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Saturday, 4 November 2023

इलेक्ट्रॉल बॉन्ड के जरिए पूंजीवाद को गुलामी और कानून कैसे कैसे बनाएं जाते हे?

 आपका स्वागत है मैं हूं गिरिजेश प्रोसेस

चुनावी बॉन्ड की पूरी राम कहानी आज हम समझेंगे
आज आपको एहसास होगा कि किस तरह से घोटाले करने का एक रास्ता सरकार ने खोल दिया था और किस तरह से दो हज़ार अट्ठारह में मोदी जी ने एक ऐसी स्क्रिप्ट लिखी जिसके जरिए सारा काला कारोबार
लीगल हो जाए
हम समझने की कोशिश करेंगे कि इलेक्टोरल बॉन्ड में कौन कौन से खेल कर दिए गए जिसके जरिए हिन्दुस्तान का कानून डीवीडी सीडी सब एक तरफ और
नामा और कमाई एक तरफ कहीं में चाहिए चैनल को सब पर जहां भी जरूरत है
है
इलेक्टोरल बॉन्ड क्या है
इलैक्टिव इलेक्टोरल बॉन्ड
सरकार के द्वारा बनाया गया
काले धन को खत्म करने का एक ऐसा उपाय है
जिससे सबसे ज्यादा काले धन को मदद मिलती है
और जिसके जरिए
आप
जितना चाहे उतना खेल कर सकते हैं
और अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को धूल चटा सकते हैं
इसमें कुछ चीजें ऐसी हैं जो लीगल तरीके से हो सकती है सीधे तरीके से हो सकती है और कुछ चीजें ऐसी हैं जो धांधलेबाजी करने की गुंजाइश छोड़ दी गई है
तो शुरू करते हैं एक एक करके सारे तत्वों को लेकर आते हैं सुप्रीम कोर्ट में भी इन तत्वों को कहीं न कहीं किसी तरह से उठाया गया है और एक हम सिम्पली फिकेशन के जरिए को समझने की कोशिश करेंगे ताकि आप जान जाएं कि इस देश के नेता
कैसे कैसे लोग इस स्कीम ने चुनावी चंदे को गुप्त दान बना दिया एक हाथ पैसा देगा अगर पॉलिटिकल पार्टी को दूसरे हाथ को पता नहीं चलेगा
और इससे हुआ यह
कि आपको कोई भी उल्टा सीधा काम करना हो और किसी पार्टी को पैसे देने हो
तो आप उसको कुत्ते सकते हैं
एक उदाहरण से शुरू करता हूँ
आपकी एक पार्टी है जैसे मैंने मान लीजिए पार्टी खुली उसका नाम रखा आलू प्याज पार्टी आलू प्याज पार्टी ले जाकर रजिस्ट्रेशन करा लिया और आलू प्याज पार्टी को कहीं पे कोई यह नहीं है कि मिनिमम वोट कितने मिलें दस लाख वोट मिले एक रोबोट मैंने ऐसा कुछ नहीं है
एक लाख वोट मिला जब उसने पार्टी खोली रजिस्ट्रेशन करा लिया बात खतम दो मेरे पास माल
अब आपके पास दें
कुछ पैसा है
जो आप किसी को देना चाहते हैं
अब आप उसको दे नहीं सकते हैं क्योंकि रिकॉर्ड में आ जायेगा तो आप एक काम करो
एसबीआई चले जाओ
टीआई में जब इलेक्टोरल बॉन्ड खुले तो से इलेक्टोरल बॉन्ड एक दस करोड़ रुपये का खरीद लो और वो बंदा के आलू प्याज पार्टी को तोड़ कर दो और आपके कहने पर कुछ कमीशन लेकर उस पार्टी को आलू प्याज पार्टी किसी और काम से एक बिल ले लेगी और पैसे दे देती है
हो गया
सब व्हाइट ब्लैक सब बराबर हो गया
तरीका क्या है इलेक्शन गोद लेने का पहले उसको समझा जाए तो और भी मजा आएगा
कोई भी आदमी कोई भी कंपनी
जाकर वहां पर
एसबीआई की खास तौर पर एक ब्रांच मुकर्रम वक्त मुकर्रर होती है उस पर डेस्क होती है होकर वहां पर जो बाबू बैठा हुआ उस बाबू को जाकर बोला कि भाई मुझे इलेक्टोरल बॉन्ड दो जो आपके बहुत सारे का रिनोवेशन होते हैं कोई एक करोड़ रुपये का दस लाख रुपये का पांच लाख रुपए कैसे बने हुए बंद होते हैं
आप पैसे दे दो वह बॉन्ड इश्यू कर देगा यह बॉन्ड इश्यू किया इस पार्टी के लिए
ऐसा नहीं होता कि आप बॉन्ड ले आओ किसी को भी दोगुना वहां पर जब होगा तो पार्टी कौन सी को दिया जा रहा है उसमें लिखा जाएगा
और फिर आप जाकर वह गॉड पार्टी को दे देते हैं पार्टी अपने खाते में समाज चला लेती है एक सौ इक्यावन रुपये आए हमारे पास में इलेक्शन वाच है
किसने दिया नहीं बता पाती जब इलेक्शन वॉच से चंदा रहती है तो नाटो चुनाव आयोग को बताने की जरूरत है
इनकम टैक्स को बताने की जरूरत है कितना पैसा कहां से आया
न किसी प्रकार की कोई रिकॉर्ड रखने की जरूरत है कि कोई से पूछा कितना बसाया क्या है तो उसको बताना पड़ेगा
बर्गर परमिशन के लिए
और ये सारा काम कैसे हो रहा है सरकार ने एक वन पॉइंट सिस्टम बना दिया स्टेट बैंक की एक डेस्क लक्षण बांड की वहां पर जो भी बाबू बैठता है
वह बाबू आज के इस दौर में हो सकता है भारतीय जनता पार्टी का कोई अपना एजेंट होता जासूस होता
और आप जब जाएंगे वहां बॉन्ड बनवाने के लिए तो वह फोन करके बता देगा कि भैया ये फला फला लाला मणिदास आए थे और इन्होंने जो है वह इतने करोड़ रुपए
इलेक्टोरल बोर्ड में बीजेपी को दे दिया
कांग्रेस को दे दिया है आपको ठीक है बेटा के घर पर यदि भेजता हूं
यही उगाना वह दर्शन हीरानंदानी का यही तो हुआ सरकार ने जैसे ही उसको का भृकुटी तेरी कि तोते की तरह बोलने लगा अब आप इसको समझिए कि इस तरह से आप जो है इलेक्शन कमीशन इनकम टैक्स डिपार्टमेंट सब को ताक में रख के
सारी ट्रांसपरेंसी का था किसी को जानने का हक दे दी केवल दोनों जानते चंदा देने वाला पार्टी और वह बाबूजी जो वहां मैथुन एसबीआई
इससे
एक नया रेवेन्यू खुल गया काला धन पार्टियों के पास आने का कैसे अब यह पैसा कितना भी कोई भी दे सके इसके लिए जुगाड़ किया गया
जुगाड़ यह किया गया कि पहले कोई भी कॉर्पोरेट अपनी इनकम का मुनाफे का एक प्रतिशत से ज्यादा चुनावी चंदा नहीं दे सकता
बीजेपी नेता आंग दो अभी तो हमारी सरकार जिसकी तरफ नजर उठाकर देखेंगे चंदो के ट्रक हमारी पार्टी के दफ्तर के बाहर खड़े कर देगा
मतलब बॉन्ड दे देगा
तो
नियम बनाया गया कि कोई भी कितना भी कॉर्पोरेट चंदा दे सकता है
अब अगर एक आदमी अपनी कंपनी बनाता है बशर्ते उस कंपनी को मुनाफा होता हूं
अब एक आदमी अपनी कंपनी बनाता उस कंपनी में एक रुपए का मुनाफा कमाता ये सवाल सुप्रीम कोर्ट ने पूछा गया और उसके बाद वह दस करोड़ रुपए का दान दे देता है
बीजेपी को
तो वो दे सकता है
जिसकी आमदनी भी नहीं है वह भी दे सकता है पहले यह था कि भैया जितना रहे उसके एक पर्सेंट से ज्यादा पॉलिटिकल चंदा नहीं दे सकते इस प्लॉट को हटा दिया गया
इसके अलावा एक और क्रॉस
लगा दिया गया एक और इजाजत दे दी गई कि अगर आप विदेशी कंपनियों हो आप वारेन बफेट हो आप जॉर्ज सोरोस हो या कोई भी व्यक्ति हो
आपकी अगर भारत में कोई पाँच है
तू ब्रांच जितना चाहे चंदा दे सकती है और चंदे को गुप्त रखा जाएगा यानी विदेशी कंपनियों से मिलने वाले धन को गुप्त रखा जाएगा
अब यह पॉलिटिकल पार्टी करती क्या है सबको पता है पॉलिटिकल पार्टी इस देश में सरकार चलाती है
या विपक्ष होती है
और वो किसी भी तरह से देश की नीतियों और बड़े बड़े फैसलों को प्रभावित करने में सक्षम होती है
अब एक पाती है अगर उस पार्टी को
में
दस करोड़ रुपए में के साथ ऐसा है कि मंत्री जी मेरा यह काम करा दो मुझे जो है वह एयरपोर्ट जिला तो मुंबई वाला था
के साथ मिल जाएगा
क्या दोगे
दस करोड़ दूंगा
ठीक है
दस करोड़ का इलेक्शन बॉन्ड आपने जाकर पार्टी में जमा करा दिया कोई आपको रंगे हाथों पकड़े या कहीं पाउडर नहीं निकलेगा कहीं इनके नहीं निकली कुछ नहीं मिलेगा आप बॉन्ड खरीद कर देगा
हो गया
इसी तरह से एक विदेशी इजराइल मान लीजिए है और वह इजरायल आगे कहता है भारत सरकार को कि हमारे देश के हित में नीतियां बना दो हमारे लिए यह दाएं बाएं कर दो
तो हम जो है वो आपको सौ करोड़ का चंदा देंगे
सरकार के कि ठीक आने दो
पैसा आता ज्यादा खजाने में और वो खजाना आप पार्टी देख रहे हो पाती सारी पार्टियां पार्टियां ऐसी नहीं है ना या तो छोटी छोटी पार्टियों की भी बात है क्योंकि जो एक लाख वोट वाली बंदिश थी पहले वह भी तोता दी गई है
यानी कोई भी आलूबुखारा पार्टी आलू प्याज पार्टी बनाएगा
और यह कर सकता है
भैया मैं तेरा पर में पास करा दूंगा मेरी सेटिंग मंत्री जी के पास न तो मेरी पार्टी को डोनेशन के नाम पर इतना पैसा दे दे यानी में जितनी चाहो रिश्वत हूँ मैं चाहिए करूंगा करूंगी मेरी आप कुछ नहीं कर पाओगे
एक कहानी इसके साथ में है तो इस जोड़े एफसीआरए एक्ट में बदलाव कर दिया कंपनी एक्ट में बदलाव कर दिया जो कर दिया
क्योंकि कंपनी बंधन मनाता था एक पर्सेंट से ज्यादा नहीं दे सकते हो
भैया विदेशी चंदा जो है उसका एक नियम है
और वह चंदा रेगुलेट होगा ट्रांसपेरेंट होगा बहुत सारी चीजें होंगी
इधर आना हमारे खजाना नजारा कर रखो
इससे साथ साथ बहुत सारे चार कानूनों को बदल दिया
अभी कानून होता था
रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट मैंने आपको बताया उसमें एक पर्सेंट वोट जो है एक लाख नहीं एक लाख गुना एक पर्सेंट वोट
आपको पूर्ण होना चाहिए
तभी आप बॉन्ड ले सकते हैं
ईमानदारी की बात है हर आदमी चुनावी चंदा कैसे ले लेगा तो इन्होंने उसको भी हटा दिया
यानी रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट जो है वह कहता है कि भैया आपका एक परसेंट
वोट आपको मिलेगा तभी आप इलेक्शन वॉच से चंदा लेने के लायक उसको भी हटा दिया
इस तरह के बहुत सारी चीजें होती जा रही हैं और तेरह हजार पाँच सौ करोड़ रुपए
जैसा बड़ा पैसा इसमें दिया गया अब सरकार ने यह सब उल्टा सीधा काम किया और यह करने के पीछे सरकार की नीयत क्या रही होगी इसका अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं
कि जब भी कोई कानून होता है तो कंसल्टेशन होता है
सरकार कानून पर काम करने से पहले जो संबंधित जानकार लोग हैं समाज के लोग हैं जनता के लोग हैं उनके उनसे इस बारे में राय मशविरा करती है और जानकारी जुटाती है देशभर में सेमिनार होते हैं अलग अलग तरह की जानकारियां होती हैं कुछ लोगों से राय ली जाती है और उसके आधार पर
कंसल्टेशन कमेटियां भी बनती हैं उनके आधार पर सरकार वित्तीय मोटा मोटा यहां इस कानून में यह कमी आई अच्छा है लेकिन सरकार को लगता था कि अगर पता चल गया तो फिर हम यह काम नहीं कर पाएंगे तो इसलिए कंसल्टेशन के प्रोसेस कोई नहीं अपनाया गया इसके अलावा
आरटीआई से चीज और पता चली है
कि इलेक्टोरल बॉन्ड के साथ में क्या क्या घपला घोटाला हो सकता है इसके बारे में सरकार को पता वहीं
यह था कि आरबीआई ने बाकायदा
एक
ऑब्जेक्शन लिखा केंद्र सरकार को कि यह प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट पीएमएलए का उल्लंघन कर सकता है
फोर जरी मनी लॉन्ड्रिंग और नकली काउंटर फिटिंग
ये तीनों चीजें इसमें संभव है यानी फर्जीवाड़ा
काले को सफेद करना यह सारा जो मैंने आपको बता संभव है तो यह बातें आरबीआई ने बाकायदा तब चिट्ठी लिखकर केंद्र सरकार को बताई थी
केंद्र सरकार का जवाब आया अब तो फाइनेंस बिल प्रिंट हो चुका है
आपने देर से बोला
और उसके बाद में मामले को बंद कर दिया गया तो अलग अलग देखें कि उसका आरबीआई का जो कंसर्न था उसको रिजेक्ट कर दिया गया
इलेक्शन कमीशन का
इलेक्शन कमीशन ने इस पर सवाल उठाया था लगा रहा हूँ स्क्रीन पर उसके सवालों को भी रिजेक्ट कर दिया गया
तो मतलब यह है कि अगर आपको यह लगता हो कि कई बार मासूमियत में गलती हो जाती है बाद बोले
पाशा भाषण में भी निकल जाता है कि पीना हो तो
तो हो सकता है कि समझ न पाए होंगे हम क्या कानून बना रहे हैं बना दिया कंसल्टेशन नहीं किया तूने क्या भैया
नीयत पर सवाल उठता है एक प्रक्रिया है वह तो करनी चाहिए
इसके अलावा अपने
जिन लोगों ने आपत्ति जताई थी इलेक्शन कमीशन ने कहा कि है रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट के खिलाफ ज्यादा भैया इग्नोर कर दिया आरबीआई ने जो का इग्नोर कर दिया तो यह पूरी चीज है एक बात बताती है यह सब जान बूझकर सोच समझकर किया गया मसला
अब चूंकि मामला संसद से पास हो चुका है
तो इस पर नए सिरे से बहुत सारी चीजें समझने की जरूरत है
मामला सुप्रीम कोर्ट में अब सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्शन कमीशन से कहा कि भैया ये बताओ तुम आप इनके पास में कितना पैसा आया चुनाव
अर्चना अगर हमको पता ही नहीं तोड़ना
बताना तो पड़ेगा तो वो इसलिए रखा गया है कि गुप्त रहे कौन किसको पैसा देना पता ना चले पोते का कैसी बातें कर रहे वहां तो आपने बाबूजी जो हुए हैं कोर्स कन्फर्मेशन निकली सकती है इसके अलावा आपने कहा कि वे इंफोर्समेंट एजेंसी दो मिनट में ईडी की देना पड़ेगा सीबीआई माहौल देना पड़ेगा
पुलिस मामले की तो देना पड़ेगा क्योंकि आपने प्रोविजन रखा हुआ है
कैसी प्राइवेसी रही
और तीसरा
प्राइवेसी प्राइवेसी की बात कर रहे हो
तो हम तुमसे पूछा भैया किसने दिया किसको कितना चंदा हम यह पूछने किसको कितना चंदा मिला
हमको पता भी तो होना चाहिए इस देश में कितना पैसा इलेक्शन वॉच के जरिए दिया जा रहा है
तो सिट्टी पिट्टी गुम इलेक्शन कमीशन तो आपको मालूम है
उसकी क्या स्थिति है इस देश में
हमको लगा कि आप दो हज़ार उन्नीस के चुनाव के लिए ही यह सब किया था तो हमने देख लिया अब हमारे पास गाथा ने सुप्रीम कोर्ट ने दो हफ्ते में डाटा लेकर आओ और कॉन्फिडेंस तरीके से आप हमको लिफाफे में बंद करके डाका हो गए
जो पूरे लोकतंत्र के सिद्धांत है
उसके हिसाब से
यह पूरा कानूनी गई
भाई एक ट्रांसपरेंसी को चीज होती है कि नहीं होती है
राइट टू इनफार्मेशन भारत में लोगों को सूचना का अधिकार है
और आपने कह दिया कि आम आदमी को जानने का कोई हक नहीं है कि किस पार्टी ने कितना चंदा लिया करो बुड्ढे सरकार सुप्रीम कोर्ट ने
तो ये जो है वहाँ पे भी मामला बर्दाश्त तो कुल मिलाकर अगर आप देखें
तो आपने कॉरपोरेट कर्ज कंपनी कानून बदल दिया आपने जो है वो रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट बदल दिया है वह कानून में जिसके हिसाब से जिसमें कानून चुनाव संचालित होते हैं उस कानून में बदलाव कर दिया
और जैसा कि मैंने आपको बताया कि इस सबको करने के बाद
भारत में अगर आप भारत में गरीब बच्चों को पढ़ाना चाहते हो ना
विदेशी चंदा लेना असंभव के जितना मुश्किल कर दिया गया
कितने आप प्रयास आमोद कंठ का कितने सारे बच्चों को पढ़ाता लिखा था था
खासकर प्रयास के एक्टिविटी पैसा ही नहीं सारे एनजीओ धीरे धीरे धीरे धीरे करके बुरी हालत में पहुंच गए
जिन लोगों ने पूरी जिंदगी लगाकर अच्छे से लाखों लोगों को फायदा पहुंचाया फंडिंग मिली तरस से
और दूसरी तरफ विदेशी चंदा लोग
विदेशी चंदा चलेगा को
ये पूरी की पूरी सिचुएशन जो है ना इससे पता चलता है कि काला धन उल्टा सीधा धन क्योंकि पीएमएलए भी इसमें लागू नहीं होता
मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट लागू होता काले को सफेद करने के लिए आप वाला जो तरीका है इलेक्शन वॉच वाला अपना सकते हो एक लिए जीटीवी तरीका बनाया गया
तो ये पूरी बात आपने जो समझी वह आपने मोटा मोटा समझ में आया होगा कुछ तकनीकी थी लेकिन को भी सरल करने की कोशिश की लेकिन फिर भी समुराई करके आपको एक छोटी सी कहानी ऐसे समझ लीजिए कि इलेक्शन कमीशन का भारत में दो हज़ार अट्ठारह में मोदीजी ने कह सका
जिस कानून के जरिए कोई भी पार्टी कितना भी चंदा ले सकती थी
उसको कोई जान नहीं सकता था किस पार्टी को कितना चंदा दिया है
सिवाय इसके कि सरकार सरकार जान सकती थी सत्ताधारी पार्टी जान सकती थी और वह लोगों को पर दबाव भी बना सकती थी चंदा लेने के लिए क्योंकि किसी को अगर सरकार से काम कराना हो कुछ उल्टा सीधा काम कराना और रिश्वत देनी हो तो चंदा दे भी दे ही सकता था सरकार भी अगर चाहे कोई सरकार में बैठा हुआ नेता
और वह फाइल लडका के यह कहे कि पहले पार्टी में डालकर तो अभी जो मामला चल रहा मनीष सिसोदिया वाला इस मामले में जो आरोप लगाया गया है वह यह लगाया गया है कि पार्टी ने अपने चुनाव के लिए
पैसा लिया
शराब माफिया से और शराब माफिया को छः सौ कुछ करोड़ रुपए जो भी अमाउंट है उसका फायदा पहुंचाया है
तो ये भी अब इजाजत हो एक तरह से देखा जाए तो भी तो चुनावी चंदा ले रहे हैं
तो इस तरह की जितनी भी गैर कानूनी गतिविधियां नेताओं का भ्रष्टाचार नेताओं का भ्रष्टाचरण नीतियों के प्रभाव डालना विदेशियों का असर पड़ना जितनी भी चीजें हैं उन सबको
कानूनी जामा पहना दिया मोदी जी ने दो हज़ार अट्ठारह में
अब सुप्रीम कोर्ट में संविधान पीठ पे इसकी सुनवाई पूरी हो गई है पांच दिन हो गए संविधान पीठ का काम होता है यह बताना कि संविधान के हिसाब से कानून के हिसाब से ये जायज है नहीं है
उसने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है
और उम्मीद करते हैं जो फैसला आएगा उसके बाद में इस इस कानून में ऐसे बदलाव होंगे जिससे नेताओं की पॉलिटिकल पार्टीज की चोरी चकारी पर रोक लगेगी उनके भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी उनकी लूट पर रोक लगेगी और उनकी ब्लैकमेलिंग पर रोक लगेगी उम्मीद करता हूं जो आपको अच्छा लगा होगा अच्छा लगा हो तो ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं पर सबसे पहले उसका
जाए

