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Wednesday, 12 July 2023

CMC part 1

 शीर्षक: आम मुस्लिम अभियान: सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक परिस्थितियों के विश्लेषण के माध्यम से जागरूकता की प्रेरणा

प्रस्तावना:
मुस्लिम समुदाय विश्वभर में एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक समुदाय है जिसका इतिहास और महत्व अविराम रूप से विकसित हो रहा है। हालांकि, विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक परिस्थितियाँ इस समुदाय के विकास में संकटों और अवसरों का समावेश करती हैं। इसलिए, एक आम मुस्लिम अभियान एक उपयोगी माध्यम हो सकता है जो सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक परिस्थितियों पर विश्लेषण करके जागरूकता फैला सकता है। यह लेख मुस्लिम समुदाय के विकास को समझने और समस्याओं का समाधान करने के लिए आम मुस्लिम अभियान की महत्ता पर ध्यान केंद्रित करेगा।

मुख्य भाग:
1. सामाजिक परिस्थितियाँ:
मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को सामाजिक मामलों के साथ आपसी मेलजोल करने और समान अधिकारों के लिए लड़ने की जरूरत होती है। आम मुस्लिम अभियान के माध्यम से, समाज में जागरूकता पैदा की जा सकती है और सामाजिक सुधारों के लिए आवाज उठा सकती है। व्यापक रूप से मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों, शिक्षा के महत्व, समान वेतन के मुद्दों, और न्यायपूर्ण न्याय प्रणाली के लिए जागरूकता को बढ़ावा दिया जा सकता है।

2. राजनीतिक परिस्थितियाँ:
मुस्लिम समुदाय को राजनीतिक मंच पर अपनी आवाज उठाने की जरूरत होती है। आम मुस्लिम अभियान के माध्यम से, समुदाय को राजनीतिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भूमिका निभाने और समानता और न्याय की मांग को प्रभावी ढंग से लागू करने का मौका मिलता है। साथ ही, मुस्लिम युवाओं को भी प्रेरित किया जा सकता है ताकि वे राजनीतिक पदों पर भी अधिकारिक रूप से प्रतिस्पर्धा कर सकें और निर्णय लेने के लिए उनकी आवाज उठा सकें।

3. धार्मिक परिस्थितियाँ:
धर्म एक महत्वपूर्ण आधार होता है जो मुस्लिम समुदाय की पहचान बनाता है। आम मुस्लिम अभियान धार्मिक जागरूकता बढ़ाने 
और समानता के माध्यम से मुस्लिमों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा करने के लिए महत्वपूर्ण है। इस अभियान के माध्यम से, मुस्लिम समुदाय को अपने धर्मिक मान्यताओं को सुरक्षित रखने और उनके साथी समुदायों के साथ सहयोगपूर्ण रिश्तों को विकसित करने का अवसर मिलता है। साथ ही, धार्मिक सहयोग, सम्मेलनों, और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से, मुस्लिम समुदाय को अपनी आध्यात्मिकता को मजबूत करने और अपने मूल्यों और सिद्धांतों को प्रदर्शित करने का एक प्लेटफ़ॉर्म मिलता है।

संयुक्त प्रयास:
आम मुस्लिम अभियान मुस्लिम समुदाय के साथी समुदायों के साथ एक सामरिक, राजनीतिक और सामाजिक संयुक्त प्रयास है। इसमें समुदाय के लीडर, अधिकारी, शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हो सकते हैं। यह संगठन विभिन्न स्तरों पर कार्य करता है, जहां उनके समस्याओं और मुद्दों का विश्लेषण किया जाता है और उन्हें समाधान करने के लिए योजनाएं बनाई जाती हैं। इसके अलावा, यह संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आर्थिक विकास, और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी कदम उठा सकता है।

