एसेट को व्यक्त करने के लिए होता है, जो किसी व्यक्ति और परिवार के पास होता है. यही समस्या है. अलग लक्ष्य के लिए अलग पोर्टफोलियो का मतलब इससे अलग है. पोर्टफोलियो का मतलब ऐसे सभी निवेश से है, जो किसी खास लक्ष्य को पूरा करने के लिए किए जाते हैं. अगर आपको लगता है कि आपके लिए कई पोर्टफोलियो को संभालना मुश्किल होगा तो कई ऐसे पोर्टफोलियो मैनेजिंग टूल्स ऑनलाइन उपलब्ध हैं, जो आपकी मदद कर सकते हैं.

ऐसे लोगों को ढूंढना मुश्किल नहीं है, जो काफी बचत और निवेश करने के बाद भी अपने वित्तीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे होते हैं. अक्सर इसकी वजह यह होती है कि वास्तव में वे निवेश नहीं कर रहे थे बल्कि सिर्फ अपना पैसा कभी एक तो कभी दूसरे इंस्ट्रूमेंट में लगा रहे थे. यह आपको बहुत सामान्य बात लगेगी, लेकिन निवेश का सही मतलब सिर्फ पैसा कहीं रखने से नहीं है बल्कि आखिरकार इस फंड के इस्तेमाल से है.

समस्या यह है कि जब तक किसी खर्च को ध्यान में रख निवेश की योजना नहीं बनाई जाती है तब तक व्यवस्थित रूप से निवेश करना मुश्किल है. इस काम को करने के लिए आपका ज्योतिष होना जरूरी नहीं है. आपको सिर्फ इतना करना है कि अपने जीवन के स्पष्ट वित्तीय लक्ष्य का सही अंदाजा लगाना है.

वित्तीय लक्ष्य को समझें
इस तरह आपके निवेश के लिए वित्तीय लक्ष्य का सही मतलब क्या है? इसका मतलब बहुत ज्यादा पैसा बनाने से नहीं है. इसमें उन कामों के लिए सही और सटीक वित्तीय योजना शामिल है, जिसे आप भविष्य में करना चाहते हैं. जब हम लक्ष्य तय कर लेते हैं तभी हम उस निवेश से जुड़े सवालों का जवाब दे सकते हैं, जो हमारे लिए जरूरी हैं.

यहा कुछ उदाहरण पेश हैं: आपको छह साल बाद अपनी बेटी की उच्च शिक्षा के लिए पैसे की जरूरत होगी. आज से करीब 10 साल बाद आप घर खरीदना चाहेंगे. आप इमर्जेंसी के लिए 5 लाख रुपये का फंड चाहते हैं. आप 18 साल में रिटायर हो जाएंगे और उसके बाद आप आज जैसी लाइफस्टाइल जारी रखना चाहेंगे.

अपनी जरूरतों को ठीक से समझे बगैर निवेश के सही विकल्प का चुनाव करना मुश्किल है. इस तरह का बयान देना आसान है-"पांच साल बाद मुझे एक करोड़ रुपये की जरूरत होगी." लेकिन, मान लीजिए पांच साल में इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए आप इसके लिए जरूरी निवेश नहीं कर सकते. फिर क्या होगा? सही लक्ष्य नहीं होने पर आप पैर पीछे खींच लेंगे. क्या 90 लाख रुपये पर्याप्त होंगे? पांच साल के बजाय समय सात साल कर दिया जाए तो? अभी के बजाय अगले साल निवेश शुरू करें तो? अगर यह सब भूलकर नया आईफोन खरीद लिया जाए तो?

कितना रिटर्न आपको चाहिए?
लेकिन लक्ष्य साफ होने पर विकल्प साफ दिखने लगता है. अगर आप किसी लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकते तो यह साफ हो जाता है कि आगे आपको क्या करना है. जब लक्ष्य स्पष्ट होता है तो यह भी पता चल जाता है कि आपको कितना रिटर्न की जरूरत है और अलग-अलग लक्ष्य के लिए यह कितना होना चाहिए.

इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि यह भी पूरी तरह साफ हो जाता है कि इनमें से हर लक्ष्य के लिए खास निवेश होना चाहिए, जिन्हें इन खास लक्ष्यों को पूरा करने के लिए चुना गया हो. दूसरे शब्दों में हमारे पास अलग-अलग लक्ष्य के लिए अलग-अलग पोर्टफोलियो होना चाहिए.

क्या है पोर्टफोलियो का मतलब?
आम तौर पर 'पोर्टफोलियो' शब्द का इस्तेमाल ऐसे सभी निवेश और एसेट को व्यक्त करने के लिए होता है, जो किसी व्यक्ति और परिवार के पास होता है. यही समस्या है. अलग लक्ष्य के लिए अलग पोर्टफोलियो का मतलब इससे अलग है. पोर्टफोलियो का मतलब ऐसे सभी निवेश से है, जो किसी खास लक्ष्य को पूरा करने के लिए किए जाते हैं. अगर आपको लगता है कि आपके लिए कई पोर्टफोलियो को संभालना मुश्किल होगा तो कई ऐसे पोर्टफोलियो मैनेजिंग टूल्स ऑनलाइन उपलब्ध हैं, जो आपकी मदद कर सकते हैं.

यह भी पढ़ें : IDFC के इस फंड में एकमुश्त निवेश पर रोक हटी

अलग पोर्टफोलियो रखने का तरीका ठीक उसी तरह से हैं, जिस तरह से कई गृहणियां अक्सर करती हैं. मेरी एक रिश्तेदार अपने परिवार का वित्तीय प्रबंधन इसी तरह से करती थीं. उनके पास हाथ से सिली हुई कई थैलियां थी. हर थैली अलग-अलग जरूरत के लिए थी. जब उनके पति घर सैलरी लाते थे, तो वे (पत्नी) अलग-अलग खर्च के लिए पैसा अलग-अलग पोटली में रख देती थीं. यह सिस्टम काफी कारगर था.

यही चीज मैं आपसे अपनी बचत और निवेश के लिए करने के लिए कह रहा हूं. अपने हर लक्ष्य के लिए अलग-अलग वित्तीय प्लान रखें. थैलियों को व्यवस्थित करने के लिए सिर्फ तीन चीजों की जरूरत है. पहला है रकम, दूसरा है इसकी जरूरत कब पड़ेगी और तीसरा यह कि क्या लक्ष्य की तारीख या उसकी रकम में बदलाव की कोई गुंजाइश है. समय तुरंत से लेकर 20 साल या रिटायरमेंट फंड के लिए 30 साल तक हो सकता है.

लक्ष्य के हिसाब से जरूरी है निवेश
आप चाहे तो समय के पैमाने को तुरंत से लेकर एक साल, एक से पांच साल और पांच साल और उससे अधिक में बांट सकते हैं. हरेक के लिए अलग तरह की रणनीति और मिलेजुले निवेश की जरूरत होगी. निवेश की अवधि जितनी कम होगी, आपको उतना ही कम उतार-चढ़ाव वाले निवेश माध्यमों में पैसा लगाना होगा. लेकिन, आपका रिटर्न कम हो जाएगा. लंबी अवधि के लिए इसके विपरीत होगा. इस पोर्टफोलियो को बनाने के तरीके के बारे में हम आने वाले हफ्तों में बात करेंगे.


SAF Team 5 Aim ( Target ) साफ टीम 5 लक्ष्य , 25% सामाजिक शक्ति हासिल करना .

SAFTeam guj.
Date. 13 May 2020 
🖋 Huzaifa Patel 

         अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह व बरकातहू .