Wednesday, 1 November 2023

जनता का अधिकार इलेक्ट्रॉल बॉन्ड और पूजीवादी सिस्टम ।

 
दोस्तों नमस्कार सत्ता बचाए रखने की लड़ाई ऐसी हो सकती है शायद कभी किसी ने सोचा नहीं होगा आपने भी कहाँ सोचा होगा जिस देश में सरकार चुनकर आए और उसके बाद पहले दिन कैबिनेट की बैठक में
ब्लैक मनी को लेकर चर्चा हो और एसआईटी बना दी जाए
उसी ब्लैक मनी को लेकर सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता है अगर ब्लैकमनी उसके पॉलिटिकल फंडिंग का हिस्सा
इस दौर में तमाम विपक्षी राजनीतिक दलों के नेताओं को मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में ईडी लेकर आई और सुप्रीम कोर्ट ने भी ईडी से कहा जरूर कि दरअसल इस देश की आर्थिक सुरक्षा की जिम्मेदारी आपकी है
और भारत में हर लोग ने माना कि अगर ईडी है तो मनी लॉन्ड्रिंग नहीं होगी और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ अगर वह कार्रवाई कर रही है तो बिल्कुल सही है
लेकिन मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए अगर पॉलिटिकल फंडिंग बीजेपी के पास आ रही है तो सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता है
इतना ही नहीं इस देश के भीतर में और देश के बाहर शैल कंपनियों के स्तरीय जो कॉरपोरेट सेक्टर किस तरीके से ब्लैक मनी को जन्म देता था एक के बाद एक प्रधानमंत्री के सोलह भाषण ऐसे निकलकर आ जाएंगे जिसमें वह ज़िक्र करते हैं कि एक दो नहीं
एक दो लाख नहीं बल्कि तीन लाख से ज्यादा शेल कंपनियों पर उन्होंने ताला लगवा दिया क्योंकि उन्हें बर्दाश्त नहीं है गलत तरीके से पैसे की कमाई और ब्लैक मनी
लेकिन ब्लैक मनी मनी लॉन्ड्रिंग और उसके बाद शेल कंपनी अगर शेल कंपनी के जरिए भी पॉलिटिकल फंडिंग बीजेपी को हो रही हो सत्ता तक पैसा पहुँच रहा हो तो फिर सरकार को कोई फर्क पड़ता नहीं है
तो क्या यह मान लिया जाए कि मनी लॉन्ड्रिंग का सवाल हो शेल कंपनियों का सवाल हो या फिर ब्लैक मनी का सवाल हो सरकार का सारा नियम इस देश की जनता के लिए है उसके अपने लिए कोई नियम नहीं है
यह पहला सवाल है
दूसरा सवाल इस दौर में दो हज़ार चौबिस की दिशा में बढ़ते हुए राजनीतिक कदम में अगर विपक्ष एकजुट है तो विपक्ष के भीतर किसे कहां पर कैसे सेंध लगानी है इसकी जानकारी सत्ता को होनी चाहिए
और सत्ता के पास जानकारी तभी आएगी जब सत्ता खुले तौर पर जासूसी कर रही हो और जासूसी करने का ज़िक्र इससे पहले पेगासस के जरिए निकल कर आया था धीरे धीरे सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और उसके बाद उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया
लेकिन इस बार मामला कुछ और है और ज्यादा गंभीर है
क्योंकि विपक्ष राजनैतिक तौर पर कैसे कदम बढ़ाता है इसमें विपक्ष के तमाम राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता चाहे वह राहुल गांधी और उनकी टीम ही क्यों ना हो चाहे अखिलेश यादव और उनकी टीम क्यों ना हो चाहे शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी ही क्यों ना हो चाहे तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा ही क्यों ना हो
चाहे प्रवक्ताओं की कांग्रेस के भीतर एक पूरी लिस्ट हो चाहे ओवैसी का जिक्र हो चाहे इस दौर में केजरीवाल के ओएसडी का जिक्र हो हर फेरिस्त को खोलते चले जाइए तो सभी की जासूसी हो रही है होने वाली है और यह चेतावनी कोई दूसरा नहीं दे रहा है बल्कि यह चेतावनी वह
फोन दे रहा है जिस फोन का इस्तेमाल ये तमाम नेता करते हैं इस देश में और भी लोग करते हैं तो चेतावनी जनरल नहीं है सिस्टमेटिक तरीके से रेंडम नहीं है यह बिल्कुल इंडिविजुअल को लेकर है और उनको यह चेतावनी एप्पल के आईफोन के जरिए दी गई कि आप को अलर्ट किया जाए
रहा है कि स्टेट स्पॉन्सर्ड जासूसी इसका मतलब बहुत साफ है कि आपके जो संवेदनशील डाटा है उसको कोई दूसरा ले जाएगा जो आप बातचीत करते हैं जो आपका कम्युनिकेशन है उसको कोई दूसरा सुन लेगा जो कैमरा काम कर रहा है माइक्रोफोन काम कर रहा है वह भी उस दायरे में आ जाएगा
तो बचा क्या क्या राजनीतिक तौर पर सत्ता बचाने की यह आखिरी लड़ाई है
और इसमें जब हम जिक्र आपसे ब्लैक मनी मनी लॉन्ड्रिंग शैल कंपनियों का कर रहे थे तो जरा यह भी सोच लीजिए इस देश के भीतर में जिसने भी और जिस संस्था ने भी इसका विरोध किया उस संस्था को संभाले हुए लोगों को हाशिए पर जाना पड़ा या सरकार के सामने नतमस्तक होना पड़ा
ऐसा नहीं है कि इलेक्शन कमीशन ने विरोध नहीं किया ऐसा भी नहीं है कि आरबीआई ने विरोध नहीं किया ऐसा भी नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट के भीतर से कोई आवाज नहीं आई सब कुछ हुआ लेकिन बावजूद इसके सबको सरकार के अगर अनुकूल है तो यह चीजें चलती रहेगी
दो मसले बहुत साफ है आज सुप्रीम कोर्ट में कॉन्स्टिट्यूशनल बैंच बैठी है पांच जजों की चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ खुस उसकी अगुवाई कर रहे हैं और मसला इस देश के इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर है
इलेक्टोरल बॉन्ड का नेक्सस इस देश में कॉर्पोरेट और सत्ता के बीच का तालमेल खुले तौर पर दिखलाता है
और कॉर्पोरेट का मतलब पहचान के तौर पर सिंबॉलिक के तौर पर अगर अडानी का जिक्र है तो इसको राहुल गांधी खुले तौर पर अडानी सिस्टम बताने से चूक नहीं रह जाए और सारे मुद्दों को लेकर जब वो सामने आते हैं तो कहते हैं इस देश में अडानी की सरकार यानी प्रधानमंत्री मोदी दूसरे
नंबर पर है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी की जान उस तोते में है जो तोता कोई दूसरा नहीं अडानी है
हमें लगता है कि आज इन बातों पर इसलिए गौर कीजिए और आज पुरानी फाइलों को इसलिए खोली है क्योंकि इस देश के भीतर की डेमोक्रेसी जो थी
जो पावर बैलेंस था जो संविधान द्वारा प्राप्त स्वायत्त संस्थानों को अधिकार थी उसको कैसे धीरे धीरे खत्म कर सत्ता बचाने की पूरी लड़ाई मोदी काल में निकलकर खुले तौर पर सामने आ गई और आज जासूसी के जरिए या सुप्रीम कोर्ट के भीतर सुनवाई के जरिए यह बात निकल कर आ रही है
लेकिन उससे पहले विरोध होते थे सवाल उठाए जाते थे सरकार के नियम कायदों को कटघरे में खड़ा किया जाता था लेकिन एक सबको धीरे धीरे एक एक करके खारिज कैसे किया गया हमारी टीम ने इस पर उन तमाम डॉक्यूमेंट्स को निकाला और जानकारी आज आपको होनी चाहिए या
जो हम कह रहे हैं उसके पीछे का पेश किया है
उस देश का सबसे बड़ा आधा आज की सुनवाई जो सुप्रीम कोर्ट में हो रही है उसमें जो कहा जा रहा है हमें लगता है उससे पहले की परिस्थिति में आपको ले चलते हैं जब आरबीआई ने इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर कहा था कि मनी लॉन्ड्रिंग को यह बढ़ावा देगा और इसके जरिए ब्लैक मनी को वाइट
करना संभव होगा
जब इलेक्शन कमीशन ने कहा था कि चंदा देने वालों के नाम गुमनाम रखने से पता लगाना संभव ही नहीं होगा कि राजनीतिक दल ने धारा तीन आई भी का उल्लंघन करके चंदा लिया है या नहीं लिया है और विदेशी चंदा देने वाला भी कानून जो है वह बेकार हो जाएगा कोई मायने नहीं
रखेगा सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए काले धन को कानूनी किया जा सकता है इसका डर है और विदेशी कंपनियां सरकार और राजनीति को प्रभावित कर सकती है इसका भी तरह है
यह बात दो हज़ार सत्रह की है सत्रह में जब इलेक्टोरल बॉन्ड लाने से पहले चीजें चल रही थी
लेकिन जरा एक कल्पना और कीजिए कि आज की तारीख में सरकार जब सुप्रीम कोर्ट में जाकर यह कह दे कि इस देश की जनता को यह जानने का अधिकार ही नहीं है कि कोई भी पॉलिटिकल पार्टी कहां से चंदा ले रही है और चंदा देने वाला कौन है
वह चंदा देने वाला इक्कीस पैसे को रोटेट कर रहा है शेल कंपनियों के जरिए रोटेट कर रहा है अपनी ब्लैक मनी को वाइट बना रहा है या इस दौर के भीतर में जो मनी लॉन्ड्रिंग हो रही है उसके वह हिस्सेदारी में खड़ा हुआ है और चूंकि वह चंदा दे रहा है तो फिर उसकी जान
जनता को क्यों होनी चाहिए इस बात का ज़िक्र अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमण ने बहुत साफ तौर पर अदालत के सामने कल ही अपनी बात को रख दिया
और आज
जब पहल शुरू हुई क्या क्या कहा गया उससे पहले हमें लगता है एक बार फिर
कुछ पुरानी फाइलों को खोलिए जिस दौर में सवाल उठते थे इलेक्शन कमिश्नर ओपी रावत उनका बहुत साफ कहना था इलेक्टोरल बॉन्ड का मिसयूज शेल कंपनियां करेंगी
लेकिन उस वक्त नौकरशाह झोंक चुके थे
और इकनॉमिक अफेयर्स के सेक्रेटरी उस दौर में हुआ करते थे सुभाष चंद्र गर्ग उनका बकायदा रेकॉर्ड दो है जिसमें उन्होंने लिखा कि शेल कंपनियां इस का मिसयूज करेंगी इस बात का जिक्र बकायदा इलेक्शन कमीशन कर रहा है
उसके बाद इलेक्शन कमिश्नर बदले और एके जोती जब आए तो उन्होंने कहा नहीं नहीं व्यक्ति उम्मीदवार और नए राजनीतिक दलों को तो यह उपलब्ध होगा नहीं पुराने राजनीतिक दलों को उपलब्ध होगा और इससे क्या हानि पड़ेगी लेकिन इसी प्रक्रिया में नौकरशाहों ने सरकार को सुझाव दिया कि आप एक काम क्यों नहीं
करते हैं इस देश का इनकम टैक्स एक्ट इसको बदल डालिए
उसको बदलिए इस तरीके से कि अब आपको जो चंदा मिलेगा उसकी जानकारी आप देने की स्थिति में नहीं रहेंगे यानी जिसको पॉलिटिकल चंदा मिल रहा है नहीं बताएगा कि कहां से हमको पॉलिटिकल चंदा मिल रहा तो आईटी एक्ट बदल दिया गया
तीसरा सुझाव आया कि एफसीआई एक्ट को भी बदल डालिए सुझाव देने वाले को दूसरे शख्स थे
या तो सचिव स्तर के अधिकारी थे या ईडी में काम कर रहे लोग थे
जो सरकार के लाइमलाइट में आना चाहते थे सरकार के साथ खड़ा होना चाहते थे उन्होंने सुझाव दिया और एफसीआरए कानून भी बदल दिया गया जो कि विदेशी पैसे को लेकर इस देश में कड़े कानून के तहत बनाया गया और कल ही तो गहलोत के बेटे को दिल्ली एफसीआई कानून के तहत बुलाया गया जिसमें उन्होंने कहा हमारा विदेशी
पूंजी से कोई लेना देना नहीं है
लेकिन पूछताछ उनसे हुई
कि कुछ तो लेना देना होगा जो ही तो बात नहीं हमारे पास कुछ रैकवार तो है
अब सवाल यह है कि इस देश के भीतर में जो विदेशी कंपनी इस देश में कोई छोटी सी सब्सिडियरी कंपनी खोल लेती है
शेल कंपनी की तरह ही काम करेगा वो अगर सरकार को पैसा डोनेशन दे रही है
तो फिर उसकी जानकारी देगी नहीं ईडी को भी नहीं दी जाएगी और आईटी को भी नहीं दी जाएगी और सरकार को विदाई दी जाएगी क्योंकि एफसीआरए कानून में यह ढील दे दी गई जो विदेशी कंपनियां अपनी सबसे बड़ी कंपनियों के जरिए जो पॉलिटिकल फंडिंग इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए करेगी उसकी जानकारी देने की जरूरत नहीं है तो उस
को भी बदल दिया गया
अब तो कानून इस देश में पॉलिटिकल फंडिंग के लिए बदल गए
बात यहीं नहीं रुकती है बात यह है कि उस वक्त आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल हुआ करते थे हम जिक्र से चौदह सितंबर दो हज़ार सत्रह का कर रहे हैं
ऊर्जित पटेल ने उस दौर के वित्त मंत्री अरुण जेटली से कहा हम इस बात से चिंतित हैं कि वर्तमान में जो विचाराधीन मामले एक वाहक उपकरण के रूप में जो बॉन्ड जारी किए जा रहे इलेक्टोरल बॉन्ड जारी वह विशेष रूप से शेल कंपनियों के उपयोग का माध्यम बन जाएंगे और उसका कर दुरुपयोग होने की पूरी
संभावना है
तब वो सुझाव एक और देते हैं कि दरअसल आप ऐसा क्यों नहीं करते हैं कि जो पेमेंट हो वह डिजिटल फॉर्म में हो यानी डीमैट के जरिए हो और इसमें कोई फिजिकल फॉर्म गा रहे चैक ना रहे इलेक्टोरल बॉन्ड भी ना रहे अरे आप कम्प्यूटराइजेशन हो रहा है डिजिटल इंडिया है आप डीमेट के तहत और डिजिटल फॉर्म में आप
कर दीजिए अब सोचिए सरकार क्या जवाब देगी
हमने जो आपको इससे पहले कहा कि सरकार को अच्छा लगता है उन लोगों के नामों को छुपाना जो सरकार को डोनेशन देती है उन ब्लैक मार्केट करने वाले ब्लैक मनी को संजोए हुए लोगों के नाम को छुपाना या शेल कंपनियों को छुपाना अच्छा लगता है क्योंकि
जो पत्र इकनॉमिक अफेयर्स सेक्रेटरी सुभाष गर्ग ने तर्क दिया और आरबीआई गवर्नर को भेजा जो पाँच अक्टूबर दो हज़ार सत्रह को था उनका कहना था कि दरअसल यह इलेक्टोरल बॉन्ड की जो पूरी योजना है यह राजनीतिक चंदे को अधिक जवाबदेह और स्वच्छ बनाने का एक गंभीर प्रयास है
बात यहीं नहीं होगी उसके बाद उन्होंने कहा कि सरकार ने बड़ा इस पर विचार किया है कि अगर डीमैट फॉर्म में इलेक्टोरल बॉन्ड राजनीतिक दलों को के जरिए पैसा दिया जाएगा तो फिर जो पैसा दे रहा है उसको तो नाम सामने आ जाएगा जबकि गुमनामी प्रदान करने की योजना ही
तो प्रमुख विशेषता इस इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए है
यानी नाम को छुपाना है इसीलिए तो हम इलेक्टोरल बॉन्ड लेकर आए हैं
तो और आप कह रहे हैं कि कुछ सामने ले आइए
यह तथ्य इस पहलू की जानकारी आपके लिए बता दें कि जो एसबीआई है उसके पास तो सारी जानकारी होगी क्योंकि इलेक्टोरल बॉन्ड बेचने का अधिकार उसी को है
और योजना के तहत यह शुरुआती या फिर आगे देखेंगे लेकिन इस नाम को आप सामने लाने की जिद मत करिए को कि एसबीआई के पास अगर सबके नाम है तो कोई भी जान सकता है यही बात घूम के आज
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में कॉन्स्टिट्यूशनल बेंच के सामने पहुंचे
जहां पर कहा गया कि एसबीआई पब्लिक सेक्टर बैंक है
मालिक सरकार है
मालिक आरबीआई है आरबीआई भी सरकार के अधीन है
और उसमें एक नियम है कि इस देश की इनफोर्समेंट एजेंसी जो है
अगर वह जानकारी चाहे कि हमें जांच करनी है कौन पैसा दे रहा है तो वो उसको बता सकती है लेकिन इनफोर्समेंट एजेंसी भी तो सरकार के अधीन है जैसे ईडी सीबीआई आईटी है जिसका जिक्र बार बार विपक्ष करता रहा है और पार्लियामेंट के भीतर और सुप्रीम कोर्ट को लिखी गई चिट्ठी और राष्ट्रपति को भेजी गई चिट्ठी में भी विपक्ष ने
सी बात का जिक्र किया तो बचा क्या सब तो सरकार के हाथ में है और सारी चीजें सरकार खुद को बचाने के लिए कर रही है इसी प्रक्रिया में तो वह जासूसी भी कर रही है कि पकड़ेगा कौन सब कुछ तो हमारे अनुकूल है सिस्टम हमारा काम कर रहा है सत्ता हमारे हिसाब से चल रही है पूरे के पूरे एजेंसी हमारे
कूलर तो दिक्कत क्या है दिक्कत कोई नहीं है सरकार का एकाधिकार है सरकार जो मनचाहे सो कर सकती है इसमें एक नया पेच राहुल गांधी यह कह कर डालते हैं कि दरअसल सरकार अडानी की है वह उसे स्ट्रक्चर को सामने लेकर आते हैं कि कैसे इस देश की सारी सरकारी और देश की संपत्ति को
निजी हाथों में सौंपा गया और निजी हाथ तय करने लगे इस देश में बिजली बिल क्या होगा पानी बिल क्या होगा हवाई का किराया क्या होगा आप जब प्लेटफॉर्म पर जाएं टिकट क्या होगा जब आप हवाई अड्डे जाए वहां पर कितना पैसा लिया जाएगा जो किसान अपनी अनाज को गोडाउन में रखेगा एवज में कितना लिया जाएगा सब कुछ वही तय करने लगे
तो एक सिस्टम वह है और दूसरी तरफ सिस्टम सरकार का ऐसे कर रहा है और दोनों को मिलाइए का तो मतलब मोनोपॉली होनी चाहिए पैसे पूंजी की और जिसके पास पैसा पूंजी होगा उसको पैसा और पूंजी दिलाने का काम सरकार अपने तौर पर कर रही होगी तो काहे का ब्लैक मनी का है कि
कंपनी का है कि मनी लॉन्ड्रिंग कुछ भी नहीं बचा क्योंकि यह लड़ाई जिस रूप में चल रही है उसमें जब आज सुप्रीम कोर्ट के भीतर एक एक करके जो जिक्र हो रहा था हमें लगता है उसको भी आज आपको सुनना चाहिए
बहुत साफ तौर पर कहा गया कि इनकम टैक्स और एफसीआई को में संशोधन किया गया है यानी फंड किस्से आया बताने की जरूरत नहीं और यही बात होते होते आई कि अगर जांच एजेंसी इनफोर्समेंट एजेंसी चाहे कि कैसे की सीबीआई से उसे कुछ चाहिए क्योंकि उसकी फेहरिस्त में जो नेता है
नेताओं में तो बीजेपी के नेता भी हैं लेकिन उनकी फाइल नहीं खुलती है फाइल खुलती है जो विपक्ष में है जासूसी हो रही है जो विपक्ष में है
तो राजनीतिक तौर पर सत्ता बनी रहे इस पर इस देश के नौकर उन नौकरशाहों का पर एक है उस सिस्टम का स्टॉक स्ट्रेट है जो इस दौर में सरकार के लिए और सरकार के जरिए काम कर रहे हैं तो उर्जित पटेल तो अभी है नहीं उस दौर में रावत साहब थे जिन्होंने सवाल खड़ा किया था वह भी नहीं है
उस दौर के भीतर में आइएगा तो सुप्रीम कोर्ट के भीतर चीफ जस्टिस बी तो बदल गए क्योंकि यह मामला पहली बार अपने तौर पर उस दौर में आया था जब जस्टिस गवाही हुआ करते थे रंजन गोगोई हुआ करते थे वह भी बदल गए
तो मौजूदा वक्त में पुराने पन्नों को अगर जैसा ही खोल देगा तो आप चौक जाइएगा कि अच्छा ऐसा है और इसी रास्ते सरकार चल रही है लेकिन हमें लगता है सुनवाई के उस हिस्से को आज जरा समझने की कोशिश इसलिए भी कीजिएगा को की पार्लियामेंट की सौर यह सुप्रीम कोर्ट की प्रोसीडिंग का एक हिस्सा है
अगर जांच एजेंसी इनफोर्समेंट एजेंसी चाहेगी तो एसबीआई जानकारी देगा लेकिन सवाल है सभी जांच एजेंसी सरकार के कंट्रोल में है और एसबीआई भी सरकार के अधीन तो राजनितिक दल कह सकते हैं उन्हें पता ही नहीं किसने फंड दिया और फिर विदेशी कंपनियां भी भारत में सब्सिडरी खोलकर अगर इलेक्ट्रॉल
बॉन्ड के जरिए फंड देती है और शेल कंपनी जो अपने आप को जीरो प्रॉफिट एंड लॉस में दिखलाती है और जबकि फिलहाल जो देश के भीतर कंपनियां है वह टैक्स हैवन के तौर पर बन जायेगी और मनी को रूठ कर पॉलिटिकल दल को पैसा देने में बहुत आसानी होगी
तो क्या ये सभी राजनीतिक दलों को मिलेगा यह सवाल भी उठा लेकिन उससे पहले सवाल उठा तो प्लेइंग फील्ड तो सारी पॉलिटिकल पार्टीज के लिए सबको पैसा मिलेगा तो जवाब आया जी नहीं सबको पैसा नहीं मिलेगा एक डाटा आपको बतलाते हैं और यह डाटा रखा गया जिसमें जानकारी आई कि लगभग साठ फीसदी पैसा
दो हज़ार बाईस मार्च तक का डॉक्यूमेंट आज रखा गया जो इलेक्टोरल बॉन्ड का है बीजेपी को मिला पाँच हज़ार दो सौ इकहत्तर करोड़ सबसे प्रमुख विपक्षी नेशनल पॉलिटिकल पार्टी कांग्रेस को मिला नौ सौ बावन करो
अगर ऐसी स्थिति है तो इसका मतलब बहुत साफ है कि सात पर्सेंट भी छोटा और तमाम राजनीतिक दलों को मिला दीजिएगा तो लगभग बहत्तर परसेंट बीजेपी के खाते में और बाकी छिटपुट दूसरों के खाते में बढता चला जाता यह पहली स्थिति निकलकर आई दूसरी स्थिति निकलकर आई कि इस देश में जो तेईस लाख कंपनियां रजिस्टर्ड
है कौन कितना किस रूप में डोनेट कर रहा है कौन अपनी एक कंपनी से दूसरी कंपनी में पैसा ट्रांसफर कर रहा है कोई जानकारी नहीं आएगी अगर आप कानूनी तौर पर चीजें अनुकूल नहीं रखेंगे भारत सरकार कहती है कानून तो है
तो सरकार कहती है कानून है और सुप्रीम कोर्ट में आवाज उठती है कानून तो है लेकिन यह आपके लिए नहीं है क्योंकि आपने तो संशोधन कर लिया तो चीजें बची ही नहीं तो सबकुछ आप इस देश का देते चले जाइए कॉर्पोरेट और यह नेक्सस एक ऐसी परिस्थिति में जाकर टिक जाएगा जहां कॉर्पोरेट के हिसाब से ही
यह देख चलने लगेगा और राजनीतिक नहीं बल्कि इस देश की इकोनॉमिक पॉलिसी भी वैसा ही बनने लगेगी तो आप क्या करेंगे
तो कोई जवाब नहीं इस पर और यह बात निकलते निकलते इस तरीके से आई है यहां जानकारी दे दें कि दरअसल यह पूरा मामला एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म ने जो उठाया एडीआर ने यह कह के कि कैसे इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए ब्लैक मनी शेल कंपनी मनी लॉन्ड्रिंग सबको पनाह सरकार ने अपने फायदे के लिए दी हुई है वहीं से यह
निकलकर आई और इसके लिए उदाहरण भी मांगे सुप्रीम कोर्ट ने आप कैसे कह सकते हैं कि जो कॉर्पोरेट पैसा दे रहा है उसी कॉर्पोरेट को सरकार लाभ दे देती है तो यह भी निकल कर आया आज की एक रिपोर्ट आई ऑर्गेनाइज क्राइम करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट यह अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टस की टीम है
जर्नलिस्टों की टीम है जिन्होंने एक रिपोर्ट दी कि दरअसल वेदांता ग्रुप
माइनिंग में उसे कोई दिक्कत ना हो यानी कोई पर्यावरण आस्पेक्ट सामने आकर खड़ा न हो जाए तो इसीलिए जो प्रमुख पर्यावरण नियम थे सरकार ने बदल डालें और वेदांता ने इस दौर में जो फंडिंग की उसकी प्रमुख पार्टी चुनी हुई पार्टी बीजेपी थी और वेदांता ने जो बीते पांच बरस में दो हज़ार बाईस तक चार
सौ सत्तावन करोड़ दिए और दो हज़ार तेईस में एक सौ पचपन करोड़ रुपए फंडिंग के तौर पर बीजेपी को दी है
अब
सुप्रीम कोर्ट के सामने यह मामला है
पैक के साथ मामला है अब आगे आगे का सवाल यह है कि जो आरबीआई कह रहा था जो इलेक्शन कमीशन कह रहा था जो सुप्रीम कोर्ट कह रहा था वो सब दो हज़ार सत्रह में जब सरकार ने नहीं माना और उसके बाद पार्लियामेंट की ताकत को दिखाते हुए चीजे अपने अनुकूल कर ली तो सवाल
चार सवाल सबसे बड़े इस दौर में निकल कर खड़े हो गए
यानी इस देश में सरकार का कोई मतलब नहीं है अगर कानून है तो वह कानून से ऊपर है
इस देश में सरकार कानून जनता के लिए बनाएगी विपक्षी राजनीतिक दलों के लिए बनाएगी लेकिन जहां उसके अनुकूल पाइपलाइन है तो उसे कोई रोक सकता रही है
यानी जनता के लिए रिस्ट्रिक्शन है
और सत्ता को लाभ मिले जहां जहां वहां सत्ता के लिए कानून कोई रुकावट नहीं काम करेगा
अगला सवाल क्या वाकई ब्लैक वाइट करने की स्थिति में इलेक्टोरल बॉन्ड है और इस देश की इकोनॉमी को लाकर खड़ा कर दिया गया शुरुआती दौर में जो सुप्रीम कोर्ट में बात रखी गई उसमें तो यही बात खुलकर निकलती है तीसरी बार जो ईडी मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर लगातार नकेल कसते चली जा रही और एक सौ पच्चीस
पॉलिटीशियन उसके डायरी में दर्ज हैं
उससे हटकर मनी लॉन्ड्रिंग अगर पॉलिटिकल इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए हो रही है और बॉन्ड के जरिए कमाया जा रहा है पैसा लाइव तो उन कंपनियों को क्या ईडी ने छुआ नहीं छुआ
क्योंकि एसबीआई से सरकार को पता चलेगा
इसने पैसा दिया जिसने पैसा दिया उसको लाभ सरकार को देना है तो उसके अनुकूल नियम बन जाएंगे उसको तमाम जगहों पर एनओसी मिल जाएगी
और यह एक ऐसी परिस्थिति में देश आकर खड़ा है जिसमें राजनितिक लाभ पाने वाले गलत तरीके से शेल कंपनियां खड़ा करने वाले काले धन वाले सभी का नेक्सस खुले तौर पर पॉलिटिकल फंडिंग के साथ अगर जुड़ जाता है तो इस दौर में जो नौकरशाह इस देश के हैं वह इकनॉमिक
अफेयर्स के सेक्रेटरी गर्ग साहब काम जिक्र कर रहे थे लेकिन सरकार चलाना और देश चलाने में सिस्टम ही सत्ता के अनुकूल अगर इस तरीके से बना दिया जाए कि हेल्दी कंपटीशन तो दूर की बात है
जो एक पूरी लंबी फेहरिस्त है कि सबकुछ अडानी के हवाले क्यों सबकुछ कॉर्पोरेट के अनुकूल क्यों इस देश के रिस्ट्रिक्शन आम लोग और जनता के प्रतिकूल क्यों तो उसका एक ही जवाब आखिर में निकलकर आता है
सरकार को क्या और सत्ता को क्या यह लगने लगा है
कि उसकी पिटाई होने वाली है
इसीलिए उसने सारे फ्रंट खोल दिए हैं
जिसको जेल में डालना है जेल में डाला जाएगा जैसे सुनवाई होगी उसी अनुकूल सुनवाई होगी जो फैसले आएंगे वह सत्ता के अनुकूल होंगे और स्थिति निकलते निकलते कहां तक आ गए
और परिस्थितियां पूरी राजनीतिक विपक्ष के लिए कितनी नाजुक है
इसका आखिरी का वह हिस्सा जरा समझिए जब चंद्रबाबू नायडू जो जेल में है व जेल से अपने लोगों को कहते हैं तेलांगना में जाओ और कांग्रेस की मदद करो
क्योंकि आंध्र प्रदेश में तो
वहां के
पॉलिटिकल सत्ता के साथ बीजेपी खड़ी है और मुझे तो जेल में डाल दिया गया तो कम से कम तेलांगना के चुनाव में कांग्रेस के साथ तो खड़े हो जाओ बूथ स्तर पर खड़े हो जाओ यानी राजनैतिक तौर पर समूचे विपक्ष को खत्म करने की परिस्थिति और समूचे विपक्ष की राजनीतिक तौर पर छटपटाहट
इन दोनों परिस्थितियों के बीच में इस देश की ईमानदारी इस देश की डेमोक्रेसी इस देश के कॉन्स्टिट्यूशनल इंस्टीट्यूशंस सभी दांव पर है
सभी की साख दांव पर है सभी के कामकाज पर समझ लीजिए तो ठीक है
वरना सुप्रीम कोर्ट का इंतजार करते हैं
जब जागो तभी सवेरा
बहुत बहुत बहुत शुक्रिया