नई पीढ़ी के प्रेरणा स्रोत:
आम मुस्लिम अभियान एक प्रमुख प्रेरणा स्रोत हो सकता है नई पीढ़ी के लिए। यह समुदाय के युवाओं को सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक मुद्दों के प्रति जागरूक बनाने और सक्रिय होने के लिए प्रेरित करता है। इसके माध्यम से, युवाओं को अपने समाज के मुद्दों पर चिंता प्रकट करने, सामान्य ज्ञान और शिक्षा को सुधारने, संघर्षों का सामना करने और सामाजिक परिवर्तन को प्रोत्साहित करने के लिए मंच प्रदान किया जा सकता है।

संक्षेप में:
आम मुस्लिम अभियान एक महत्वपूर्ण पहल है जो मुस्लिम समुदाय को सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक परिस्थितियों के प्रति जागरूक बनाने में मदद कर सकता है। इससे मुस्लिम समुदाय के सदस्य अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं, सामाजिक सुधारों के लिए आवाज उठा सकते हैं, और अपनी आध्यात्मिकता को म
को मजबूत कर सकते हैं। इसके माध्यम से, समुदाय को संगठित होने का अवसर मिलता है और सामरिक, राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए मंच प्रदान किया जाता है। आम मुस्लिम अभियान द्वारा युवाओं को प्रेरित किया जा सकता है ताकि वे अपने समुदाय के उद्धार और समृद्धि के लिए सक्रिय भूमिका निभा सकें। साथ ही, धार्मिक सहयोग, सम्मेलन, और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से, आम मुस्लिम अभियान मुस्लिम समुदाय को अपनी आध्यात्मिकता को सुदृढ़ करने और अपने मूल्यों और सिद्धांतों को प्रदर्शित करने का मंच प्रदान करता है।

समाप्ति:
आम मुस्लिम अभियान एक महत्वपूर्ण पहल है जो मुस्लिम समुदाय के सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक परिस्थितियों पर विश्लेषण करते हुए जागरूकता फैलाने के लिए है। इसके माध्यम से, समुदाय को एकजुट होने और अपनी मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर मिलता है, जो सामाजिक, राजनीतिक और आध्यात्मिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। आम मुस्लिम अभियान से नई पीढ़ी को प्रेरित किया जा सकता है और सामरिकता, न्याय, और सद्भाव के मान्यताओं पर आधारित एक सशक्त समुदाय का निर्माण किया जा सकता है।

Tuesday, 11 July 2023

Ed प्रमुख संजय कुमार मिश्रा SC निवेदन ।



Supreme Court: 'ED निदेशक संजय कुमार मिश्रा का तीसरी बार कार्यकाल बढ़ाना अवैध'; शीर्ष कोर्ट से केंद्र को झटका ।

कोर्ट ने ईडी और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशकों के कार्यकाल को अधिकतम पांच साल तक बढ़ाने के लिए केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम 2021 और दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (संशोधन) अधिनियम 2021 में संशोधन को उचित ठहराया। कोर्ट ने मौलिक (संशोधन) नियमावली, 2021 को भी सही माना। 

सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार को करारा झटका लगा है। शीर्ष कोर्ट ने ईडी निदेशक संजय कुमार मिश्रा के कार्यकाल विस्तार को अवैध ठहरा दिया है। शीर्ष अदालत ने उन्हें अपने लंबित काम निपटाने के लिए 31 जुलाई 2023 तक का समय दिया है। साथ ही न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ ने ईडी निदेशक के कार्यकाल को अधिकतम पांच साल तक बढ़ाने के लिए केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम और दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम में संशोधन को सही ठहराया।

2018 में संजय कुमार मिश्रा की निदेशक के रूप में हुई थी नियुक्ति
गौरतलब है कि संजय कुमार मिश्रा को नवंबर 2018 में प्रवर्तन निदेशालय के पूर्णकालिक प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया था। संजय मिश्रा 1984-बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) आयकर कैडर के अधिकारी हैं। उन्हें पहले जांच एजेंसी में प्रमुख विशेष निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था। ईडी में नियुक्ति से पहले संजय मिश्रा दिल्ली में आयकर विभाग के मुख्य आयुक्त के रूप में कार्यरत थे।