आज हम बात करेंगे हमारी  समस्याओं को लेकर हमारे सामाजिक कार्यो की   भाग डोर  मे केसे काम करे इस पर विस्तारशे समझने की कोशिश करेंगे। 

      सबसे पेहले हम बात करेंगे हमे इस  लक्ष्य (टार्गेट) के विषय को लेकर लिखने की क्या जरुरत हे? .

    साथियों दोस्तों वडिलो  मेरे सामाजिक कार्यो के अनुभव से मेने देखा जेसे  जेसे हालात दुनिया मे बदलते गये दुनिया मे बदलाव  और संघर्षशील  लोगों   अपना योगदान बखूबी दिया जिसमे हर  क्षेत्र  मे कार्य करनी  वाली  संस्थान ने अपना काम करते गये लेकिन जेसे जेसे मानवजाति पर गुलामी  का खतरा बदता गया बहोत से संगठन  अपने कार्यो को और गति देते गये  एसे समाज मे एक हिस्सा जागृत  होने लगा जो   अपनी  भावनाओं  और समस्याओं को लेकर  सामाजिक कार्यो की तरफ  आते गये  और मजीद लोग  सामाजिक कार्य मे जुडते जा रहे हे.

     लेकिन  मेने अपने सामाजिक कार्यों से अनुभव और अभ्यास  किया हे,और  देखा हे कइ नइ नइ संस्था संगठन  बनते जा रहे हे लेकिन उनका कार्य को लेकर  अभ्यास  किया जाता हे, बिना किसी  उद्देश्य  और लक्ष्य  को लेकर   सिर्फ  समाजकी समस्याओं  की तरफ डोर लगाते नजर आ रहे हे, जिन कार्यो से  फायदा तो हो सकता हे लेकिन  समस्याओं का समाधान और बेहतरीन   सामाजिक कार्य का  मकसद पुरा नही  होता हे,हम इस  लेख के बाद    सामाजिक कार्यो के उद्देश्य  कैसे बनाये और क्या बनाये  इस पर  आने वाले लेख मे  आपके सामने बात रखेंगे। 

     बिना उद्देश्य  के कार्यो को  लेकर  आपके कार्य समाज के लिये सही  नही  हो सकते हे, इसी लिये   हम अपको  सबसे पेहले  आपका लक्ष्य  टार्गेट  क्या होना चाहिये इसपर  विस्तार से  इस लेख मे आपके सामने रखते हे.

      सबसे  पेहले  हमे हमारे कार्यो को लेकर  कुच बाते समझना जरुरी  हे, सामाजिक कार्यो मे  हमारे जिवन के  अंदर बहोत  उतार चढाव   आते हे जिसके लिये हमे सबसे पेहले हमे मानसिक  तैयार  रेहना जरुरी  हे,और जब  सामाजिक कार्य मे बदलाव और मानवजाति  को गुलामी  से बचाने को लेकर हप तो   बहोत  सी गंभीर  परिस्थितियों का सामना करना पड सकता हे, जिसमे  हमारे परिवारिक  और सामाजिक  समस्या  के साथ  सरकार और सिस्टम  की बाधाएँ  आने लगती हे, लेकिन  हमे एसी समस्याओं  से भागना नहीं  चाहिये बलके  हमे  अपने  आपको  हमेशा  एसी समस्याओं  का सामना करने तैयार  रेहना जरुरी  हे.

   होसला हमेशा बुलंद रखना जरुरी  हे. हमारी  शायरी   आपके   सामाजिक कार्य के   होसले के नाम.

बुलंद इरादों  को लेकर चल, साथ मे कुरबानी  देते चल,
खुदा तेरा मददगार  होगा  इस बात पर विश्वास  करते चल.