Tuesday, 10 October 2023

इलेक्ट्रॉल बॉन्ड और सुप्रीम कोर्ट के साथ राजनीति ।

 
दोस्तों  राजनीति का खेल कॉन्फिडेंस का खेल है और अगर आप में कॉन्फिडेंस नहीं है तो फिर राजनीति मत कीजिए शायद ये सबसे बड़ी सीख वसुंधरा राजे सिंधिया को जो जयपुर में बैठी है लेकिन राजस्थान के चुनाव को लेकर उनके
के भीतर कॉन्फिडेंस नही है जो दिल्ली में बैठे मोदी और अमित शाह में है यहां तक कि शिवराज सिंह चौहान के भीतर भोपाल में बैठकर मध्य प्रदेश के चुनाव को लेकर जो कॉन्फिडेंस नहीं है वह कॉन्फिडेंस दिल्ली में बैठे मोदी और अमित शाह के पास है
लेकिन अगला सवाल है कि यह कॉन्फिडेंस आता कहां से है ? इस कॉन्फिडेंस के पीछे वह कौन सी ताकत होती है जो राज्यों के चुनाव हो या लोकसभा के चुनाव दिल्ली की बीजेपी की सत्ता जिस लिहाज से चलती है उसका मैसेज बहुत साफ होता है ।

सर्वे हमारा होगा लिस्ट हमारी होगी जीतेंगे कैसे आप यह भी हम पक्का करेंगे यानी आप सिर्फ प्यादे है लेकिन दूसरा कोई प्यादा है और हम वर्षीय और राजा है
यह सब कुछ कहने की बात नहीं है ।
 लगता ऐसा ही रहा कि दिल्ली में बैठकर मोदी और अमित शाह की ताकत का एहसास तमाम बीजेपी के नेताओं को धीरे धीरे होने लगी लेकिन बीजेपी के भीतर मोदी और शाह की ताकत जहां से निकलकर आती है क्या उसी नब्ज पर ऊंगली अब सुप्रीम कोर्ट ने रख दी है ?
यानी गर्दन को पकड़ लिया है कि इस पाठक के पीछे जो कॉर्पोरेट की पूंजी है जिस तरीके से पूंजी का बहाव पार्टी के साथ चलते चला जाता है और जितनी बड़ी तादाद में पैसा इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए आता है और कॉर्पोरेट के जरिए आता हे उसमें कानूनी तौर पर अब वक्त क्या आ चुका है ?   सुप्रीम कोर्ट इस पर सुनवाई करे और फैसला दे दें सुप्रीम कोर्ट ने आज इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर अपनी फाइल खोल दी और तय यह हुआ कि 31 अक्टूबर को फैसला इस पर आ जाएगा यानी जिस दौर में पांच राज्यों के चुनाव पूरे प्रचार के यौवन पर होंगे उस दौर में इलेक्टोरल बॉन्ड पर फैसला इसी बीच आना लेकिन सवाल है कि आज जब फाइल खोली और 31 अक्टूबर की जो तारीख तय हुई और उसमें यह भी कहा गया अगर मामला आगे बढ़ेगा तो 1 नवंबर तक चलेगा यानी चुनाव पहली वोटिंग सात नवंबर को होनी है जो मिजोरम में होनी है । 

लेकिन अगला सवाल यह है कि पूरे के पूरे नवंबर के भीतर में पांच राज्यों के चुनाव है और वोटिंग होनी है और उसके बाद लोकसभा के चुनाव है लेकिन क्या वाकई इलेक्टोरल बॉन्ड की फाइल इतनी मोटी और इतनी मजबूत है? या फिर सरकार के भीतर कॉन्फिडेंस सिर्फ उसी के हिसाब से आता है । या इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए कॉरपोरेट फंडिंग जो इस दौर में बीजेपी की होती चली गई वहीं उस ताकत की असल पहचान है? जिसके दूसरे नेताओं के पास जो पहुँच नहीं पाती है और तमाम दूसरे राजनीतिक दलों के पास भी इतनी बड़ी फंडिंग होती नहीं है एक क्षण के लिए पहले फाइल आज इसलिए खोली है क्योंकि आज सुप्रीम कोर्ट के भीतर सुनवाई होते वक्त जस्टिस तो ये जरुर जानना चाहा कि अब कई विधानसभा चुनाव के वक्त और लोकसभा चुनाव के वक्त भी या इलेक्ट्रॉल बॉन्ड  बिकते हैं और उस इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए पॉलिटिकल फंडिंग इतनी बड़ी होती है क्या पाता इस दौर में आरटीआई के जरिए आपको कोई जानकारी नहीं मिलेगी क्या इसी दौर में
आरक्षण को छुपाया जाता है ? फंडिंग के जरिए यह बड़े हल्के शब्दों में सही लेकिन बात निकलते निकलते यहां तक आ ही गई कि आप 31 अक्टूबर तारीख को इस पर सुनवाई और फैसला दिया जाएगा ।

लेकिन उससे पहले एक परिस्थिति को जरा समझने की शुरुआत कीजिए दो 2091 के चुनाव में कितना इलेक्टोरल बॉन्ड से पैसा आया जो महत्वपूर्ण राज्यों के चुनाव जहां जहां इस देश के भीतर होते हैं उसी महीने या उससे दो महीने पहले इलेक्टोरल बॉन्ड बिकना शुरू हो जाता है मसलन अगर कर्नाटक के इलेक्शन को पिछले दौर में देखिए दो हज़ार तेईस के दौर में जो अप्रैल और मई के बीच में जो पूरा नोटिफिकेशन वोटिंग हो रही थी अप्रैल के महीने में इलेक्ट्रॉल बॉन्ड 917  करोड़ के खरीदे गए और उसमें से लगभग 85%  बीजेपी के पास चले गए अप्रैल से पहले जनवरी में सिर्फ 308 करोड़ थे जो 917 करोड़ हो गए अप्रैल के महीने में जब इलेक्शन का नोटिफिकेशन जारी हो गया और इलेक्शन खत्म होने के बाद भी कुछ पर पाई 812 करोड़ की रही ज़रूर यानी चुनाव से ऐन पहले और चुनाव के ठीक अगले महीने जो इलेक्टोरल बॉन्ड की रकम होती है वह बढ़ जाती है ।

 मसला सिर्फ कर्नाटक इलेक्शन का नहीं है मसला है उससे पहले याद कीजिए दो हज़ार बाईस में उत्तर प्रदेश के चुनाव जनवरी के महीने में उससे पहले या उसके बाद कभी भी 600 करोड़ रुपये इलेक्ट्रॉल बॉन्ड पार नहीं किया लेकिन यूपी इलेक्शन से ठीक एक महीने पहले जनवरी दो हज़ार बाईस 2022 में एक हज़ार दो सौ तेरह 1213 करोड़ रुपए इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए पॉलिटिकल फंडिंग हो गई उससे ठीक पहले चलिएगा दो हज़ार बीस 2020  में जब बिहार का इलेक्शन था वो दरअसल कोविड के बाद से निकली हुई परिस्थिति लेकिन बावजूद इसके इलेक्शन से पहले सिर्फ इक्कीस 21 करोड आते हैं इलेक्शन के बाद सिर्फ बयालीस 42 करोड आते हैं लेकिन इलेक्शन के पीरियड में दो सौ बयासी 282 करोड़ आते हैं और अगर उससे पहले आप लोगसभा के चुनाव में चले जाइएगा जैसे दो हज़ार चौबिस के लोकसभा चुनाव के वक्त में कितनी कॉरपोरेट फंडिंग होनी है इसकी इंतहा अब इसलिए नहीं की जा रही है क्योंकि बड़े बड़े कॉरपोरेट का पैसा इस मौजूदा सरकार पर लगा हुआ है यानी सरकार के साथ इस देश के भीतर में जिन बोतलों का जिस कॉर्पोरेट का जिस विचारधारा का कुछ भी सटेक पर लगा हुआ है वो सबकुछ दो हज़ार चौबिस के चुनाव में अपना पूरा करना चाहेगी व करता ही नहीं चाहेंगे कि मोदी सरकार हार जाए जिससे उसका जो कुछ बीते नौ बरस में स्टेक पर लगते चला गया आने वाली सरकार में वो कठखड़े 
में खड़ा हो जाए या उनके लिए मुश्किल हो जाए तो दो हज़ार चौबिस का चुनाव तो फंडिंग के लिहाज से बहुत बड़ा चुनाव होगा लेकिन एक क्षण के लिए जानिए दो हज़ार उन्नीस 2019 के चुनाव के वक्त में जब जनवरी का महीना था तो सिर्फ तीन सौ पचास 350 करोड़ हो लेकिन जैसे ही नोटिफिकेशन मार्च के महीने में होता है एक हज़ार तीन सौ पैंसठ 1365 करोड़ हो पाई उसके बाद जैसे ही पहला फेज की वोटिंग होती है दो हज़ार दो सौ छप्पन 2256 करोड़ पाए और वोटिंग चल रही होती है रिजल्ट आया नहीं होता है मई के शुरुआत में आठ सौ बाईस 822 करोड़ यानी सिर्फ तीन महीने के भीतर चार हज़ार चार सौ तैंतालीस 4443 करोड़ रुपए की इलेक्ट्रॉल बोर्ड से फंडिंग पॉलिटिकल पार्टी को हो जाती है।