2020 में मिला था पहला कार्यकाल विस्तार
केंद्र सरकार ने सबसे पहले 2020 में उनको एक साल का सेवा विस्तार दिया था। तब उन्हें 18 नवंबर, 2021 तक एक साल के लिए उनका कार्यकाल बढ़ाया गया था। फिर 2021 में कार्यकाल समाप्त होने से एक दिन पहले ही उन्हें दोबारा सेवा विस्तार दिया गया। ये दूसरी बार था। वहीं, 17 नवंबर 2022 को संजय कुमार मिश्रा का दूसरा सेवा विस्तार खत्म होने से पहले ही कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने एक वर्ष (18 नवंबर 2022 से 18 नवंबर 2023 तक) के लिए तीसरे सेवा विस्तार को मंजूरी दे दी थी।  

गौरतलब है कि सरकार पिछले साल एक अध्यादेश लेकर आई थी, जिसमें यह अनुमति दी गई थी कि ईडी और सीबीआई के निदेशकों का कार्यकाल दो साल की अनिवार्य अवधि के बाद तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है।

सेवा विस्तार को दी गई थी चुनौती
प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक के कार्यकाल के विस्तार को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इनमें उनके सेवा विस्तार को अवैध ठहराया गया था। 

पिछली सुनवाई को शीर्ष कोर्ट ने फैसला रखा था सुरक्षित
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने आठ मई को प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक के कार्यकाल के विस्तार को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। जस्टिस बीआर गवई, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और जस्टिस संजय करोल की बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।  



आठ मई को हुई सुनवाई के दौरान, केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को अवगत कराया कि एसके मिश्रा पुलिस महानिदेशक नहीं हैं, लेकिन वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए संसद ने सचेत रूप से फैसला लिया। मेहता ने अदालत को यह भी बताया था कि एसके मिश्रा नवंबर से सेवानिवृत्त होंगे। दरअसल, कोर्ट 17 नवंबर 2022 को केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक एसके मिश्रा का तीसरा कार्यकाल बढ़ाया था।

आठ मई की सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट ने ईडी निदेशक संजय कुमार मिश्रा को दिए तीसरे सेवा विस्तार पर केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या वह इतने जरूरी हैं कि सुप्रीम कोर्ट के मना करने के बावजूद उनका कार्यकाल बढ़ाया जा रहा है। शीर्ष अदालत ने पूछा था क्या कोई व्यक्ति इतना जरूरी हो सकता है। शीर्ष अदालत ने 2021 के अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि सेवानिवृत्ति की उम्र के बाद प्रवर्तन निदेशक के पद पर रहने वाले अधिकारियों का कोई भी सेवा विस्तार कम अवधि का होना चाहिए। यह भी स्पष्ट किया था कि संजय मिश्रा को आगे कोई विस्तार नहीं दिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने उठाए थे सवाल
जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संजय करोल की पीठ के समक्ष केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि मिश्रा का विस्तार प्रशासनिक कारणों से आवश्यक था और वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) के भारत के मूल्यांकन के लिए महत्वपूर्ण था। इस पर पीठ ने सवालों की झड़ी लगाते हुए पूछा था कि क्या ईडी में कोई दूसरा व्यक्ति नहीं है जो उनका काम कर सके? क्या एक व्यक्ति इतना जरूरी हो सकता है? आप के मुताबिक ईडी में कोई और सक्षम व्यक्ति है ही नहीं? 2023 के बाद इस पद का क्या होगा जब मिश्रा सेवानिवृत्त हो जाएंगे?