   अब  बात करते हे हमारे सामाजिक कार्यो के 25% टार्गेट के बारे मे इसमे  कैसे  हासिल करना हे .उसके  उपर चर्चा  करेंगे।


 नंबर 1 
संस्थान नये  पुराने 5%  :-  इसको  और बेहतर तरिके से समझने की कोशिश  करेंगे. आपके उद्देश्य और मकसद  से जुडे संस्थान नये  और पुराने तमाम का रिसर्च  करो इनमे से कोन   वर्तमान समय मे एक्टिव (सक्रिय) हे,उसका अभ्यास  करते हुये  उनमे से  हमे सिर्फ  पांच  % संस्थान को हमारे साथ जोडना हे,   अगर  किसी  जगाह पर  हमारे पास  कोइ संस्थान  नहीं  हे,एसे मे हमे वंहा हमे  नये संस्थान  तैयार  करते हुये हमारे साथ जोडना हे,उनसे  हमे   हमारे उद्देश्य  को लेकर सहयोगी  बनाते हुये  हमारे  पांच % शक्ति को हासिल करना हे.

नंबर 2 
 समय के अभाव  चलते लेख बाद मे पुरा करेंगे.

मेरी जुबान बोलती हे. Meri Juban Bolti he. By ✍ Huzaifa Patel


आज की खास पेशकश क्रांतिकारी साथियों के नाम

                         मेरी जुबान बोलती हे.
  
                           🖋️ Huzaifa Patel
Date.13 jul 2020 

दुनिया मे इन्सानियत को समानता और जिवन जिने के लिये  बेहतरीन व्यवस्था देने वाले मुसलमानो को जब मे इस कार्य से दुर देखता हु,  मेरी जुबान बोलती हे.

इन्सानियत की हर समस्याओं का बेहतरीन समाधान करने वाली इस्लाम की व्यवस्था मे जिने वाले मुसलमानों को समस्याओं मे उलझा देखता हु, मेरी जुबान बोलती हे.

जिस कौम ने दुनिया मे अमनो अमान स्थापित किया उस कौम को डर और खौफ़ मे देखता हु, मेरी जुबान बोलती हे.

मुसलमानो को अमनो अमान और सामाजिक व्यवस्था देने के बजाये गुलाम बनाने वाली लीडरशिप को देखता हु, मेरी जुबान बोलती हे.

जुल्म का खात्मा करके दुनिया मे इन्साफ की हुकूमत करने वाले मुसलमानों को आजकी हुकूमत के जुल्म का शिकार बनते देखता हु, मेरी जुबान बोलती हे.

भारत देश की आजादी के लिये मुसलमानों की कुरबानी दिलाने वाली लीडरशिप के बाद आजकी गुलाम बनाने वाली लीडरशिप को देखता हु, मेरी जुबान बोलती हे.

70 सालों  तक तथाकथित आजादी का एहसास करवा कर मुसलमानों की आजादी की समस्याओं के समय लीडरशिप की खामोशी पर, मेरी जुबान बोलती हे.

लोकतांत्रिक देश मे सिर्फ अपने स्वार्थ के खातिर कौम को इस्तेमाल करने वाली लीडरशिप पर, मेरी जुबान बोलती हे.

जीन के लिये मे बोलता और सोचता हु,उनमें से कुच लोगों की कमजोर सोच पर, मेरी जुबान बोलती हे.

इन्सान की सबसे बडी ताकत जुबान हे उसको हक्की आवाज और बदलाव की जिम्मेदारी के लिये,  मेरी जुबान बोलती हे.

गुलामों को गुलामी का एहसास कराने के लिये, मेरी जुबान बोलती हे.

लीडर को लीडरशिप की जिम्मेदारी को याद दिलाने, मेरी जुबान बोलती हे.