तो क्या इलेक्शन कमीशन इस पर नजर नहीं रखता है और क्या सुप्रीम कोर्ट ने अब इस नब्ज को पकड़ लिया है और इकतीस तारीख को व जिस फैसले का इंतजार हो सकता है यह देश इस रूप में कर रहा वह मामला आज कैसे किस रूप में सामने आया हमें लगता है आज उसकी प्रोसीडिंग्स क्यों हुई
सुप्रीम कोर्ट के भीतर उसे भी सुनना चाहिए क्योंकि एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म की तरफ से
जब वकील ने इस बात का जिक्र किया कि दरअसल हर लोकसभा और विधानसभा चुनाव से पहले इलेक्ट्रॉल बॉन्ड बिकना शुरू होता है आरटीआई से जवाब नहीं मिलता है भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है कौन पैसा दे रहा है जानकारी नहीं मिलती है और बाद में उन कंपनियों को आप लाभ दे सकते हैं
और यह कह सकते हैं ये कौन कहेगा कि उन्होंने ही फंडिंग की को फंडिंग की जानकारी तो है नहीं तो तब सीजीआई यानी चीफ जस्टिस का सवाल था तो क्या बैंक के पास जानकारी होती है
तो क्या कैश जो दिया जाता है या जिस रूप में बॉन्ड लिया जाता है वो सब कुछ गुमनाम होता है उन्होंने कहा वकील ने जानकारी दी एडीआर की तरफ से जी दोनों ही परिस्थिती होती है बैंक के पास जानकारी भी होती है और कौन दे रहा है यह गुमनाम भी रखा जाता है तब कहना पड़ा यह तो बड़ा महत्वपूर्ण है और उसके बाद सी
यानी चंद्रचूड़ ने अपने तौर पर कहा क्या इसे इस रूप में देखें कि बैंक या नकदी से जो खरीदा जा रहा हो या वह बैंक तो चैनल का श्रोत वर्किंग या कहें बैंकिंग चैनल ही माना जाए और वह पहचान गुमनाम है लेकिन नकदी पूरी तरह से गुमनाम है यह बताने का काम और ना ही का
बैंक का ही है तो फिर वकील साहब की तरफ से कहा गया ये दोनों ही परिस्थितियों और जब यह बात का जिक्र वाकई यह महत्वपूर्ण है और चुनावी फंड एक वाहक फंड की तरह है जिसमें एक व्यक्ति या यह व्यक्ति के नाम या धारक फंड में कौन कैसे ले रहा है इसकी जानकारी नहीं मिलती है तब उसके बाद से का
हा गया कि देखिए यह मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के पास ही जाता है सरकार की तरफ से इसकी जानकारी दी गई है ऐरे गैरे को नहीं जाता है तो सीजीआई का सवाल था तो यह राजनितिक मान्यता प्राप्त जो डाला है अगर उनको इस देश में एक परसेंट वोट मिल रहा हो तो भी क्या यह फंडिंग बोले जाएंगे तो कहा
यह तो किया जा सकता है क्योंकि इसमें मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के पास यह जाता है उसमें एक परसेंट कोई मैटर नहीं करता है यानी दोनों तरफ के लेनदेन को गुमनामी में छुपा लेना या ज्ञात कर देना या सार्वजनिक डोमेन से जानकारी को गायब कर देना ये कैसा मैसेज और उसी के
बात से सवाल आया कि क्या इस को मनी बिल से जोड़ा जाए या न जोड़ा जाए
की लगातार इस बात का जिक्र था कि मनी बिल के जरिए इस को जोड़ा जाए लेकिन चीफ जस्टिस पर इंडिकेट किया कि दरअसल मनी बिल का मसला जो है वह लाभ सुनवाई के लिए जा चुका है सात जजों की बेंच सुनवाई कर रही तब कहा गया सात जजों की बेंच सुनवाई कर रही तो एक दो महीने रोका जाए क्या जब उनका फैसला जाए तो चीफ जस्टिस ने
काम कोई भविष्यवाणी नहीं कर सकते हैं लेकिन अगर आप उससे हटकर इस परिस्थिति को सुनना चाहते हैं तो फिर हम तैयार हैं
और ये तैयार वाली जो परिस्थिति थी उसमें बहुत साफ तौर पर उसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि जब वकील और एटॉर्नी जनरल दोनों प्रारंभिक दलीलें जो है और उसमें सहमति हो गई है तो अब जो कुछ भी अदालत में सौंपे जा चुके हैं दस्तावेज सौंपे जा चुके हैं लेकिन उसके बावजूद भी सरकार
कार की तरफ से कोई जी अगर कोई आवेदन करना चाहें या ईडी की एडीआर की तरफ से कोई वकील आवेदन करना चाहे तो कर सकते हैं लेकिन सॉफ्ट कॉपी नोडल काउंसलिंग द्वारा संकलित की जाएगी और मामले की अंतिम सुनवाई इकतीस अक्टूबर को सूचीबद्ध किया जाता है और अगर इस पर कोई सुनवाई बड़ी हो जाती है
है तो एक नवंबर तक यह जारी रहेगी और सभी प्रस्तुतियां सत्ताईस अक्टूबर तक नोडल काउंसिल द्वारा
संकलित की जाएगी और यह स्टैंडर्ड ऑपरेशन प्रॉक्सी के तहत पूरी की पूरी कार्रवाई होगी इंडिकेशन बहुत साफ है
जिस दौर में इलेक्शन हो रहा होता है उसी दौर में इलेक्टोरल बॉन्ड बैंक बेचना शुरू करते हैं और यह माना जा रहा है कि इस दौर में जब पांच राज्यों के चुनाव का ऐलान हो गया है तो पंद्रह अक्टूबर के बाद से कभी भी इलेक्टोरल बॉन्ड दुबारा से बिकने शुरू हो जाएंगे जो नवंबर भर भी देंगे
और उसके बाद दिसंबर में भी कुछ हिस्सा पंद्रह तारीख तक कर दिया जाएगा और उसके बाद दो हज़ार चौबिस के चुनाव में या देश चला जाएगा अगला सवाल यह है कि लगातार अगर आप फंडिंग को देखें चाहे वह कॉरपोरेट फंडिंग हो या इलेक्ट्रॉल फंडिंग हो अगर अस्सी फीसदी तक हिस्सा सत्ताधारी पार्टी को जा रहा
और नाइंटी एक पर्सेंट तक जो क्षत्रप है सत्ता में उनको भी मिला दिया जाए तो उनके पास जा रहा है यानी सत्ता के साथ कॉरपोरेट फंडिंग खड़े होने में हिचकती नहीं है और इस दौर में कॉरपोरेट फंडिंग और इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए की फंडिंग को कानूनी तौर पर इस तरीके से रखा गया
जिससे कोई
आक्षेप न करें कोई उंगली उठाई लेकिन यह मामला लगातार चल रहा था और इसमें तमाम डॉक्यूमेंट्स एडीआर ने अपनी तरफ से रखें और इस बात की जानकारी दी कि दरअसल यह फंडिंग किस तरीके से पब्लिक डोमेन में आना चाहिए अगर कोई देवी रहा है तो बताएं क्योंकि इससे पहले की परिस्थिति की कि कोई भी विदेशी
फंड नहीं आना चाहिए लेकिन अब यह व्यवस्था है कि विदेशी फंड आ सकता है शर्तें की है कंपनी हिन्दुस्तान में हो हिंदुस्तान से जुड़ी हुई और हिंदुस्तान से उसका जुड़ाव किसी न किसी रूप में हो चाहे सत्तर फीसदी से ज्यादा पैसा बाहर का लगा हो लेकिन सरकार ने छूट दे रखी है कि उसमें विदेशी ने
देश हो सकता है तो वह फंडिंग भी कर सकता है तो जो विदेशी निवेश कर सकता है वह फंडिंग भी कर सकता है तो इस देश की पॉलिसी भी उस फंडिंग करने वाले को लाभ भी पहुंचा सकती है यह भी बड़ा क्लियर कट मसला है तो क्या यही वह एक ऐसी नब्ज है जो दिल्ली की सत्ता या बीजेपी के मौजूदा हाई कमान को
इतनी ताकत देती है कि वह कॉन्फिडेंस के साथ
सर्वे कराते हैं उसी हिसाब से जिसे मनचाहे टिकट दे जिसे मनचाहे टिकट नहीं दें चाहे तो सांसदों को उतार दें चाहे तो राज्य के मंत्रियों के टिकट काट दें चाहे तो एमएलए का टिकट काट दें चाहे तो नई तस्वीर लेकर आए गारंटी इस बात की है कि कोई दूसरे में यह कॉन्फिडेंस क्यों नहीं आता है
और अगर यह कॉन्फिडेंस इतना बड़ा है और अगर उसकी गर्दन पर सुप्रीम कोर्ट की ऊंगली अब चली गई है दरअसल पूरा मसला फंडिंग का है तो क्या इलेक्शन के बीच में अगर इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर अब फैसला आने की तैयारी में जब बात बढ़ चुकी है और देश के भीतर में किसी भी पैसे को
कोई कैसे छुपा सकता है इस सवाल का जवाब तो तुरंत सुप्रीम कोर्ट पहुंच सकता है
और खासतौर से तब जब बसवा हजारों करोड़ का और वो सीधे तौर पर इस देश की राजनीति को प्रभावित कर रहा हो जो राजनीति इस देश के भीतर में डेमोक्रेसी को स्थापित करने का दावा करती हो और डेमोक्रेसी का मतलब इस देश में चुनाव हो और चुनाव के साथ की प्रक्रिया चुनाव आयोग
की भूमिका और इस देश के भीतर में इलेक्शन कमीशन की कार्रवाई अगर नहीं होती है क्योंकि वहां पर नियुक्तियां भी सरकार कर रही है तो ऐसे में क्या सुप्रीम कोर्ट अब इन बातों को समझ रखा है और समझने की परिस्थिति में है
दौर में अब सुप्रीम कोर्ट के भीतर यह मामला जाएगा तो क्या एक ऐसी परिस्थिति आएगी जिसमें सरकार के लिए अब मुश्किल होने वाली है और यही वह कॉन्फिडेंस है क्योंकि यह कॉन्फिडेंस का मतलब क्या होता है हमें लगता है इसके लिए राजस्थान और मध्य प्रदेश की जो लिस्ट जारी कई उसको भी परखा जा सकता है एक ग्यारह सांसदों को होता
आ जा चुका है साथ सांसद लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर राजस्थान से चुनाव लड़ेंगे चार सांसद अभी तक जो ऐलान हुआ है वह मध्यप्रदेश से चुनाव लड़ेंगे राजस्थान के भीतर ऐसे ऐसे चेहरे गायब हो गए जो सोच रहे थे हम चुनाव मैदान में नजर आएंगे वसुंधरा राजे जो सोच रही थी कि हमारे लोगों को टिकट दिया जाएगा
तो उसमें से चालीस पर्सेंट को अभी टिकट दिया गया बाकियों को टिकट नहीं दिया गया जो उनकी अपने चेहरे खुद वसुंधरा राजे चुनाव लड़ेंगी नहीं वैसा ही सस्पेंस से जैसे शिवराज सिंह चौहान को आखिरी क्षण में बुधनी से टिकट दे दी गई चलिए आप भी चुनाव लड़ लीजिए लेकिन एक क्षण के लिए सोचिए किरोड़ी लाल मीणा
दीया कुमारी राज्यवर्धन राठौड़ बालक नाथ देवजी पटेल भागीरथ चौधरी नरेंद्र खीचड़ यह दरअसल सांसद हैं जो मैदान में कूदे है लेकिन जिक्र इसका नहीं है दीया कुमारी कहां से चुनाव लड़ रही है विद्याधर नगर से चुनाव लड़ेंगी जो कि भैरो सिंह शेखावत के परिवार की सीट हुआ
करती थी लेकिन अब दीया कुमारी को वहां से उतार दिया गया वसुंधरा के सबसे करीबी राज पाल शेखावत उनकी सीट खोटे भरा थी वहां से राज्यवर्धन राठौड़ को टिकट दे दिया तो क्या यह कहा जाए कि जो करीबी है चाहे वह बाबूलाल गुज्जर हो चाहे राजपाल सिंह शेखावत तो वह
का टिकट कट गया और वसुंधरा की नहीं चली या यह माना जाए कुछ उनके करीबी जो शुभकरण चौधरी है या बबलू चौधरी को टिकट दे दिया गया लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के भीतर क्या वाकई एक ऐसी बिसात दिल्ली का हाई कमान बिछाता है जिसमें वह अपने तौर पर संतुष्ट होता है कि दरअसल इससे पहले की राजनीति जहां जहां चुनाव हारी
वहां वहां भी हम नए तरीके से अब राजनीति की कमान को कसेगी उन्नीस जगह ऐसी है जहां से बीजेपी दो हज़ार आठ के बाद चुनाव जीती ही नहीं उन उन्नीस सीटों में से ग्यारह जगहों पर बिल्कुल नए उम्मीदवार को उतार दिया गया वह लालसोट का इलाका है नवलगढ़ है फतेहपुर है झुंझुनू
ऐसा चोर है बस्सी है बागीदौरा है सपोटरा है कोटपुतली है डांटा भागा है लक्ष्मण गढ़ है ये सारी परिस्थिति बताती है कि दिल्ली हाई कमान अपने तौर पर कितना मजबूत है
दूसरी परिस्थिति यहां से शुरू होती है इस देश के भीतर क्षत्रपों की राजनीति करते हुए चाहे वसुंधरा सोचती रही हो बहुत मजबूत रहेगी चाहे शिवराज सिंह चौहान सोचते रहे या परिवार के तौर पर सिंधिया परिवार सोचता रहा कि हमारी ताकत जहां भी रहेगी कम से कम इस पूरे इलाके में
जो ग्वालियर संभाग का इलाका है चंबल संभाग का इलाका है यहां हमारे ही तूती बोलेगी तो एक झटके में दिल्ली के कॉन्फ्रेंस में उन्हें भी दिखा कर रख दिया और अपने तौर पर देखिए तो यशोधरा राजे ने कहा मैं इस बार चुनाव नहीं लड़ा जो शिवपुरी से चुनाव लड़ती है
वसुंधरा राजे चुनाव लड़ेंगी नहीं लड़ेंगी राजनीति में उनका आने वाले वक्त में क्या योगदान होगा कोई नहीं जानता है इस दौर में ज्योतिरादित्य सिंधिया कहां टिकेंगे कैसे टिकेंगे कोई नहीं जानता है
कुछ एमएलए को जो हटा दिया गया कुछ पुराने एमएलए को टिकट दिया गया तो क्या यह एक ऐसी परिस्थिति है इस देश के भीतर में जिसमें चुनावी जीत ही सारे कॉन्फिडेंस को पैदा करती है क्योंकि इस देश के भीतर की परिस्थिति में बहुत एग्रेसिव पॉलिटिक्स इस दौर में मोदी और शाह
की रही है वह इतनी एग्रेसिव तरीके से चली कि उसके काउंटर में कांग्रेस को भी एग्रेसिव होना पड़ा अपनी पारंपरिक राजनीतिक लाइन को छोड़कर भी ओबीसी पिछड़े और जाति की राजनीति को कहीं ज्यादा तेजी से उभरने लगी यानी उसकी अपनी जो आइडिया ऑफ कांग्रेस या आइडिया ऑफ फील्ड
दिया था वह एक झटके में दरकिनार किया और न्याय की एक नई प्रक्रिया और नई पहल को शुरुआत कर दी गई तो क्या यह माना जाए कि यह पूरा का पूरा कॉन्फिडेंस जो चुनाव जीतने के लिए होता है उसमें तीन ही महत्वपूर्ण चीज मैटर करती है जो कॉन्फिडेंस के पीछे होती है
पहली चीज जो सबसे बड़ा वह मनी ट्रेल होता है पैसा होता है सुप्रीम कोर्ट ने उस पर उंगली रखी है मनाइए कि उस पर जो फैसला आए वह फैसला इस देश की राजनीति को एक साफ करने की दिशा में ले जाए दूसरी परिस्थिति पर उंगली कोई अर्थ नहीं पाया अलग अलग माध्यमों से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
जरुर खटखटाया गया लेकिन वहां पर केंद्र की ताकत पार्लियामेंट के भीतर उसका बहुमत सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को भी दिखा देता है व चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का मसला हो या फिर इस देश के भीतर जो जांच एजेंसियां है उनको पॉलिटिकल तौर पर इस्तेमाल करने के जो आरोप सरकार पर लगे
कभी सुप्रीम कोर्ट कुछ कर नहीं पाया वो एक दौर में सीबीआई थी एक दौर में ईडी है एक दौर में इनकम टैक्स है
तो जांच एजेंसियों का साथ होना कॉरपोरेट की फंडिंग होना और तीसरी महत्वपूर्ण बात है कि वहां लोग जिनका इस टेक इस नई धारा की राजनीति के साथ बहुत ही एग्रेसिव तरीके से इस दौर में मोदी शाह की सियासत के साथ खड़ा है
के साथ किसी भी हाल में किसी भी तरीके से उन्हें हाशिए पर धकेला है उनके अनुकूल ही फैसले देने वह फैसला हो सकता है एक दौर में भीड़ तंत्र को लेकर उठ रहा हो एक दौर में सीएए एनआरसी को लेकर टकराव एक दौर में इस देश के भीतर में हिंदुत्व राष्ट्रवाद को लेकर उठता हो या एक दौर में
संख्यकों को हाशिये पर धकेलने को लेकर उठता कुछ भी हो सकता है वो यानी एग्रेसिव राजनीति में जो तबका साथ जुड़ा जिसका जिसका एस्टेट मौजूदा वक्त में सरकार के साथ है उनके साथ सरकार खड़ी है और वह सरकार के साथ खड़े रहे यह तीसरा हिस्सा होता है कॉन्फिडेंस का और सहयोग
से भारत की राजनीति के भीतर इस कॉन्फिडेंस को इन तीन माध्यमों से इससे पहले कोई भी राजनीतिक सत्ता हो या कोई भी प्रधानमंत्री हो वो इस तरीके की राजनीति उसने इस देश में नहीं कि क्षत्रपों ने राजनीति साथ ही तो अपने वोट बैंक को लेकर साथ ही चाहे वह पिछड़ा राजनीति से निकले हुए राजनैतिक दल
हो या दूसरे प्रांतों में चाहे वह द्रविड़ पार्टी के तौर पर उनकी मौजूदगी हो चाहे वह कहीं पर चंद्रबाबू नायडू या तेलांगना के भीतर केसीआर के जरिए नजर आएंगे
मैसेज तीन ही है
पहला मैसेज सबसे बड़ा है क्या जब चुनाव का ऐलान हो गया उसके बीच सुप्रीम कोर्ट जब इलेक्टोरल बॉन्ड पर फैसला देने की तारीख तय कर चुका है और अब पंद्रह तारीख तक इलेक्टोरल बॉन्ड बीज एसबीआई बैंक से बिकने शुरू होने वाले है जिसकी तारीख का ऐलान आज नहीं कल हो जाएगा वह ज्यादा
ज्यादा पंद्रह होगा अट्ठारह होगा या बीस तक जाएगा
तो क्या इस पूरी प्रक्रिया में इस पर सुप्रीम कोर्ट अगर रोक लगाता है या सरकार से सवाल करता है तो अगली स्थिति क्या पड़ेगा
जिस दौर में कॉर्पोरेट सरकार के साथ है विपक्ष सीधे सीधे कॉर्पोरेट की इकोनॉमी और उसकी साझेदारी जो सरकार के साथ उसको अगर निशाने पर ले रहा है तो क्या कॉर्पोरेट कहीं ज्यादा पैसा अलग अलग इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए सरकार को देने की स्थिति में आएगा यानी सत्ताधारी पार्टी का पाठ
थी और उसकी फंडिंग बढ़ जाएगी और उसके बाद सरकार की नीतियों में कॉर्पोरेट का दखल और बढ़ जाएगा यह भी होने वाला है और तीसरी परिस्थिति बहुत साफ है कि अगर इन परिस्थितियों के आगे सरकार लगातार यानी मोदी सरकार यानी बीजेपी जो अब बीजेपी भी मोदी बीजेपी हो गई है अगर वह आने वाले वक्त में जिस सियासत को
साधना चाहती है तो वह हर उस रास्ते को बंद करेगी जो उसके सामने इस तरीके के संरक्षण को लेकर खड़ी हो जाती हो और चाहे कानूनी तौर पर हो चाहे संवैधानिक तौर पर हो चाहे इस देश के भीतर लोकतांत्रिक तौर पर
तो राजनीति के इस नए मिजाज में आपका स्वागत है इंतजार कीजिए
अक्टूबर तक बहुत बहुत शुक्रिया

Sunday, 8 October 2023

आपको क्या चाहिए ? सिस्टम और नेता ?