केंद्र का तर्क, भारत की रेटिंग नीचे न जाए इसलिए जरूरी
तुषार मेहता ने कहा था कि मनी लॉन्ड्रिंग पर भारत के कानून की अगली सहकर्मी समीक्षा 2023 में होनी है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि भारत की रेटिंग नीचे नहीं जाए, प्रवर्तन निदेशालय में नेतृत्व की निरंतरता महत्वपूर्ण है। मिश्रा लगातार कार्यबल से बात कर रहे हैं और इस काम के लिए वह सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं। कोई भी बेहद जरूरी नहीं है लेकिन ऐसे मामलों में निरंतरता जरूरी है।

कोर्ट ने लगा दी थी रोक
कोर्ट ने अपने निर्देश में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक संजय कुमार मिश्रा के कार्यकाल को 16 नवंबर 2021 से आगे बढ़ाने से रोक दिया था। केंद्र की दलील थी कि यह विस्तार केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम में किए गए संशोधनों के तहत है, जो ईडी निदेशक के कार्यकाल को पांच साल तक बढ़ाने की अनुमति देता है।






Monday, 10 July 2023

फेसबुक पोस्ट

 क्या करे सारी हॉस्पिटल बंध कर दी जाए ???

    દરેક ધર્મમાં એવા નાલાયક લોકો હોય છે જે ભોળી ભાલી જનતાને બેવકૂફ બનાવે છે, મુસલમાનોં અન્ય ધર્મના બાબાઓ ને સોશિયલ મીડિયામાં ટ્રોલ કરે છે, પણ આપણાં સમાજમાં ધર્મના નામ પર નાટક કરતા બાબાઓ,પિરો,મુલ્લાઓ આવા ટેકનોલોજી ના સમયમાં પણ લોકોને બેવકૂફ બનાવી લેતા હોય તો આપણાં સમાજના 4 થી 5 % દિની + દુનિયાનું એજ્યુકેશન લીધેલ લોકો માટે એક સવાલ બને છે કે તમારું ઇલ્મ ફકત સમાજમાં સમ્માન મેળવા માટે લીધેલ છે????

     આવી અંધ ભકતી અને આવો અંધવિશ્વાસ કરવો ઇસ્લામમાં સદંતર મનાઈ નો હુકમ છે બલકે ઘણા કામોમાં ગુનોહ પર બતવવામાં આવેલ છે....

   આવા બાબાઓ જો કરામતો ખરે ખર કરતા હોય તો મુસ્લિમ સમાજ ઉપર થતા અત્યાચાર, અન્યાય સામે પોતાની કરામત બતાવે..

  આ સમાજને ધર્મના નામે ફિરકા માં અને સખ્સિયત પરસ્તી ની ગુલામીમાં તેના અસ્લ દિનથી દૂર કરેલ છે, બાબાઓ,શુફીઓ, મુલ્લાઓ જેઓ કરામતો નો દાવો કરીને ઇન્સાનિયત ને બેવકૂફ બનાવવાનું કામ તો કરે છે, પણ સાથે કુદરત ને બેવકૂફ સમજે છે કે કુદરત તેનો હિસાબ નહી લઈ શકે , તેવી માનસિકતાના લોકો આવું ઇસ્લામ વિરોધી અને અ માનવીય અને કાયદા વિરોધ કામ કરી રહેલ છે.

  ઘણા કહેવતા મુસ્લિમ આ પોસ્ટ વાંચીને વિચાર કર્યા વગર 100 ફૂટ ઉછળશે ....

   પોસ્ટ કરવાનો મકસદ એજ કે આવી બીમારીથી પોતાને અને સમાજને બચાવો....

  ફરી એકવાર હોસ્પિટલ બંધ કરી દેવી જોઈએ????

 એક વાત યાદ આવી ગઈ કોરોના સમય આવા બાબાઓ અને પીરો શુફિયો ક્યાં છુપાય ગયા હતા. 😃

   
    

મુસ્લિમ સમાજ સમાજીક,આર્થિક,રાજકીય,એજ્યુકેશન લાઈનમાં કેમ પાછળ છે? જેનું મુખ્ય કારણ છે આ સમાજને તેના ધાર્મિક લોકોએ. તદબિર ભુલાવી તકદીર ઉપર છોડી દીધેલ છે.
કિરદાર ભુલાવી કરામત સાથે જોડી દીધેલ છે.