आज का सुविचार 
कामयाब होने के लिए कई बार हमें जो है उसी में शुरुआत कर लेनी होती है, भले तैयारी पूरी ना हो क्योंकि यह इंतजार करने से काफी बेहतर है।
___________________________ सोचने वाली बात.____
🦌🦌हिरन की रफ्तार तकरीबन 90 km प्रति घंटा, 
🦁🦁शेर की रफ़्तार 58 km प्रति घंटा होती है
इसके बावजूद अक्सर हिरन शेर का शिकार हो जाता है क्यों ?
        क्योंकि हिरन को यकीन होता है वह शेर से कमजोर है, यही खौफ उसे पीछे मुड़कर देखने पर मजबूर करता है और हिरन का हौसला, रफ्तार दोनों कम हो जाता है 
                 
        ठीक इसी तरह आज का मुसलमान और पहले का मुसलमान में फर्क है ।।

कल का मुसलमान शेर था 1000 पर 313 भारी थे और आज का मुसलमान हिरन बन गया है।अल्लाह का डर और खौफ निकाल कर मखलूक का डर दिल मे बिठा लिया है।



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*शुकरिया  हमसे जुदने के लिये।*
आप अपना नाम ओर एद्रेस जरूर लिखकर शेर करे.
हम अापसे बादमे बात करते हे.
हम किसीभी बिना परिचय के व्यक्ति से बात नहि करते हे!
*"हमशे जुडे रेहने के लिये अपना परिचय जरुर शेर करे"*
नाम:-

एड्रेस :-

उमर :-

एजुकेशन :-

आप कीसी संस्था संगठन से जुदे हो तो उसका नाम लिखे:-

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SAF Team 7 Strategy, साफ टीम 7 कार्यनीति. By Huzaifa Patel Experience Social Work.

SAF Team guj.
Date. 18 Jul 2020 
🖋 Huzaifa Patel 
                          بسم الله الرحمن الرحيم   
           अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह व बरकातहू.

         बाद सलाम  अगर  आप   समाज सेवा के कार्य से जुडे हे, आपको  ये आर्टिकल सामाजिक कार्यो मे किस तरहा हमारी  कार्यनीति क्या होनी चाहिये इस पर बेहतर तरीके से समझाने कि कोशिश करेंगे.