 
दोस्तों हमे  एक नेता चाहिए जो इस देश को हाथ सके
उस नेता का इंतजार नेहरू से लेकर मोदी तक के काल में हर दौर में चुनाव जब जब करीब आता है तब तब खोज शुरू हो जाती है
लेकिन हमें कोई सिस्टम नहीं चाहिए एक ऐसा सिस्टम जिसके हिसाब से यह देश चले और नेताओं की आवाजाही होती रही जी रहे हमें वाकई एक नेता चाहिए अटल बिहारी वाजपेयी का शाइनिंग इंडिया जब अस्त हो चला तो उसके बाद एक नेता की तलाश थी मनमोहन सिंह के
और में जो घपले घोटाले उभरकर सामने आने लगे तो उसके बाद एक नेता की तलाश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौर में इस देश में जो इस देश का बेसिक स्ट्रक्चर की धराशायी हो गया इस देश के भीतर के संस्थान सरकार के कार्यकर्ता में तब्दील दिखाई देने
लगे तब लगा एक ऐसा नेता चाहिए जो इस देश में सिस्टम ला सके
हमें सिस्टम कभी नहीं चाहिए सिस्टम चाहिए तो वहां भी किसी नेता के भरोसे ही तो क्यों नहीं आज खत्म हो चले सिस्टम के भीतर झांककर देखा जाए और समझा जाए क्या वाकई इस देश में अगर सिस्टम चलने लगे या चल रहा होता तो मौजूदा वक्त की सत्ता
दो दिल भी टिक नहीं पाती क्योंकि इस देश के भीतर में जो नियम कायदे कानून है
जो सुप्रीम कोर्ट की संविधान को लेकर व्याख्या है जिस लिहाज से गवर्नेंस चलना चाहिए जिस लिहाज से पार्लियामेंट को चलना चाहिए और जिस तरीके से इस देश में सरकार की जिम्मेदारी आम लोगों को लेकर है अगर उसको और देखने की स्थिति में इस देश के तमाम संस्था आकर खड़े
हो जाएं तो क्या वाकई मोदी सत्ता चंद मिनटों की मेहमान होगी आपको चुनाव की जरूरत भी नहीं पड़ेगी जरा सोचना शुरू कीजिए कि अगर इलेक्शन कमीशन यह तय कर लें कि चुनाव के वक्त में कोई हेट स्पीच नहीं हो रही हो उस दौर में पैसों का लेनदेन नहीं हो रहा हो उस दौर में
जो भी उस दौर की चुनावी सहयता को तोड़ेगा उसको जेल के पीछे डाल दिया जाए या निर्देश चुनाव आयोग जारी करने लगे और नियम कायदे खड़े हो जाएं चुनाव के वक्त और खासतौर से सत्ता के हाथ में जब समूची लगाम होती है तो उस लगाम अपने हाथ में ले ले
तो उसके बाद इस मौजूदा सत्ता का हर चुनाव के वक्त क्या होगा
हो सकता है आप कहें नहीं नहीं तब तो कर्नाटक की सरकार नहीं गिरी होती पांच बरस पहले मध्यप्रदेश की सरकार नहीं गिरी होती गोवा में सरकार नहीं गिरी होती उत्तराखंड में सरकार नहीं गिरी होती इस देश के विधायकों को कोई खरीद नहीं सकता था शिवसेना इस तरीके से दो फाड़ नहीं हुई होती एनसीपी
को लेकर भी जो मौजूदा सवाल है उस पर फैसला तो चंद मिनटों में चुनाव आयोग दे देता तो कि नियम कायदे तो बहुत साफ तौर पर सामने खड़े हैं
तो क्या चुनाव आयोग अगर अपने काम को करने लगे तो इस देश के भीतर में चुनावी प्रक्रिया और चुनावी प्रक्रिया के जरिए सत्ता जो इस दौर में अपनी ताकत दिखाती है एक झटके में वह गायब हो जाएगी हो सकता है
दूसरी परिस्थिति जरा कल्पना कीजिए कि सीएजी अगर इस देश के तमाम मंत्रालयों की रिपोर्ट ही सामने रखती चली जाए और बताती चली जाय कि कितना खर्च किस डिपार्टमेंट में किस एवज में हुआ बजट में जो पेश किया गया और जो कुछ मंत्रालय ने दिखाया उसकी अलावे कितना प्रचार
में खर्च हो रहा है यह कुछ बकायदा सीएजी के जरिए मंत्रालय दर मंत्रालय चीजें सामने अगर आने लगे तो क्या होगा
एक झटके में क्या मोदी सरकार के भीतर के तमाम मंत्रालयों के हाथ पांव फूल जाएंगे
और वाकई लगने लगेगा कि तमाम मंत्रालयों में जो जो सचिव सरकार के अनुकूल है उसको इस दौर में एक्सटेंशन क्यों दिया गया यह पोल पट्टी भी खुल जाएगी
हो सकता है इससे इनकार कौन करेगा लेकिन सीएजी का काम तो यही है उसे देखना है
बकायदा चार्टेड अकाउंटेंट के तर्ज पर वह देखता है कि कहां पर किस मंत्रालय में कितना खर्च हुआ जो बजट निर्धारित किया गया उसके अनुकूल काम हो रहा है या नहीं और इस दौर में जब सबको पता है कि हर विभाग का प्रचार डिपार्टमेंट प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे के आसरे इस देश के मीडिया में रेंगता नजर आता है या
फिर सड़क चौराहे पर वह किसी पोस्टर में तब्दील होता दिखाई देता है तो क्या उस पर रोक लग सकती है क्योंकि सवाल तो देश के पैसे का है तो क्या सीएजी इस रिपोर्ट को अगर सामने लाने लगे और जनता इस बात को समझने लगे तो फिर क्या स्थिति ऐसी आ जाएगी या सरकार दो दिन न चल पाए टिक ही नहीं पाए
यह दूसरी स्थिति है तीसरी स्थिति जरा कल्पना कीजिए कि आरबीआई इस बात को तय कर ले कि सरकार के मन मुताबिक पैसा सरकार को नहीं देंगे
सरकार की तरफ से जो लिखकर आता है कि हां इसे आप कर्ज दे दीजिए और उसके बाद सरकार जिस तर्ज पर कर्ज माफी करती चली जाती है जिसको रिटर्न ऑफ कहा जाता है अगर आरबीआई इस तरीके के रोक टोक लगाने की परिस्थिति में आ जाए और कहे कि ऐसा भी मत समझिए कि जिस डिविडेंड को या जिस फायदे को आप लिए
जाते हैं उस पर भी एक लकीर खींचनी होगी जो पहले खींची हुई थी आपने उसे बदल दिया तो क्या वाकई सरकार के सामने पैसे के लाले पड़ जाएंगे या सरकार इस देश में जीएसटी तक का पैसा राज्यों को न दे और राज्यों से कहे कि आप आरबीआई से कर्ज ले लीजिये और उसके बाद आरबीआई गवर्नर कहे ऐसे नहीं चला
देगा आप की अर्थव्यवस्था ठीक नहीं है और जिस तरीके का बोझ बैंकों पर पड़ा हुआ है जितनी बड़ी तादाद में आपने लाभार्थियों के लिए कल्याण योजनाओं का ऐलान किया है अब आरबीआई ने निर्देश देता है कि इस तरीके से बैंकों पर बोझ नहीं डाला जाना चाहिए और जिस
तरीके से आप पैसों को बांट रहे हैं और हम जो पैसा ले रहे हैं और जो नोट को कभी भी बंद कर देना कभी भी चालू कर देना कितना भी नोट को छपवा लेना उस नोट को खर्च करने की एवज में यानी उसको दोबारा से नष्ट करने की एवज में जो खर्च होता है उस खर्च को कौन देगा
यानी आरबीआई अगर सक्रिय हो जाए तो क्या सरकार इस दौर में कंगाल हो जाएगी
यह भी एक सवाल है
तो आरबीआई का सक्रिय होना या फिर सीएजी की रिपोर्ट सामने आने लगे या फिर इलेक्शन कमीशन सक्रिय हो जाए और तो और इस दौड़ में सबसे मजबूत टूल और हथियार के तौर पर जो ईडी मौजूद है अगर को बताने लगे कि मनी लॉन्ड्रिंग का मतलब
होता क्या है
और मनी लॉन्ड्रिंग के आसरे आपने इस देश से बाहर कितने लोगों को भेज दिया और कितने लोग चले गए और हम सिर्फ यही कहते रह गए कि इन्होंने गड़बड़ी की है और सरकार ने उन्हें बाहर भेज दिया और हम यहां की अदालतों में यही कहते रह गए कि आप उनको भगौड़ा साबित कीजिए कि भगोड़ा अपराधी
अपराधी है वो आर्थिक अपराधी हैं इसी में हमारी उम्र कब जाएगी
तो इस देश के भीतर में आर्थिक सुरक्षा का जिम्मा मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए इस देश में ईडी को सौंपा गया तो क्या ईडी अपना काम नहीं करें एक दो नहीं लंबी फेहरिस्त है कितनी बड़ी तादाद में लोग इस देश को छोड़कर चले गए उन्हें भगोड़ा साबित करने की दिशा में यही की अदालतों में हम चक्कर लगाते हैं
यहां तक कि मेहुल चौकसी का मामला इस रूप में पुष्टि नहीं कर पाता है अदालत की इनको फॉरगेट घोषित किया जाए या न किया जाए यानी भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जाए या ना किया जाए इसमें भी और झरने आ जाती है
तो क्या ईडी अपनी जिम्मेदारी को निभाने लगे तो क्या उसके बाद इस देश के भीतर में मनी लॉन्ड्रिंग का किस्सा एक झटके में खत्म हो जाएगा
तमाम परिस्थितियों को जरा परखना की कोशिश कीजिए क्या पाता इस देश के भीतर में ईडी अपना काम करते हुए सरकार से सवाल करें
सीएजी अपना काम करते हुए सरकार के तमाम मंत्रालयों के आर्थिक ईशु को लेकर इस दौर में अपनी रिपोर्ट जारी करने लगे आरबीआई जो पैसा सरकार लेती है उसको लेकर सवाल खड़ा करती हैं और चुनाव आयोग चुनाव को लेकर सरकार पर बंदिश लगाई कि आप इस रूप में
फ्री नहीं है जहां पर आप सोच लें कि आप ही ने नियुक्ति की है चुनाव आयुक्त की तो वह आपसे सवाल नहीं करेगा ऐसा नहीं होना चाहिए महज चार डिपार्टमेंट
अगर सक्रिय हो जाएं आप कहेंगे अगर सक्रिय कैसे हो जाएंगे जिस देश के भीतर में सुप्रीम कोर्ट पर नकेल कसने के लिए और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को पलटने के लिए जिस देश में सरकार सक्रिय नजर आए और खुले तौर पर नजर आए और पार्लियामेंट का उपयोग करें
और उसके बाद बतलाए कि दरअसल हम ही सबकुछ है क्योंकि जनता ने हमें को चुना है और सारी जिम्मेदारी हमारी है क्योंकि चुनाव में हमें जाते हैं और कानून मंत्री इस देश का जजेस को धमकी देने लगे तो चुनाव में तो आप नहीं जाते हैं चुनाव में तो हम जाते हैं तो हमारे हिसाब से यह देश चलना चाहिए
हमारी जिम्मेदारी लोगों को लेकर है तो क्या संविधान हो या डेमोक्रेसी की जो परिभाषा संविधान में लिखी गई हो क्या चुनी हुई सत्ता को ही संविधान माना जाए उसी सत्ता के तमाम कार्य कलापों को डेमोक्रेसी की शक्ल में इस देश में रख दिया जाए क्या यह संभव है
पता नहीं कितना संभव है लेकिन आज कुछ कच्चे चिट्ठे को डॉक्यूमेंट की परिस्थिति के साथ समझने की कोशिश कीजिए इस देश में से जो मनी लॉन्ड्रिंग का किस्सा इस देश के भीतर अभी नेताओं को प्रभावित कर रहा है और समूचा विपक्ष से दो दो हाथ कर रहा है खुले तौर पर बतला रहा है उसके भीतर
सच क्या है सच यह है कि इस दौर में आने वाले वक्त में तीन सौ से ज्यादा कर्ज लिए हुए ऐसे बिलियनेयर हैं जो देश छोड़कर भाग सकते हैं
तकरीबन पाँच सौ लोग तो भाग चुके हैं तीन सौ लोग और भाग जाएंगे क्या उन्हें रोका जाना चाहिए
या उनको वाटर ढील दी जाती है कि आप भाग जाइए ना आप भगोड़ों को देश में ला सकते हैं ना ब्लैकमनी को लाया जा सकता है तो क्या भारत के संस्थान इतने कमजोर है वह ब्लैक मनी भी नहीं ला सकते हैं जो भगौड़े भाग गए और दूसरे देशों में बस गए क्या उनको लाने में भी मुश्किल हो जाती है
आप कहेंगे हो सकता है
लेकिन अलग अलग डिपार्टमेंट के भीतर विभागों के जरिए मंत्रालयों के भीतर से एक सवाल आपके जहन में हमेशा उठना चाहिए
हर मंत्रालय का मुखिया मंत्री होता है जिसे जनता चुनती है लेकिन क्या वाकई आपके जहन में यह सवाल है इस दौर में कानून मंत्री कौन है
इससे पहले कानून मंत्री जो था उन्होंने जो कहा उसके जरिये अपनी पहचान बनाई किरण रिजिजू थे
अभी अर्जुन मेघवाल साहब है
लेकिन हर विभाग के भीतर जवाब चलते चले जाएंगे तो आपके जहन में यह सवाल होगा इस मंत्रालय का मंत्री कौन है हम नहीं जानते हैं हां इस देश को प्रधानमंत्री चलाते हैं हाथ में है यह हम जानते हैं और तमाम मंत्रालय उन्हीं के अधीन है और तमाम नौकर शाही रिपोर्ट प्रधानमंत्री को करती है पीएमओ
के भीतर हर मंत्रालय हर राज्य से जुड़ा हुआ एक ज्वाइंट सेक्रेटरी लेवल का अधिकारी है जो एक पूरी रिपोर्ट तैयार करता है उसी आधार पर सारी चीजें फिर तय होती है ना उसमें कोई मंत्री का योगदान है ना इस देश के भीतर में कोई चैक एंड बैलेंस की गवर्नेस चल रही है तो ऐसे में बाद ईडी से शुरू की जाए या आरबीआई से शुरू
की जाए क्योंकि एक वक्त आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल ने कुछ सवाल खड़े किए थे
और वो सवाल सरकार को अच्छे नहीं लगे और उर्जित पटेल की विदाई हो गई
रघुराम राजन ने भी सवाल खड़े किए थे लेकिन बॉबी टिक नहीं पाए टिकेगा कौन एक्सटेंशन किसे मिलेगा सरकार के अनुकूल कौन होगा सरकार का मतलब इस देश के भीतर क्या होगा ये सब कुछ इस दौर में बहुत ट्रांसपेरेंट है शायद इसीलिए यह सवाल है कि इस देश के भीतर जो पॉलिटिकल पार्टीज के जरिए मुद्दे लगातार
गूंजते रहते हैं उन मुद्दों की तह में अगर जायेगा तो आप समझ जाएंगे दरअसल ये मुद्दे इस देश की महंगाई गरीबी से ज्यादा इस देश के उस पूरे सिस्टम को खोज रहे हैं जो सिस्टम अगर काम करें तो भारत के भीतर कि परिस्थिति बहुत अनुकूल लोगों के हो सकती है लेकिन हम एक नेता खोजते हैं
एक अदद नेता के पीछे पूरा देश चलने को तैयार है वो अदद नेता इस देश में सिस्टम अपना लाता है वह खुद को ही सिस्टम मानता है और अपने द्वारा लिए गए निर्णयों को ही सिस्टम की पूरी चाभी के तौर पर रख देता है जब हम जिक्र आपसे कर रहे हैं तो एक क्षण के लिए सोचिए
पहले सत्र में जब प्रधानमंत्री मोदी दो हज़ार चौदह में आए और दो हज़ार उन्नीस तक रहा है उस दौर में तीन सौ अस्सी व्यक्ति इस देश के भीतर से भाग गए
उसके बाद दो सौ तेईस लोग और भाग गए दूसरे सत्र में दो हज़ार बाईस तक
उसमें से लगभग सत्तर फीसदी मामले ईडी के पास पड़े हुए
उन्हें रोक नहीं पाई बैंकों ने शिकायत की जिन जिन एजेंसियों से उन्होंने एजेंसियों ने काम नहीं किया क्योंकि जिन जिन एजेंसियों को जिन जिन नामों को सौंपा गया उन नामों के पीछे सत्ता का कोई न कोई चेहरा था
और सरकार और सत्ता से टकराए कौन को कि हर कोई तो अपनी नौकरी कर रहा है
तो जो बैंकों के भीतर भी बैठे हुए डायरेक्टर हो या बोर्ड हो या फिर चेयरमैन क्यों ना हो उनके सामने भी यह सवाल लगातार रेंगता रहा कि जो ऊपर से लिखकर एक चिड़िया बैठाकर आता है कि आप इसे लोगों ने दे दीजिए तो लोन न देने का कोई सिला ही नहीं है
देश का पैसा है देश का बैंक है सरकारी बैंक कर दे दिया गया देश के नाम पर जनता का पैसा है जनता का पैसा बांट दिया गया क्योंकि जनता ने सरकार को चुना है क्या फर्क पड़ता है
तीन सौ से ज्यादा लोग जो भागे और जिन बातों का जिक्र हम पूरे ओवर ऑल कर उसमें ईडी से जुडे हुए मामले जो है अड़तीस व्यक्ति से जुड़े तो ईडी के नाक तले हो भागे
वह चौबिस देशों में इस दौर में एक सौ इक्कीस भगौड़े मौजूद हैं जो कि ईडी की कार्रवाई होती सरकार की सक्रियता होती तो कोई नहीं भर पाता लेकिन जो चौबिस देशों में एक सौ इक्कीस भगोड़े मौजूद है वो सभी जिन बैंकों से लोन लेकर और उनकी तादाद जो है इस देश के भीतर में
हमें लगता है क्या वाकई नाम पढ़ना चाहिए कि विजय माल्या मेहुल चौकसी नीरव मोदी है रविशंकर है संजय भंडारी है
नितिन जैसे अंदेशा है देर डिप्टी चेतन कुमार संदेह रहा है हितेश नरेंद्र भाई पटेल है संदीप झुनझुनवाला है सज्जन जिंदल वाला है नितिन संदेसा डिप्टी समझे साक्ष्य चेतन संदेश राव विपुल सूरज बेटे है जतिन मेहता के क्या सारे नाम पड़ते चले जाएं और कंपनियों के नाम देखते चले जाएं तो कितने लाख करोड़ का मामला
है और एक क्षण के लिए जरा सोचिए कि जितनी रकम लेकर ये लोग भाग गए
अगर उतनी रकम इस देश के सिस्टम पर डाल दिया जाता है इस देश के तमाम मंत्रालयों पर तो भी वाहवाही हो जाती आपको जानकर हैरत होगी जो ईडी किसी राज्य में जाती है वहां पूछताछ करने छापा मार दे तो उसमें जो निचले रैंक के अधिकारी होते हैं वह उनके रुकने की व्यवस्था भी
तीन स्टार होटल टैप नहीं होती है
उनको किसी पूंजी होटल में रुकना पड़ता है उनको जो पैसा मिलता है वह उसमें भी वह भोजन कर पाएं नहीं कर पाए अच्छा भोजन यह भी मुश्किल होती है अलाउंस जो होते हैं इतने कम है कि वह किसी क्लर्क के बराबर के अलाउंस इस है लेकिन नाम ईडी का है सिस्टम अंदर से खाली है और उसके जरिए पॉलिटिकल टूल बनाकर
इस देश के भीतर में
कृषि और कॉन्स्टिट्यूशन की परिभाषा को गढ़ा जा रहा है
जब है इन बातों का जिक्र कर रहे हैं तो जिन तीन सौ बारह भगवानों का जिक्र है उसमें एक लाख इकतालीस हजार पाँच सौ तिरासी करोड़ का सकता है
अब आप सोचिए चुनावी वर्ष में सबसे ज्यादा भागते हैं दो हज़ार उन्नीस में एक ग्यारह ऐसे मेजर भगौड़े भागे इस देश को जिन्होंने सौ करोड़ से ज्यादा का लोन लिया हुआ था और वो नहीं चुकाए और सरकार उसकी एवज में उसको रिटर्न ऑफ करती और बैंकों को पैसा दे देती है कि ठीक है हम इसकी भरपाई कर रहे हैं
उसके बाद जो भागने वाले लोग थे उसमें एक हजार करोड़ से ज्यादा छब्बीस बिक डिफॉल्टर थे
जिनके ऊपर कुल सात हज़ार चार सौ पच्चीस करोड़ का
कर्ज था चुकाना था नहीं चुकाया पाँच सौ करोड़ से ज्यादा लगभग चालीस थे बड़े उसके ऊपर जो पैसा था वह अट्ठाईस हजार करोड़ से ज्यादा खाता सौ करोड़ से ज्यादा वाले तादाद दो थी दो सौ छियालीस यानी सौ से पाँच सौ के बीच में दो सौ छियालीस लोग थे
उनके ऊपर बावन हजार आठ सौ उनसठ करोड़ का था यह एक डिपार्टमेंट का जिक्र है दूसरी परिस्थिति जो सीएच यह हो अपने तौर पर हर डिपार्टमेंट का इससे पहले की पूरी परिस्थिति तमाम सरकारों के भीतर रही है कि हर विभाग से जुडी हुई फाइनैंशियल उनतीस को व बतलाता है
और इस दौर में अगर सामान्य तौर पर किसी भी डिपार्टमेंट के फाइनैंशियल आजतक को अगर आप देखेंगे और उस डिपार्टमेंट से जुडे हुए प्रचार के बजट को आप देखेंगे और इस देश के भीतर की जो अलग अलग कल्याणकारी योजनाएं उन योजनाओं पर जो प्रचार में खर्च किया गया अगर उस पैसे को आप देख
देंगे
और वह पैसे जो इस देश के प्रिंट मीडिया टेलीविजन मीडिया
और तमाम जगहों पर जो पोस्टर के जरिए नजर आता है जो सार्वजनिक स्थलों पर उसको जब परखना शुरू करेंगे तो आपके हैरत अंगेज हो जाएगी स्थिति तो क्योंकि इतना बजट तो होता नहीं है तो यह पैसा कहीं से रोटेट किया गया पिछले दिनों सिर्फ इंडिकेट किया सीएजी ने कि देखिए डिपार्टमेंट का पैसा जिस पर
होना था उस पर खर्च नहीं हो रहा है जनता से जिस लिए सिर्फ लिया जाता है उससे का पैसा भी उस क्षेत्र में खर्च नहीं होता है
और इस देश में दो मुद्दों को लेकर हंगामा मच गया विपक्ष शोर मचाने लगा बोला देखिए सीएजी की ऐसी रिपोर्ट और दिल्ली से सटे गुड़गांव में जिस सड़क का जिक्र था कि देखिए इतने गुना ज्यादा पैसे में इतनी सड़क बना ली गई तो जरा कल्पना कीजिए इस देश के भीतर में अगर डिपार्टमेंट की फाइनैंशियल ई लैबोरेटरी सामने आने लगे तो
होगा क्या
अगर यह परिस्थिति आरबीआई के जरिए भी समझिए कि सरकार कैसे रिटर्न ऑफ करती है और बैंक उसको अपने बुक से हटा देता है और उसके बाद जो वह वसूली करता है उसको डिविडेंड के तौर पर दिखाकर सरकार को सौंप देता है सरकार उसके बताती है हमारे कितने मजबूत हैं
तो क्या एक सिस्टम को बनाने की जरूरत इस देश के भीतर है
या इस देश के भीतर जो डिपार्टमेंट्स काम कर रहे हैं उन्हें सिर्फ अपना काम करने दे दिया जाए
तो सरकारों को ईमानदार रहना होगा जनता के प्रति जवाबदेही होगी हर मंत्रालय और हर मंत्रालय को संभाला हुआ मंत्री जनता के बीच अपने मंत्रालयों की बातों को लेकर जाएगा
क्या ये ऐसी स्थिति आ सकती है आप कहेंगे ऐसी स्थिति तो पहले से थी
और इस देश के भीतर भाग कई ऐसी स्थिति लगातार रही है
कुछ पुरानी बात यह नहीं ऐसा नहीं है कि एक हज़ार दो हजार साल पुराने जिक्र कर रहे हैं
यह तो बीते दस पन्द्रह बरस पहले यह सब कुछ होता चलता था
इंदिरा गांधी तक के समय में मंत्रालय का जो पूरा कच्चा चिटठा था वह रिपोर्ट की शक्ल में सामने आता था
मनमोहन सिंह के काल में वह चिटठा सामने आया यह अलग मसला है कि परसेप्शन के आधार पर सीएजी ने उस समय राजनीतिक टोल खुद को बना लिया और विनोद राय कि हर रिपोर्ट उस परसेप्शन सत्य के हुई थी अगर ऐसा होता तो इतना लाभ होता ऐसा होता तो इतना मुनाफा होता ऐसा होता तो राजा से इतना बढ जाता और बाद में पता चला वह
क्रिटिकल एंगिल लगातार उठाया जा रहा था लेकिन एक क्षण के लिए सोचिए इस देश के भीतर में सरकार की तरफ से निकली हुई रिपोर्ट को जनता मान्यता देती है और मीडिया जब उसको दिखाता है तो सरकार पर दबाव पड़ता है यह परिस्थिति बीते नौ बरस से इस देश में गायब कर दी
और जब हम चार विभागों का नाम ले रहे तो हमको लगता है आखिर में इस देश के उस मीडिया का जिक्र जरूर करना चाहिए जिसका काम ही है इस देश की सरकार से सवाल करना या जिसका काम ही है इस देश के लोगों के लिए जो नीतियां बनती है वह लोगों तक पहुंचती है
या नहीं पहुंचती है सरकार जो कहती है वह सिर्फ कहती है या कर भी रही है सिर्फ इसी का परीक्षण अगर मीडिया शुरू कर दे तो फिर देखिये उसके बाद कैसी परिस्थिति इस देश के भीतर बन जाएगी
आप चुनाव का इंतजार कर रहे हैं या दो दिन में सरकार गिर जाएगी इस देश के भीतर के ऐसे मुश्किल हालातों में क्या कई नेता खोजा जा रहा है लेकिन नेता भी खोजिए तो ऐसा जो सिस्टम को महत्व दें और समझाए कि ऐसा सिस्टम जिसकी जवाबदेही जनता के ऊपर रहेगी और जनता की
आप दे ही के साथ इस देश की सरकार को काम करना होगा एक व्यक्ति नहीं होगा उस एक व्यक्ति की परिस्थिति इस देश के भीतर में संविधान के हिसाब से लागू
छक्कन बैलेंस करने वाली जो पिलर्स है
कार्यपालिका विधायिका न्यायपालिका है सबको हड़पने की कोशिश कोई सकता अगर करने लगे
तो ये
सोचिए क्या करेंगे
और इलेक्शन कमीशन अगर चुनाव के वक्त भी सत्ता अनुकूल दिखाई देने लगे तो फिर सोचिए आप क्या करेंगे
हाथ खड़े कर देंगे
या कुछ और बहुत बहुत शुक्रिया
बहुत बहुत शुक्रिया

Wednesday, 23 August 2023

सेक्युलरिज्म , लिबरलिज्म , डेमोक्रेसी, फेमिनिज्म क्या हे ??? New World Order का हथियार ।

दुनिया में फिलहाल चार ऐसी विचारधार और व्यवस्था हे जिसके बीच पूरी दुनिया आज कंट्रोल हो रही हे, अथवा कंट्रोल करने की शाजिश हो रही हे।

सेक्युलरिज्म 
लिबरलिज्म 
डेमोक्रेसी,
फेमिनिज्म 


1️⃣ . सेक्युलरिज्म: यह एक सिद्धांत है जिसका मतलब होता है कि राजनीतिक और सामाजिक संरचना में धर्म और धार्मिक विचारों को अलग रखने का प्रयास करना। इससे समाज में सभी धर्मों के लोगों के अधिकारों की सुरक्षा होती है और धार्मिक स्थितियों का प्रभाव राजनीतिक निर्णयों पर कम होता है।

बिल्कुल, मैं आपको सेक्युलरिज्म के विषय में विस्तार से बता सकता हूँ।

सेक्युलरिज्म एक आदर्श है जिसका मुख्य उद्देश्य धर्म से सम्बंधित मुद्दों को राजनीतिक संरचना से अलग रखना है। इसका उद्देश्य है सरकार और सामाजिक संरचना को निष्पक्ष बनाना, ताकि हर धर्म, सम्प्रदाय और विचारधारा के व्यक्ति के अधिकारों की सुरक्षा हो सके और किसी एक धर्म की प्राथमिकता नहीं दी जाए।

सेक्युलर राज्य में सरकार धार्म से स्वतंत्र होती है और किसी भी धार्मिक सम्प्रदाय की प्रतिष्ठा या उपस्थिति को समर्थन या विरोध नहीं करती है। यह लोगों के आधारभूत अधिकारों, जैसे कि धार्मिक स्वतंत्रता, विचारधारा की आज़ादी, संघटन की आज़ादी आदि की सुरक्षा की गारंटी प्रदान करने का प्रयास करता है।

इसका मतलब है कि सेक्युलरिज्म धर्म और राजनीति के बीच स्पष्ट अलगाव की स्थापना करता है ताकि राजनीतिक निर्णयों पर किसी एक धर्म के प्रभाव को नहीं छोड़ा जाए और सभी धर्मों के लोगों के अधिकारों की समर्थन की जाए।



2️⃣ लिबरलिज्म: यह एक विचारधारा है जिसका मुख्य मानना होता है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय, और संविदानिक अधिकारों की प्राथमिकता होनी चाहिए। लिबरलिज्म समाज में स्वतंत्रता के साथ-साथ समाजिक परिवर्तन को प्रोत्साहित करता है।

    
बिल्कुल, मैं आपको लिबरलिज्म के विषय में विस्तार से बता सकता हूँ।

लिबरलिज्म एक विचारधारा है जिसका मुख्य ध्यान व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय, और संविदानिक अधिकारों के महत्व पर होता है। यह मानता है कि व्यक्तियों को स्वतंत्रता मिलनी चाहिए कि वे अपनी खुद की तरीके से जीवन जी सकें और अपने विचारों को व्यक्त कर सकें।

लिबरलिज्म समाज में न्याय की महत्वपूर्णता को मानता है और समाज में असमानता के खिलाफ लड़ाई करता है। यह मानता है कि सभी व्यक्तियों को बराबर अवसर मिलने चाहिए, चाहे वो जाति, लिंग, धर्म, या जीवन के किसी भी पहलु से हों।

लिबरलिज्म के तत्वों में संविदानिक अधिकारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह मानता है कि लोगों के पास विचार, अभिवादन, संगठन, और धर्म की आज़ादी होनी चाहिए ताकि वे स्वतंत्रता से अपने विचार और मत को व्यक्त कर सकें।

लिबरलिज्म व्यक्तिगत और सामाजिक परिवर्तन को प्रोत्साहित करता है क्योंकि यह मानता है कि नए विचार, सामाजिक संरचना के बेहतरीनिकरण, और विकास से समृद्धि होती है। लिबरलिज्म का मतलब होता है कि समाज में प्रगति और न्याय के लिए व्यक्तिगत और सामाजिक स्वतंत्रता की समर्थना करना।

3️⃣  डेमोक्रेसी: यह एक राजनीतिक प्रणाली है जिसमें शासन की प्राधिकृतता जनता के हाथ में होती है। यह मतलब होता है कि लोग अपने निर्वाचन द्वारा प्रतिनिधित्व करके नेता को चुनते हैं और राजनीतिक निर्णय लेते हैं। डेमोक्रेसी में सभी नागरिकों को बराबरी से भागीदारी मिलती है।

बिल्कुल, मैं आपको डेमोक्रेसी के विषय में विस्तार से बता सकता हूँ।

डेमोक्रेसी एक राजनीतिक प्रणाली है जिसमें शासन की प्राधिकृतता जनता के हाथ में होती है। इसका मतलब होता है कि लोग स्वयं अपने निर्वाचन द्वारा प्रतिनिधित्व करके नेता चुनते हैं, जो उनके हितों की प्रतिष्ठा करते हैं और उनके लिए निर्णय लेते हैं।

डेमोक्रेसी में सभी नागरिकों को समान और बराबर अधिकार होते हैं। यहाँ नागरिक चुनाव में भाग लेते हैं और अपने पसंदीदा नेता और दल को चुनकर सरकार के निर्णयों में भागीदारी लेते हैं।

डेमोक्रेसी का मतलब नहीं होता कि लोगों की बहुमत के आधार पर हर निर्णय हो, बल्कि यह मतलब होता है कि सरकार लोगों की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को समझती है और उनके हितों की रक्षा करती है।

डेमोक्रेसी के उदाहरण में सामान्य चुनाव, संसद और विधायिका चुनाव, स्थानीय निकायों के चुनाव आदि शामिल होते हैं। यह प्रणाली नागरिकों को सक्रिय रूप से राजनीतिक प्रक्रियाओं में भागीदारी लेने का मौका देती है और उनके विचारों का प्रतिनिधित्व करने का माध्यम प्रदान करती है।



4️⃣ "फेमिनिज्म" एक सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन है जिसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों, समानता, और पुरुषों के साथ समान मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना होता है। यह आंदोलन महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक, और सांस्कृतिक स्थान में सुधार की मांग करता है, जिससे उन्हें पुरुषों के साथ समान अवसर मिल सकें।

"फेमिनिज्म" एक सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन है जिसका उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों, समानता, और पुरुषों के साथ समान मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना होता है। यह आंदोलन महिलाओं के समाज में स्थान, आर्थिक स्वतंत्रता, और सांस्कृतिक प्रतिष्ठा में सुधार की मांग करता है, जिससे कि वे पुरुषों के साथ समान अवसरों का आनंद उठा सकें।

फेमिनिज्म के विभिन्न प्रकार होते हैं, जैसे कि पहली पीढ़ी के फेमिनिज्म जिसने महिलाओं के मतदान के अधिकार की मांग की, दूसरी पीढ़ी के फेमिनिज्म ने परिवारिक और समाजिक रूप से विकलांगित महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाया, और तीसरी पीढ़ी के फेमिनिज्म ने सेक्सुअल हैरेसमेंट, पेशेवर स्थिति में समानता, और वेतन में समानता जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया।

फेमिनिज्म का उद्देश्य सिर्फ महिलाओं के लिए नहीं होता, बल्कि यह समाज के सभी वर्गों को समानता और न्याय की दिशा में मोड़ने का प्रयास करता है। यह आंदोलन लिंग, जाति, धर्म, और समाजिक परंपराओं के खिलाफ खड़ा होकर समाज में सुधार प्रोत्साहित करने का काम करता है।




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ગામ પંચાયત અને જાગૃતિ.

*મિત્રો, સરપંચ બનતા પેહેલા થોડું જરૂર વાંચજો......

હું,પૂર્વ યુવાસરપંચ, આપને થોડા પ્રશ્નો પૂછવા માંગુ છું.  

                                   સદીઓથી આપણા પૂર્વજો આપણા આ ગામમાં હળીમળીને રહ્યા હતા, સાથે મળીને દિવાળી, હોળી, શિવરાત્રી, જન્માષ્ટમી જેવાં તહેવારો ઉજવતા હતા અને આપણને સમૃદ્ધ સાંસ્કૃતિક અને આધ્યાત્મિક વારસો આપ્યો. આપણા હાલના વડીલો સંપીને રહેતા હતા અને દાન-ધર્માદો ઉઘરાવી ગામના બાળકો માટે બાલમંદિર, શાળા, દવાખાનું, મંદિર વગેરે બંધાવ્યા છે. 

પરંતુ, આજે આપણા આ ગામની હાલત કેવી છે?  
★ ઠેર ઠેર દારુની દુકાનો, 
★જુગારના અડ્ડા, 
★દારૂને લઈને 
★કથળતું શાળાનું શિક્ષણ  
★સહકારી મંડળીમાં ભ્રષ્ટાચાર
★ખાડે ગયેલો પંચાયતનો વહીવટ 
★ગામના વિકાસ માટે મળતી સરકારી ગ્રાન્ટમા ચોરી 
★ સીધા સાદા માણસોને હેરાનગતિ  

               ગેરકાયદેસર હોવા છતાં દારૂના અડ્ડા તો કાયમ ચાલતા જ રહે છે, પણ જ્યારે ચુંટણી આવે ત્યારે એમાં મોટો ઉછાળો આવે છે. ચુંટણી લડનારા ઉમેદવારો દારૂડીયા, જુગારીયા, ગુંડા અને બદમાશ લોકોનો સાથ લઇ ગામલોકોને દારૂ અને પૈસાની લાલચ આપી ચુંટણી જીતવાના પેતરા રચે છે. ના સમજે એને ગુંડાઓ દ્વારા ધમકી પણ અપાય છે. 

    આપણો બધાનો અનુભવ છે કે દર નવી ચુંટણી સમયે દારૂડીયા, જુગારીયા, ગુંડા અને બદમાશોનું પ્રભુત્વ વધતું જ જાય છે અને ગામલોકો વધુ ને વધુ ગરીબ, દુખી અને બરબાદ થતાં જાય છે. 

ચુંટણી શા માટે ?

■ગામના ભલા માટે, વિકાસ માટે, નેતૃત્વ માટે ગામલોકો ભેગા મળી લાયક, નિષ્ઠાવાન નાગરિકની નિમણુંક કરે, એ વાત જ આખી ભૂલાઈ ગઈ છે.
■લાખો રૂપિયા ખર્ચીને ચુંટણીમાં જીતીને આવનાર ઉમેદવાર ગામલોકો ને લૂંટી, ગામલોકો માટેની સરકારી ગ્રાન્ટની ચોરી કરી કરોડો રૂપિયા ઘરભેગા કરે છે.
■અને આ બધું નેતાઓ, સરકારી અધિકારીઓ અને ગુંડાઓ બધા ભેગા મળીને કરી રહ્યા છે. 

        શું આપણે આ બધું રોકી ના શકીએ ? ચોક્કસ રોકી શકીએ છીએ. 

કેવી રીતે ?

1. આપણે ગામલોકો ચુંટણી દ્વારા ગામના ઈમાનદાર, શિક્ષિત અને નિષ્ઠાવાન નાગરિકોને નેતૃત્વની જવાબદારી આપીને
2.ભ્રષ્ટાચારી, વ્યભિચારી, ચોર, ગુંડા, બદમાશોને જાકારો આપીને અને બહિષ્કાર કરીને. 

 3.આપણે એ પણ કરી શકીએ કે ચુંટણી પહેલા સમગ્ર ગામ ભેગું મળી ગામના ઈમાનદાર, શિક્ષિત અને નિષ્ઠાવાન નાગરિકોની પસંદગી કરીએ. 

4.આનાથી ના ચુંટણી લડાશે, ના ગામમાં ઝગડા થશે, ના દારૂડીયા, જુગારીયા, ગુંડા અને બદમાશો પાછળ પૈસા ખર્ચાશે. 

                   ગામને સારા અને સક્ષમ લોકોની સેવાનો લાભ મળશે. ભ્રષ્ટાચાર બંધ થશે અને નેતાઓ, સરકારી અધિકારીઓ અને ગુંડાઓની મીલીભગતથી થતી લૂંટ બંધ થશે, જેનો ફાયદો આપણને જ મળશે.

            ઉપરથી સરકાર દ્વારા સમરસ ગ્રામ પંચાયતની યોજના હેઠળ લાખો રૂપિયાની વધારાની મદદ મળશે. 
આપણા ગામની એકતા જળવાશે અને ગામ વિકાસ તરફ આગળ વધશે.  

                  💐શું તમે તૈયાર છો ? 💐

>તો આજે જ તમારા મિત્રો અને કુટુંબીઓ સાથે ચર્ચા કરો અને લાગી પડો ચુંટણી પહેલાં સર્વસ્વીકૃત ઉમેદવારોની શોધમાં. 
> ગામ ની એકતા માં જ મહાનતા છે. 

>જે લોકો ચુંટણી લડી ગામની એકતા થવા દેવા માંગતા નથી તેવા ગામશત્રુઓને ઓળખી લો અને ભેગા મળી સામનો કરો. 

>ચુંટણીમાં બદમાશોને જાકારો મતલબ ગામલોકોની એકતા, સુખ અને શાંતિમા વધારો. 

>ચુંટણીમાં સજ્જન અને શિક્ષીત માણસોને આવકારો મતલબ શિક્ષણ, રોડ, પાણી, વીજળી, સરકારી સહાય જેવી સગવડો અને ખેતી, રોજગારી, મહિલાઓની સુરક્ષામાં વગેરેના સુધારો. 

                  તમે મદદ કરશોને ? 
           મને તમારા પર પુરો ભરોસો છે.

જો તમે ખરેખર ગામનો વિકાશ ઇચ્છતા હોય તો આવો આપણે સાથે મળીને ગામનું ગૌરવ પાછું મેળવીએ.  

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

આપણા ગામને પ્રમાણિક અને નિષ્ઠાવાન નાગરિકોના જ્ઞાન અને સેવાઓનો લાભ મળે તે માટે સરપંચ અને પંચાયત સદસ્યના હોદ્દા માટે યોગ્ય નાગરીકોની ચુંટણી
કરવાને બદલે ગામલોકોની સહમતીથી નિમણુક કરવી જોઈએ. લાયક ઉમેદવાર પાસેથી નીચેની બાંહેધરી લેવી જોઈએ.

સરપંચ/ પંચાયત સદસ્યના ઉમેદવારનું બાંહેધરીપત્ર

હું નામે, _____________________________________________________
આપણા ગામ ________________ તા. ____________ જી. _____________ ની ગ્રામ
પંચાયતના સરપંચ / સદસ્યના હોદ્દાએ સેવા આપવા માટે ઈચ્છુક છું.