     सबसे पेहले आप हमारे  निचे दिये  पुरे  आर्टिकल को अच्छे से समझें  ये कार्यनीति  कुएं  जरुरी हे ? किस मकसद से बनाया गया हे ? और इसके  माध्यम से आपके माध्यम से समाजिक एकता,जागरूकता और व्यवस्था बनाने मे  मददगार  हो सकता हे .
         हमारे मुस्लिम समाजकी भारत देशमे जिसतरहा धार्मिक,सामाजिक,राजकीय परिस्थितियां हे ,वो काफ़ी चिंता करने का विषय हे, पेछले कुच सालों मे मुस्लिम समाजकी समस्याओं ने समाज के जागृत और चिंतित वडिलों,युवाओं  के साथ समाजकी महिलाओं मे समाज के लिये कुच कर गुजरने की भावनाओं को जरूर जगाया हे,जिसमे उनके अंदर की इमानी सोच हे,लेकीन भारत के मुसलमानों के पास कोई खास सामाजिक व्यवस्था और सामाजिक संस्थान के पास समाजको एकजुट और सामाजिक संरचना करने हेतू कार्यनीति और लक्ष्य "ना" होने के कारणों से  समाज के कई चिंतित लोगों का समय,बुद्धि,पैसा और उनकी सलाहीयतों के साथ उनकी शक्ति सामाजिक व्यवस्था निर्माण करने मे और समाज के आम जन जिवन जिने वाले लोगों मे विश्व बरहा ने मे असफल नज आते हें .
                 मेरा अनुभव और अध्ययन 
          मेने सामाजिक जागरूकता,समाजिक एकता और सामाजकी अलग अलग समस्याओं पर प्रेक्टिकली कार्य  किये जिसके बाद कई अलग अलग तरहा के अनुभवों से मुझे मुस्लिम समाज की सबसे बडी समस्या जो नजर आई वो थी हमारे मुस्लिम समाजकी सामाजिक संस्थान के पास सामाजिक व्यवस्था बचाने मजबुत करने और परिस्थितियों के अनुसार  संस्थान के माध्यम से समाजको दिशानिर्देश करने की  आसान कार्यनीति  "ना" होना मुझे  सबसे पहले नजर  आई उसके बाद मेने इसमे और अभ्यास किया जिसमे मेरी चिंता येथी के सामाजिक संसके पास वर्तमान समय मे कौनसी कार्यनीति होनी चाहिये जो समाज के कम परहे लिखे और  दिनी-दुनियावी हाई  एजुकेशनल लोगों मे तालमेल (बराबरी) बनाकर रखे और उनके एक साथ जुडने से समाज मे वैचारिक परिवर्तन के साथ सामाजिक एकता,जागरूकता लाने मे सफलता मिल सके , जिसमे मुझे अल्लाह की महेरबानी से  7 कार्यों  का अध्ययन हुवा  और मजिद इसमे मेने सामाजिक संस्थान का लक्ष्य टार्गेट क्या होना चाहिये विशेष अभ्यास किया जिसमे मुझे और मजिद कामयाबी मिली जिसके बारे मे आग चर्चा करेंगे.
      भारत देश मे सबसे ज्यादा सामाजिक संस्थान रखने वाला समुदाय मुस्लिम, भारत देश मे 7से 8 सालों तक हुकूमत करने का इतिहास रखने वाले मुस्लिम, भारतीय रेलवे के बाद सबसे ज्यादा जमीन (वक्फ की जमीने) मुसलमानों के पास भारत देश की आजादी मे सबसे बदी जान और माल की  कुरबानी देने वाला  मुस्लिम, आजादी के बाद धीरे धीरे  अपनी आर्थिक अधिकारिक,राजनितिक प्रतिनिधित्व  और सुरक्षा की परिस्थितियों मे कमजोर होने वाला मुस्लिम, सरकार की सरच्चक कमिटी 2006 और मिश्रा कमिशन 2009 के रिपोर्ट अनुसार भारत देश के तमाम समुदाय मे दलित से सामाजिक,आर्थिक,शैक्षणिक,अधिकारिक क्षेत्रों मे मुस्लिम समाज की खराब परिस्थितियाँ होने का दावा किया गया.

 कई विषय हे जिसमे मनो मंथन करने और अभ्यास के साथ  प्रेक्टिकली कार्यो से समाज की जो परिस्थितियां नजत आती हे, वो काफी डरावनी नजर आती हें .
      
       
नंबर 
1 - सामाजिक बदलाव.
2 - शैक्षणिक जागरूकता .
3 - शारीरिक एवम आरोग्य के कार्य.
4 - समाज को आर्थिक क्षेत्र मे मजबुत करना.
5 - वर्तमान समय कि समस्याओं का विश्लेषण के साथ उसका मार्गदर्शन और साथ- सहयोग करना.
6 - मानवता के साथ मानव अधिकार बचाने के लिये संविधान और कायदे कानून कि जागरूकता.
7 - नेतृत्व मजबुत और सक्रिय करना.
          
            अलग अलग क्षेत्र के व्यक्ति की  गुणवत्ता (Quality) के बारे मे तिन प्रकार से समझने की कोशिश करेंगे.

       मुस्लिम समाज के धार्मिक गुरु (उल्मा ए किराम) की तिन गुणवत्ता क्या होनी चाहिये.

   सामाजिक संस्थान चलाने वाले और लीडरशिप करने वालों की तिन गुणवत्ता क्या होनी चाहिये.

      लोकतांत्रिक देश मे राजकीय लीडरशिप करने वालो की तीन गुणवत्ता क्या होती हे.
    
       समाज के लिये उपयोगी  बन सकते हे एसे संघर्षशील व्यक्ति की तिन गुणवत्ता क्या होती हे ?

    समाज मे आम जन जिवन जिने वाले लोगों की तिन प्रकार कि गुणवत्ता होती हे.