હું મારા માતા-પિતાની અને ઈશ્વરની સોગંધ ખાઈને બાંહેધરી આપું છું કે જો
મારી આપણા ગામની ગ્રામ પંચાયતના સરપંચ / સદસ્યના હોદ્દા પર નિમણુંક
કરવામાં આવશે તો –

૧) હું મન, વચન અને કર્મથી ગામના તમામ લોકોના સુખ, સ્વાસ્થ્ય, એકતા,
ભાઈચારા અને પ્રગતિ માટે નિસ્વાર્થપણે સેવા કરીશ.
૨) પંચાયતની ચૂટણીમાં થતા વિવાદોથી ગામને બચાવવા માટે હું સમરસ ગ્રા પંચાયતની રચનાનું સમર્થન કરું છું.
૩) જો મારી ઉમેદવારીને કારણે સમરસ પંચાયતની રચના શક્ય નથી તો સમરસ ગ્રામ પંચાયતને સરકાર દ્વારા અપાતી દાન/અનુદાનની રકમના નુકશાન પેટે હું રૂ. ૫,૦૦,૦૦૦ (અંકે પાંચ લાખ) ચુંટણીનું ઉમેદવારીપત્ર ભરતા પહેલાં ગ્રામ પંચાયતમાં જમા
કરાવી દઈશ.
૪) હું મત મેળવવા માટે કોઈ જ નાગરિકને લાલચ અથવા ધાક ધમકી આપીશ નહિ.
૫) હું પ્રતિજ્ઞા છું કે હું દારુ પીશ નહિ, જુગાર રમીશ નહિ અને ગામલોકોને
બરબાદ કરતી દારુ અને જુગાર જેવી બદીઓ સામે કાયદેસર કાર્યવાહી કરવા માટ હું આગેવાની લઈશ.
૬) હું ગામની ગૌચરની જમીન, નદી, તળાવ, વૃક્ષો, પાણી જેવી કુદરતી સંપદાન ગેરકાયદેસર ચોરી / બગાડ કરનાર સામે સખ્ત કાયદેસર કાર્યવાહી કરવા માટે હું
આગેવાની લઈશ.
૭) હું કોઈ ગેરરીતી અને ભ્રષ્ટાચાર કરીશ નહિ અને અન્ય કોઈને કરવા દઈશ નહિ.
૮) હું ગામના તમામ વર્ગના લોકોને જાતી કે ધર્મ કે ઊંચ-નીચના ભેદભાવ વિના
પંચાયત દ્વારા અપાતી સેવાઓ અને સરકારી યોજનાઓનો લાભ અપાવીશ.
૯) હું ગામના તમામ લોકો માટે પીવાનું પાણી, રસ્તા, ગટર અને સ્ટ્રીટ
લાઈટની વ્યવસ્થા કરીશ.
૧૦) હું આપણા ગામને ૧૦૦% શિક્ષિત બનાવીશ અને શિક્ષણની ગુણવત્તા સુધારવા માટે પ્રયત્ન કરીશ.
૧૧) ગામલોકોને સરકારી દસ્તાવેજોની નકલ પંચાયત કચેરીમાં જ મળી રહે તેવી
વ્યવસ્થા ગોઠવીશ.
૧૨) હું આપણા ગામમાં સુંદર બગીચો, કૌટુંબિક પ્રસંગો / તહેવારો ઉજવવા માટે
કોમ્યુનીટી હોલ અને પાર્ટી પ્લોટ, સ્મશાન વગેરે જરૂરીયાત અનુસાર
બનાવડાવીશ.
૧૩) હું દર મહીને નિયમિત રીતે ગામના વિકાસના કામોના આયોજન માટે પંચાયતન કારોબારી સભ્યોની મીટીંગમાં હાજર રહીશ અને દરેક મીટીંગના ઠરાવોની નકલ તેમજ ગ્રામ પંચાયતના માસિક હિસાબો ગામલોકો સમક્ષ રજુ કરીશ.
૧૪) હું સરકારના નિયમ અનુસાર દર ત્રણ મહીને જાહેર ગ્રામ સભા બોલાવીશ અન ગામના વિકાસ માટે તમામ ગામલોકોનો સહકાર લઈશ.
૧૫) ગ્રામ પંચાયતના વાર્ષિક હિસાબો વર્ષ પુરું થયાના ૯૦ દિવસમાં તૈયાર
કરી તેની નકલ ગામ લોકો સમક્ષ રજુ થાય તેવી વ્યવસ્થા ગોઠવીશ.
૧૬) હું આપણા ગામના વિકાસમાં ગામલોકોને સહભાગી બનાવવા માટે ગામના યુવાનો, સ્ત્રીઓ અને અનુભવી વયસ્કોથી બનેલ સમિતિઓ જેવી કે રમતગમત, સ્વચ્છતા,
શિક્ષણ, ખેતી, જાહેર તહેવારો, પુસ્તકાલય, રોજગારી, કુદરતી સંપદા, ગૌચર વિકાસ, વગેરે ગ્રામ સભાના માર્ગદર્શન અને સહકારથી બનાવીશ.
૧૭) સરકારશ્રી દ્વારા ચલાવવામાં આવતી તમામ યોજનાઓની માહિતી તમામ
ગામલોકોને દર સપ્તાહે નિશ્ચિત દિવસ/સમયે મળે તે માટેની વ્યવસ્થા ગોઠવીશ.
૧૮) જો હું મારી ફરજો બજાવવામાં બેદરકારી દાખવું કે કોઈ ગેરરીતિ આચરતાં અથવા છાવરતા પકડાઉં, તો તાત્કાલિક અસરથી હું પોતેજ હોદ્દા પરથી રાજીનામું આપી દઈશ અથવા ગ્રામસભા દ્વારા બહુમતીથી મને બરખાસ્ત કરવાની સંમતિરૂપે હું આ બાંહેધરીપત્ર પર સહી કરું છું.

ગુજરાતની ગૌરવવંતી સંસ્કૃતિના પ્રતિક એવા આપણા ગામની સેવામાં સમર્પિત,

ઉમેદવારનું નામ:    
ઉમેદવારની સહી:
તારીખ:

સાક્ષીનું નામ:
સાક્ષીની સહી:
તારીખ:

આવનાર ગ્રામ પંચાયતની ચુંટણીમા ભ્રષ્ટાચારીઓ પર સર્જીકલ સ્ટ્રાઈક કરીએ અને સારા નાગરિકોને ગામની સેવા કરવાનો મોકો મળે એ માટે આ મેસેજ ને ફોરવડઁ કરો 🙏🏻🙏🏻🙏🏻 

ભ્રષ્ટ્રાચાર મુક્ત ગામ

🙏🏾🙏🏾🌹🙏🏾🙏🏾 ગુજરાત ના દરેક ગામમાં રહેતા ગુજરાતી યુવાનને મેસેજ કરો.🙏🏾🌹🙏🏾

Tuesday, 22 August 2023

सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट-काट हुआ परेशान, फिर बैंक से लिया 2.7 लाख का लोन, अब भर रहा सड़कों के गड्ढे।

 

सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट-काट हुआ परेशान, फिर बैंक से लिया 2.7 लाख का लोन, अब भर रहा सड़कों के गड्ढे



बेंगलुरु. ‘नो डेवलपमेंट नो टैक्स’ यह वह अभियान है जिसे पूर्वी बेंगलुरू में एक नागरिक समूह ने शुरू किया है. इस अभियान की शुरुआत तब हुई जब गड्ढों को भरने से लेकर तमाम तरह की बेहतर नागरिक सुविधाओं को प्रदान करने की बार बार मांग करने के बावजूद सरकार का रवैया उदासीन रहा.

इससे तंग आकर नागरिक समूह ने उक्त अभियान की शुरुआत की और जिसके तहत यहां संपत्ति कर के भुगतान का बहिष्कार किया जा रहा है. यही नहीं समूह के सदस्यों ने एक साथ मिलकर हलनायकनहल्ली, मुनेश्वर लेआउट और चूड़ासंद्रा में 6 किमी की दूरी पर गड्ढों को ठीक करने के लिए पैसा जमा किया और काम करवाया.


आरिफ मुदगल ने लिया 2.7 लाख रुपये का कर्ज
समूह के संस्थापक सदस्य, 32 वर्षीय तकनीकी विशेषज्ञ आरिफ मुदगल ने इस उद्देश्य के लिए 2.7 लाख रुपये का कर्ज लिया. टीओआई की खबर के मुताबिक उन्होंने कुछ दिन पहले होसा रोड पर दो दुर्घटनाएं देखीं, जिसने उन्हें मदद करने के लिए प्रेरित किया. मुदगल ने बताया कि उनके अपार्टमेंट के पास रहने वाली एक महिला उस समय घायल हो गई, जब होसा रोड पर एक गड्ढे से टकराने के बाद उसका ऑटो पलट गया था.” 14 अगस्त की रात को उसी गड्ढे से बचने की कोशिश में एक ई-कॉमर्स फर्म का एक डिलीवरी एजेंट भी कार से टकरा कर घायल हो गया था.




Sunday, 20 August 2023

मुफ्ती तारिक मसूद 14 ऑगस्ट वीडियो tax ।

 You Tube video link


एक गली में चौकीदार बिठाया है वह अपनी ड्यूटी पूरी नहीं कर रहा है घर में राशन टाइम पर नहीं आ रहा आप उसको ठीक करने की कोशिश करोगे या बोलोगे इस घर को बम से उड़ा दो तो घर का मालिक जवाब में यह कि यहां चौकीदार अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर रहा है जिसको टमाटर लेने के लिए भेजा माता के बजाय मटर उठाकर ले आता है तो फिर क्या कहा जायेगा हो पाई तो टमाटर के बजाय मतलब है
को बुरा बोलना तो घर को कि बुरा बोल रहा है
मुफ्ती तारीख मसूद की बयानात के लिए मुफ्ती साहब की ऑफिशियल चैनल मुफ्ती तारीख मसूद स्पीच को सब्सक्राइब करें
तो मैं कर रहा था कि जब ये मैं सोचता हूँ के बाद ही हम थोड़ी सी मुखालफत जब ऊट पटांग किस्म के ना सिद्धि हर धर्म लोग मिलते हैं ऊट पटांग यूट्यूब पर के लिए जो मजा भी लिहाज से लोगों को गलत रूप में लेकर जा रहे हैं
सियासी लिहाज से लोगों को गलत गाइड कर रहे होते हैं
मुल्क का नुकसान कर रहे हो तुमको पता नहीं होता हमारी इस बीच से मूल का कितना बड़ा नुकसान होने वाला है
अब आप मुझे बताओ ऐसे ऐसे लोग आ रहे पाकिस्तान का झंडा जला रहे हैं
इन हालात में ना पासपोर्ट भादरा कोई लोगों के कमेंट से बिल्कुल सही किया या तो क्या कर रही है कि किस क्यों झंडा रहे है तो तो क्यों पासपोर्ट फाड़ रहे दुनिया पाकिस्तान में नहीं रहना दबाव रहा यहां से भाई तो
आप एक घर में रहते हो
जैसा मर्जी घरो
जो आगे डिफेंस के लिए आपने एक गली में चौकीदार बिठाया है वह अपनी ड्यूटी पूरी नहीं कर रहा एक मिसाल दे रहा हूं
घर में राशन टाइम पे नहीं आ रहा आप उसको ठीक करने की कोशिश करोगे या बोलोगे इस घर को बम से उड़ा दो
या जो मेरा घर का एड्रेस है ना
उसको उसको ऐड्रेस करके उसको गालियां देना शुरू कर दो लोग कहेंगे लोग पहुंचेंगे दूध अड़ोस पड़ोस वाले क्या करेंगे हसेंगे बोलेंगे अच्छा जल्द ही दबाव मरो यहां से निकलो ताकि हम यह खरीद लें
इतना बड़ा अच्छा गधा घर चार सौ पर बना हुआ है और लोकेशन वाइस बड़ा जबरदस्त है
तो अच्छा है तुम लोग इसकी मुखालफत करो
ताकि फिर कंट्रोल किसका आ जाए हमारा जाए क्योंकि हमें पता है वेंटिलेशन कभी बड़ा अच्छा इंतजाम है
तो घर का मालिक जवाब में यह कहकर यहां चौकीदार अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर रहा है जिसको टमाटर लेने के लिए भेजा टमाटर के बजाय मटर उठाकर ले आता है तो फिर क्या कहा जायेगा हो भाई तो टमाटर के बजाय मटर ला रहे हैं उसको बुरा बोला तो घर को कि बुरा बोल रहा है घर को बुला बोलने से तो तो अपने पापा को ज्यादा मार रहा है
और यह पता कौन नीच किस्म के पाकिस्तानी जो अमेरिका जाकर जैसे गरीब के पास निया ने पैसा आ जाना तो अपनी औकात भूल जाता है ऐसे कुछ पाकिस्तानी ऐसे निर्णय अमेरिका जाते हैं यूके जाते हैं अपनी औकात भूल के ने पाकिस्तान को गालियां देना शुरू कर देते हो पाकिस्तान तो ऐसा है पाकिस्तान तो हालांकि वहां जो उनकी तबीयत से पेस्ट्री और होती है ना ही बताएंगे हो
मैंने ऐसे बड़े गैर मुल्की देखें जिनको वहां दो टके की इज्जत नहीं है और पाकिस्तान को गालियां दे रहे होते हैं जबकि यहां गरेबान खोलकर दादा बदरवास बनकर घूम रहे होते हैं पर अपने मुल्क में इंसान की जो इज्जत होती है दूसरा कंट्री कभी भी आपको वह इज्ज़त नहीं आपको नेशनल एंटी मिल जाए फिर भी नहीं रहते हुए बुद्ध नंबर समस्त
आप पौधे बार से रंग से पता चल रहे देसी है
क्या पासपोर्ट आपके पास वहां कभी चुनाव इल्ला यह कि आपको बहुत ही क्वालीफाइड तो बहुत हाई लेवल के डॉक्टरों या बहुत हाई लेवल के साइंटिस्टों और जो इतने हाई लेवल के होते हैं इस तरह की नीच बातें कर रहे होते हैं ये सारे छिछोरे यहां के भागा भागा वह आगे को पासपोर्ट रहा है तो पाकिस्तान के ठंडा जला रहा है
ये चीजें देखीं आत्मिक टेंशन होती है भाई
और टेंशन इन तो को देख के नहीं होती उन बेलहर तो को देख की होती तो कमेंट में को प्रोमोट कर रहे होते तो आप बिल्कुल सही किया तुमने बिल्कुल सही किया यह मूल की ऐसा है तो दफा हो जाओ ने स्कूल से यार तुम तो क्यों ठहरे हो जाते और तुम दफा होते हो तो तुम्हें निजात मिल गई ना
अब जाओ तुम ऐसा करो वहाँ जाके गालियां दे रहे हो इसलिए बड़ी प्यारी बात की है
एक साहब ने इसलिए पासपोर्ट फहराना तो उसने का कितने मूल कैसे जो पाकिस्तान से भी ज्यादा बदहाली का शिकार हैं
कभी भी उनकी क़ौम उन मूल का पासपोर्ट नहीं है कभी भी झंडा यह दुनिया में कोई नहीं करता
और मैं समझता हूं इसके जिम्मेदार भी हमारे सियासी लीडर हैं जिन्होंने मूल की इतनी नफरत और यह साफ यह तृणमूल की नफरत पैदा करती है हर वक्त नेगेटिविटी दिखा रहे होते हैं हर वक्त आपको जूता ने तलवार दिखा रहे होते और आपका चेहरा उसमें दिखा रहे होते हैं
क्या पॉजिटिव से खत्म हो गई है क्या
अक्सर इंतजार हो कर रहे जिनकी तोडे भरी हुई है
गरीब को तो बेचारे को फुरसत हो तो रोड़ा बैठकर
एक साहब ने मुझे का केपी के में ऐलान हुआ है कि जी चौदह कसनी मनाएंगे
मैंने का क्यों है वह धमाका हुआ ना बाद रोड में फिर सियासी तंजीम कभी का उसने भी ऐलान किया नहीं बनाएंगे मैंने का जिन लोगों को की शहादत हुई ना
जिनको हम पहुंचा उनका हम समझ में आता है वह अगर किसी देश पर गहरे हमने इस दफा नहीं मनाना बाद लोग इसे एक दिन पहले मैया तो गई तो वह कहते हैं मीद नहीं मनाएंगे
शरण तो जाइज़ नहीं है यह लेकिन यह कि उसकी तो कोई लॉजिक बनती है ना कोई लॉजिक बनती है कि लाशें इतनी उन विचारों का तो धमाके में हाल क्या हुआ है
कैसे बाप और भाइयों के टुकड़े पड़े हुए
लेकिन कुछ सियासी तंजीम इस पर करिए के चौदह सी मनाना तुम तो सियासत इस मुल्क में कर रहे और तुम उनसे नफरत नफरत के के स्पेस ने कर रहे हो
तुम तो इसी मुल्क को तो तुमने कैच कराया है इसी मूल की तामीर और तरक्की और हो कुल पत्नी के नाम पर वोट मांग रहे हैं और आज तुम कह रहा हूं सौदागर इसका मतलब तुम शख्सियतों पर मूल को कुर्बान कर रहे हो मूल पर शख्सियतों को कृपा नहीं कर रहे हो हम हम मानते हैं जिन शख्सियतों को बुरा कहा जाता है बहुत सी बुरी नहीं होती जिन शख्सियतों को
अच्छा कहा जाता है वह बहुत सी अच्छी नहीं होती है यह हकीकत मानते हैं इसमें बहुत कुछ होता है इस्टैब्लिशमेंट के भी दखल होते हैं सियासी लीटर का भी होता है मीडिया का भी होता है बाई किसी भी शख्स से अकीदत मोहब्बत इतनी नहीं कि रियासत को उस पर हम दांव पर लगाते हैं सबसे पहले क्या है रियासत अपना घर है
दुनिया में कोई मुल्क मैंने भी देखा जो जिसकी लोग अपने को अपने मूल से नफरत करते हो ऐसा शहर यहां पर
घोलकर डाल दिया बात साथ ही भी यह काम कर रहे हैं बहुत बहुत स्लो होता रखें और हमारी बेवकूफ अवाम यह नहीं देख रही कि आप जब कंट्री से नफरत करोगे तो नुकसान किसका है
तुम क्या करोगे इसमें दो तक है कि तुम्हारी दुनिया में अपवाद नहीं रहेगी
फिर यह जब जी से गुजरती है तो केपी में ने उन्हें मख़सूस लोगों की बात कर रहा हूं कि अगर वह चौदह नहीं मना रहे उनको एक हम पहुंचा है तो दायरे एक किसी का एक हम तो हम होता है ना लोकगीत बनाना छोड़ देते हैं लेकिन मतलब का को में
लेकिन पूरी कौम यह बातें करना शुरू कर दी हमने चौदह अगस्त बनाना
हमने
हमने जनाब को झंडा जलाना में झंडे नहीं लगाने का मतलब तुमसे बड़ा बेवकूफ इस कायनात में पैदा फिर जो
तुम्हारे साथ और बिल्कुल ठीक हो रहा है इस फॉर्म के साथ यही होना चाहिए इसके साथ
टन से ज्यादा तंजीमों और जमातों को अपने किरदारों को देना शुरू कर दी है किसी इदारे की नफरत में इतना आगे मत पड़ो के मूल से समझौता मूल से मोहब्बत छोड़ दो और किसी इदारे की या जमात की अकीदत ने भी इतना आगे ना बड़ों के मूल से मोहब्बत खत्म कर दो
मूल मकसद है भाई इदारे और जमाते मकसद नहीं है बल्कि हम तो आगे बढकर कहते हैं कि मूल की मोहब्बत में गधे को भी बाप बनाना पडेगा बना लो आप मूल पहले
हमने यह बड़ा जुमला बचपन में सुना एक साफ कपड़ा पता चल रहा था किसी से
मैंने का यह तो आपको इसका आपसे इतना बड़ा पता चल रहे हो फिर भी आप इसे दोस्ती का हाथ बढ़ा रहे हैं कह रहे हैं और मजबूरी में करने को भी बनाना पड़े तो क्या होता है क्योंकि पहले का दादा में दुश्मनी करूंगा जो थोड़ा बहुत में होना वह भी सभी जाऊंगा अपने साथ में फातमी ये चीजें लोगों की समझ में आती है जहां प्रजाति मसौदों
जितने लोग आते हैं लेकिन दादी होते हैं बदमाश होते हैं लोग कहते हैं जिनके खिलाफ बयान मत करें कर भी रहे हो तो उनको पता है कि बयान किया जाए
बड़े कमी से या स्तरीय कर रहे होते हैं वह एक दौर था ना पड़ी
मेले में बड़े बड़े दादाओं की हुकूमत रही है कराची में भी पंजाब में भी और
उनके जब जा रहे धुकधुकी मिल रहे हैं
तो उनसे पूछो तो कहते हैं और मजबूरी में गधे को क्या बनाना पड़ता है
यह मजबूरी आपकी जाती है यार रियासत की मजबूरी है मूल तबाह हो रहे भाई सबका नुकसान होगा इसमें शेयरों के हाथ में चला जाएगा
और बाज दफा जिसको आप गधा कहकर बाप बना रहे हो तो वगैरह होता नहीं है यदि आप होते हो इसलिए आपको लग रहा होता है वो इतनी इतना कुछ मैं किसी की फेवर में बयान नहीं कर रहा न मैं किसी के नेगेटिव में बयान कर रहा हूं मेरे बयान को किसी जमात के फेवर में या नेगेटिव लेकर जाएं मैं कुछ
फूल और जाप्ता बयान कर रहा हूँ भाई कंट्री के आए पहले कंट्री से मोहब्बत यह
ये हमारे मजहब का हुकुम में आप कह सकते इस्लाम में कंट्री नहीं है इस्लाम में खिलाफत है लेकिन वह सिमट सिमट के जब टुकड़ों में तकसीम हो गई है तो आप जितने टुकड़े बच गए हैं उनको तो बचाना है ना
यह भी तो इस्लाम का को में सऊदी अरब भी एक रियासत बन चुकी है और बहुत सारे कंट्रीज तुर्की एक रियासत में पाकिस्तान एक रियासत है अब आप इनको तबाह करना शुरू कर दो तो इससे यह थोड़ी हो जाएंगे इससे जो जितने है वह भी धर्म कहते हैं वहीं सऊदी अरब की हिफाजत की जाए तुर्की की हिफाजत की जाए और पाकिस्तान की भी हिफाजत की जाए कोई भी चीज जो सऊदी अरब को तबाही
तरफ लेकर जाए उसके खिलाफ हैं चाहे वहां के बादशाह
सालिम हो या आदि लोग इससे हमें बहस नहीं है सऊदी अरब में बादशाहत आदिल शाह है या ज़ालिम आशाएँ हमने भाषा को थोड़ी देश में हवाई हमले को देखना है रियासत को देखना है इस पर बहस करके क्या करना है कि बादशाह सलामत वाले में यादें लें यह दूसरे दर्जे की बहस है लेकिन रियासत पर समझौता नहीं किया जा
सकता उसके साइड इफेक्ट बहुत खतरनाक है
इतनी दो और दो चार की तरह बात है जो आज
अवाम की खोपड़ी में नहीं आ रही है कोई सियासी लीडरों की बातों में आ रहे हैं कोई साथियों की बातों में आ रहा है और जनाब मूल के झंडे जलाए जा रहे हैं पासपोर्ट जलाया जा रहा है और नीचे कमेंट्स करने वाले उसको अप्रिशिएट कर रहे हैं दिल खून के आंसू नहीं रहेगा क्या क्या तुम तो बलूनी प्रोपेगंडा का जो हमें जो इस्लाम दुश्मन को होते चाहती है
तुम तो बड़े आराम से वह खुद ब खुद कर रहे हो उनको तो कुछ करने की जरूरत नहीं है
आप इस्लामी तारीख उठाकर देखो ब्लू मैया से लेकर आज तक कभी भी इस्लाम दुश्मन के हाथों मैदाने जंग में हम दबानी हुए हम आपको तो ने हमें बर्बाद किया है खुद अपना अपने हमने अपनी रियासत के खैर ख्वाह समझकर उसको हमने खाना शुरू किया है
लीबिया को क्या अमेरिका ने के तबाह किया है
वहीं की अवाम उठी उठी थी हाकिम के खिलाफ और बड़े खुशनुमा नारे लगे थे यदि वह हम इन्कलाब लाएंगे और इन में को हटाकर दूसरी को बताया कि वह वो जो जब ना वो के स्पेल रामटेक शराब पीता है तो फलाना करता है जो वह हटाया तो अब क्या कई मामले भी आगे लीबिया में सौर बसाई पर कब्जा किसका हो गया
इस्लाम दुश्मन को वोटों का कब्जा भी आवाम के हाथ से
वह जो कलाप ही था जैसा मडई था
कुछ तो पावर थी ना उसके पास कुछ तो मिल रहा था तो जो नहीं मिल रहा था उसको लेने के चक्कर में जो मिल रहा था उसे भी गए
तो आज कोई सऊदी अरब के खिलाफ बकवास कर रहा होता है ऐसे में मैंने कहा भाई जैसे हैं तो क्या मतलब यह नहीं होना चाहिए क्या क्या हुकूमत खत्म हो जाए तो क्या तुम समझते हो गई जब हुकूमत खत्म होगी सऊदी अरब की तो क्या कोई स्पीकर इमाम मेहदी आगे हुकुमत करना शुरू कर देंगे
जो रही सही खैर है उससे भी आपको हाथ धोने पढेंगे अब इस्लाह का तरीका क्या है सवाल पैदा तो चुप करके बैठे रहे देखो इस के दो ही तरीके या तो तलवार लेकर चढ़ जाओ
यह जब है जब तलवार हो आपके पास समझने और था
जब नहीं आपके बाल भोले लोग कहते हैं एक शाम मेरे पास आए कहते हैं बच्चा जाओ तलवार लेकर तहस नहस कर दो मैंने कहा कि इसकी क्या दलीलें आपके पास उन्होंने का असल में मैंने का किसी के पास पावर और ताकत नहीं है
लड़ाई के लिए पावर होनी चाहिए जो मैं इस पर तो बीसियों दफा बयान कर चुका हूं मैं उसको विपिन लोग फिर शॉट के लिए लेकर ऐसा हो गया लोगों ने मेरे बयान सेना इस तरह की चीजें निकाल निकालकर देखो कैसी बातें कर रहे हैं
चलाना शुरू कर दी है
वह कहने लगे हम लोग बहुत ताकतवर में पता नहीं है हमें तलवार लेकर चढ़ जाना चाहिए इस्लामाबाद में कब्जा कर लेना चाहिए
मैंने कहा आपको की कहते हैं असल में मुफ्ती साहब हमारी मिसाल उस हाथी के बच्चे की है
जो बचपन में आ गया और बिल्लियों और बिल्लियों में रहा उसको पता ही नहीं कि मैं क्या हूँ
मैं कितना पावर या शेयर की मिसाल है
शेर के बच्चे की है वो कर का शो में पलाऊ उसे पता ही नहीं कि मैं क्या हूँ
कितना पावर तो हमें अंदाजा ही नहीं है मैंने का तो शेर का बच्चा होना साबित कर दें हम लोगों का
आगे मैं तेरी सारी दलील खुद मान लूंगा यह शेर के बच्चे पर फीट आती है यह मिसाल कि जो धोखे से कर का शो में पलाऊ उसको बेचारे को पता ही नहीं मैं क्या शेर लेकिन इसके लिए पहले ये साबित करना पड़ेगा कि बच्चा बाहर किसका है अगर बच्चा बिल्ली का हो
फिर आप उसको शेयरों वाले काम का हुक्म दे रहे हो तो तो उसको शेरों से लड़ा रहे और पावरफुल लोगों से लड़ा रहे हो तो वह जो बिल्ली की दो जो टांगे बची हुई है वो भी चीथड़े उड़ जाएंगे उसके
जब भी आप इस्लामी तारीख उठाकर देख होना पड़े खुशनुमा लेबल लगाकर अपनी ही रियासत को तबाह करने की कोशिश की गई है उससे जो थोड़ी बहुत ताकत थी बनी उमैया कि बाप बनो मैया जैसे मध्य जालिम थे
फ्रांस तक उनकी पहुंच चुकी थी यह पॉजिटिव था या नहीं था
बगावत हुई दो हिस्सों में रियासत तकसीम और जो अपने फोटो हाथी का सिलसिला रुक गया
गिरी यह ठीक नहीं है ठीक नहीं है
बावत हुई और और पहली दफा इस्लामी खिलाफत दो हिस्सों में डिवाइड हुई उसके बाद फिर बरूआ पास आए
वह फोटो हाथ उस तरह से तो नहीं लेकिन फिर भी काम होता रहा उसके बाद जाकर क्या हुआ है कि कुछ फिर के के लोगों को उनसे इसका लाभ शुरू हो गए
शिया सुन्नी जो कहते रहे हैं ये बनवा पास की खिलाफत इसलिए खत्म हुई है के जीवों को हलाल और हराम की बहस चलती है बिल्कुल बेकार बात है
असल जो खिलाफत खत्म हुई है उसमें दो मुसलमानों के फिर को की लड़ाई हुई थी मैं फिर को के नाम नहीं लूंगा क्योंकि उनको हाइलाइट करने से फिर कवायद कम नहीं होती बल्कि और ज्यादा बढती है
जो अकलियत में ठहरना उनको मेजॉरिटी ने मारा फिर
जब मारा है तो फिर उनका इंतकाम लेंगे
हालांकि उनको बर्दाश्त कर लेना चाहिए था कि बातें लोग हैं हमारे जैसे मुद्दा नहीं है लेकिन स्टेट की खातिर गधे को बाप रहना पड़ता है कि नहीं पड़ता
रियासत वही तो उन्होंने क्या किया बनेगा वह लड़ाई में तो हम नहीं कर सकते उन्होंने फिर जो बनी अब्बास के बड़े बड़े ओहदों पर घुसने की कोशिश की चापलूसी करके भाषा की चापलूसी हिकमत हम तो आपके उन्होंने कहा हमने इंतकाम हमने लेना है
यह लड़ाई के मैदान में ही ले सकते हैं ना तो अब हम ऐसे लें तो बड़ी एक लॉन्ग टर्म पॉलिसी बनाई उन्होंने उन्होंने क्या किया के फिर खलीफा के करीब होते होते बड़े बड़े ओहदे हासिल किए खरीफ के राजदार बन गए और खलीफा को बड़ा तमाम हो गया भाई ये तो उधर से तातार यों को लिए बॉर्डर खोल दिया इन्होंने
उसको बोला मैं जाना बॉर्डर भी मेरे हाथ में आ चुका है फौजें वहां से हटा ली
भाषा कोई अंदाजा नहीं था कि यह क्या हो रहा है सत्ताधारियों को दावत दी कि आ जाओ मौका तातारी ने आकर बग़दाद की ईट से ईट बजा दी वह जो आपने अकलियत पर एक इंतकाम के लिए था न कि हमने हम मुनाफे में भी जीत गए और मैदान में भी जीत गए जीत का जश्न
हमलोग जीत गए दी कोई होता होगा जश्न मना रहे होंगे और लोग भी कह रहे में यह परस्ती और देखा यह जो ये लोग जो हमारे मसला के नहीं देते असीम की ईंट से ईंट बजा दी तो वह क्या हुआ वह चापलूसी कर करके भाषा का कुनबा हासिल किया
और यह ऐसी बड़ी साजिश की अगर वह अकलियत में थे जैसे मर्जी थे उनको एक रियासत के मुताबिक रखने के लिए इतनी असीम लेवल पर न जाते हैं
थोड़ा बहुत बुरा असर उन अगर तक चलते रहे हैं मैक्सिम लेवल पर जाते तो रियासत बच जाती इतनी बड़ी साजिश न होती उनको यह शो करा दिया ज्यादा तुम भी एक रियासत के क्या वो एक हिस्सा हो
मैं बार बार कहता हूं कि मजबूरी में गधे को बाप बना ली है आपका नियम बजे को कभी पावनी बनाकर तातारी को बाप बनाना पड़ा अपना
फिर किस को वापस बनाना पड़ा
जवाब मजबूरी में गधे को बाप नहीं बना देना
तो फिर आप गधे के बाप को बाप बनाते हैं जो गड्ढे से भी बड़ा होता है
दोनों ने फिर क्या किया गया कि बाप को भी क्या बना दिया और
तातारी आए हैं वरना बग़दाद की रियासत ऐसी नहीं थी कि वो चंगेज खान बड़े आराम से घुस जाए उसमें एक मजबूत खिलाफत साइंस टेक्नोलॉजी में हमारा कोई मध्यम मुकाबिल नहीं था और हमारी फोटो बढ़ती चली जा रही थी रुकने का नाम नहीं ले रही थी लोग थरथर कांपते थे हम से यूनिवर्स या हमारी थी जहां अंग्रेज पढ़ने के लिए आया करते थे
सब कुछ हमारे हाथ में था एक सिरफिरा उठा और पूरी वारदात की जाती
तो अत हमेशा क्या पहुंचाती है
नुकसान पहुंचाती है
तो जो तो बारदात गया तेल लेने तथा बहुत तक
उसके बाद से वह जो लाखों करोडों किताबें हमारी दरियाओं में बेहद ही हमारा एक पूरा
था उसकी ऐसी की तैसी हो गई है तो अल्लाह ने उम्मते मुस्लिमों पर राम किया खिलाफत खत्म फिर जनाब जो उस्मानी तुर्कों थे
खिलाफत उस्मानिया उठी है वह दुख उठे और इतनी ज्यादा कुर्बानियां दी उन्होंने के फिर खिलाफत उस्मानी पर तुर्की मरकज बना उसका उसने फिर यह ड्रामा शुरू हो गए थे
रूस में क्या हुआ मजबूत तीन चार सौ साल तो बहुत ही स्ट्रांग हुकूमत थी उस वक्त इसराइल का मसला नहीं था बोस का मसला नहीं था खलीफा से यहूदी ने कहा था कि हमें फलस्तीन की जमीन चाहिए उसने का शो पर में मिट्टी ले जाने की इजाजत नहीं है जमीन तो दूर की बात
और जब यह पहली जंग हुई है ना आपकी पहली जंग
इसमें
यूके जर्मनी खिलाफत उस्मानिया कहते हैं आदी था जर्मनी में इस्लाम दुश्मनी आज भी बहुत कम है
बल्कि नहीं है
मैं जब ग्यारह जर्मनी में मां की गवर्नमेंट मेरे पैनासोनिक तो वहां के लोगों से कहा यार ये तो और बुलाओ इनको भाई मैंने ईमानदारी के बयान के ने तो वहां ईमानदारी पाकिस्तानियों में शॉट चल रही है जर्मनी इस्लाम दुश्मन
अभी भी बाद जो कादियानी को तो सपोर्ट कर रहे ना तो कादियानी को भी सपोर्ट नहीं कर रहे जर्मनी आदि यानी होने व ऊंची उठी पोस्टों पर जाकर बहुत कुछ लीगल करके किया हुआ है
हमलोग अब करते ही नियम तो बिजली नहीं बनाते तो पर जज्बाती तस्वीर के साथ भी हो जाते हैं ये लोग जो अकलियत में बड़ी तमीज से काम करते हैं कि किस तरह से किन किन पोस्टों पर जान है तो कादियानी वहां बड़ी बड़ी पोस्टों पर जा चुके हैं
जर्मन गवर्नमेंट को मुझे मुझे जो मेरा तो तेज़ी आएगी कोई साथी मोहब्बत नहीं एकाध यानी उसे
तो जर्मन जर्मनी था ये इसका इत्यादि खिलाफत उस्मानिया का तो आपको पता है उस वक्त बहुत बड़ा तय किया था रशिया ने और बर्तानिया ने
तुर्की तुर्की बताया किया था तुर्की ने सत्रह को नाकाम बना बडे बडे बडे आए थे इनके तो हमारे ऐसी पावर तीरा हमारे पहली जहाजों ने ब्रिटिश को भी शिकस्त दी थी समंदर की लड़ाई में और रशिया को भी शिकस्त दी थी वापस चले गए थे
इतने कमजोर होकर भी इतनी पावरफुल थे
उसके बाद ड्रामे हुए जो अब हो रहे हैं
अब हो रहे हैं अपने ही खिलाफ होना एक तो बहुत बड़ी साइंस टेक्नोलॉजी के मैदान में जितना आगे बढ़ना चाहिए था वो नहीं बड़े बाद भी लोग मुखालफत करते थे नहीं दी यह नहीं होगा बोर्नियो प्रेस पर इतना बड़ा इशू खड़ा हो गया था यौन अपने प्रेस मशीनें लगाकर ठौर ठौर लिटरेचर छापना शुरू किया हमारे यहाँ जो
बहुत ही सख्त मिजाज किस्म के मौलाना लोग थे उनका यह फतवा था के प्रश्न किताबें छापना जायज़ नहीं है
इससे कागज की बेहद भी होती है आज भी तो देखूं बडे बडे शूज को छोड़कर छोटी छोटी चीजों पर नहीं वह यू इश्तेहार फाड़कर नीचे गिरा तो टोनी ने रिसालत केस कर दिया उसके ऊपर हालांकि वह पैगंबर की तो ही नहीं करा पाई वह क्या कर रहा है उसको तो पता भी नहीं रवि का नाम लिखा है लेकिन आप जो भी जुनूनी किस्म के लोग हैं आज उनमें यह अच्छी नजर आती है कि नहीं आती वह सियालकोट में वह विचार
मुस्लिम उसको क्या पता स्टीकर पर या लिए लिखा भाई या लिखा या मोहम्मद लिखा उसने फाड़ दिया विचार की दीवारें खराब हो रही है उसको कत्ल कर दिया लोगों ने यह जज्बात यह आज भी है
जो करने के काम में पॉजिटिव वे में उनकी तरफ तबज्जो नहीं है तो खिलाफत उस्मानी में भी ऐसी जो मजा भी जुनूनी किस्म के लोग थे उन्होंने को प्रेस्ली छापने देंगे हम ब्रेस्ट की मशीनी बने इसे कागज पर लगा नाम लिखा होता है ठप ठप करके निकलेगा जमीन पर भी पेट भी होगी
खलीफा ने बोला बाबू भाई बेहद भी छोड़ो किताबें कैसे छापेंगे नतीजा क्या निकला अब दुखी नहीं और गौरव से मिलता है
और अपने लिटरेचर टप्पा के छापा अपना और हमारे यहां किताब कबूतर की कलम से लिखी जा रही है तो दुनिया में उस वक्त मीडिया यूट्यूब फेसबुक नहीं था मीडिया की पावती किताबों में तो बताओ मीडिया किसके हाथ में चला गया गौरव के हाथ में चला तो उन्होंने इतना प्रोपेगंडा किया मुसलमानों के खिलाफ
इस्लाम के खिलाफ नबी के खिलाफ के नजरिए आती तौर पर तुर्की की आर्मी और कि हम हो गई थी
खुद तुर्की की आड़ में वह नजर आती तौर पर और को अपना बाप मानने लगी थी
और ये कई साल लगेंगे इसमें
ही वो ऐसा भी हुआ है कि थी वह वहां पर जो पहली बेहद आएगा ना तो उसमें पहले खत्म बुखारी बरकत के लिए होगी
उसके बाद को गहरी पीड़ा लगेगा कुरान ख्वानी होगी उसके बाद यौरा थोडा थोडा सा बना रहा था
जाहिर है जो खुदा ने आज तक उस कौम की हालत नहीं बदली अल्ला तो पुराण में क्या कह रहे हूं मसौदा तो मिल हुआ हो भाई रियासत को बचाओ पावर खुद ही तरह को में फारसी तस्वीर करो
इस बीच मजा भी जुनूनी किस्म के कुछ लोग घटा दौर में होते हैं आज भी है
लेकिन लोग फॉलो उन्हीं को कर रहे हैं लोग समझते हैं यही मोहित में रसूल भी है यही आशय के रसूल भी लॉजिक कि कोई भी बात करेगा ना उसको लोग कहते हैं यह हुकूमत का पिट्ठू है यह अमरीका का एजेंट हैं यह
इस तरह की बात कर रहे हैं उसको लोग नहीं मानते तो नतीजा क्या निकला के मीडिया इतना पावरफुल था किताबों का मीडिया कि उसके जरिए लोग नजरिया थी तौर पर और के ढेर जब अतातुर्क ने बगावत की है
तुर्की की हुकूमत की खिलाफत का खात्मा किया है तो कोई उसके खिलाफ बड़ी हिम्मत नहीं हुई
स्वामी ने उसके ज्यादातर आर्मी ने उसका साथ दिया नतीजा क्या निकला वो जो यार बीस बाईस मूल थे जिन पर एक हमारा पासा हुआ करता था
बीस बाईस मूल क्या खिलाफत थी
आज भी उसके साथ नजर आएंगे आपको सऊदी अरब में
ट्रेनें जनरल तो वहां से आया करती थी हरम की तामीर के लिए तुर्की से पत्थर लेकर आए वह अभी तक पुत्री भी उसकी साहब क्या हो गया
ऐसी की तैसी हिंदुस्तान में भी यही हुआ है
हुक्मरान जलालुद्दीन अकबर जब आए थे देना जलालुद्दीन अकबर जैसे पचास सालों लेबल वह बिल्कुल खिसक गया था उसका दिमाग
वह इतना बदगुमान हो गया था कोई एक फिर के का मौलवी जाकर उसको को समझाता दूसरे फिर के कमल भी जागे उसको को समझाता तीसरे फिर के कमल दिया को उसकी खोपड़ी तक होना शुरू हो गई
और जो अहले को लंबा ना जिनको चाहिए था
हुकूमत के करीब जाते
वह दूर हो गए उन्होंने फतवे देना शुरू कर दिए जलालुद्दीन अकबर द्वारा ऐसा यह तो नमाज नहीं पड़ता है यह तो हिन्दी खाता है यह तो फलाना करता है
उससे क्या हुआ ओलमा से हुकूमत के फासले कम होने के बजाय बढ़ना शुरू होगा
क्योंकि उस दौर में भी ऐसा तो जो हाकिम के पास हथियार लेकर जाता है उसको समझाने के लिए लोग कहते हुकूमत का पिट्ठू
और कमाल की बात है चाहते भी वही लोग थे जो वाकई होते थे
जिनके साथ ही बर्बाद होते हैं जिसको अपना प्रॉपर्टी चाहिए को प्लॉट चाहिए कोई जनाब कोई जाति मसला करवाया के ने किसी को टंकी आबा तो कहीं से के लिए किसी को टंकी आबा कहीं से को कहीं इन दोनों को किसी और ने टंकी ये लोग जाते थे
भाषा को बताता मेरे पास जो मजा भी स्कॉलर भी आता है ना वार्ता अपने चक्कर में भाषा तो मुरली तो गया था
फिर उसने नया तीन बनाया आदि ने अकबरी के नाम से मुझे दल सारणी रहमतुल्ला बहुत बड़े वाले बुजुर्ग उन्होंने बादशाह का गौरव हासिल किया उसको हम उससे लेने के बजाय दिए देना शुरू की गई इस साल मेहनत की जो मुतास्सिर मौलवी थे उन्होंने मुझे सारणी के खिलाफ फतवे दिए
मैं अगर हल्फिया बोलो ना हो ही काम जो आज जानें तो रशीद के साथ हो रहा है ना
वही काम मुझे दल साहनी ने किया और वोही ताने जो तो रशीद को दिए जा रहे हैं सौ फीसद वही ताने मुझे जो स्थानीय रहमतुल्ला को दिए गए थे
जहां में तो रशीद ने एक ठेला न कभी इस्टैब्लिशमेंट से लिया ना कभी इमरान खान से लिया न कभी नवाज शरीफ से लिया
जो मदरसे की हालत है दो दो तीन तीन महीने उस्तादों की तन्हाई नहीं है इंतजामात क्या लगते हैं यह फौज के लोग हैं क्या फौजी में कभी ऐसे देखा कि उनके लोगों की तन्हाई दो दो महीने में मिल रही हूं
और जब यह दीनदार लोगों से सुनता हूँ मैं दिल खून के आंसू होता है
भाई तुम दूसरी फिल्में में मेहनत कर रहे वह भी बहुत है तो कोई एक और दूसरी फिल्में कर रहा है तो बदगुमान क्यों होते हो गई तो
इल्जाम क्यों लगाते हो तुम
जिसे देखो यार ये असल में चौदह मनाया में तो रशीद ने एक दीनदार आदमी की बात कर रहा हूं मैंने का कल जामिया में चौदह मनाया जाएगा उन्होंने कहा तो हुकूमत के पिट्ठू है यह तो बनाएंगे
मैंने कई बार चौदह अगस्त मनाना हुकूमत का पिट्ठू गई तो मूल की मोहब्बत दिल में पैदा करना चाह रहे हैं
इसका हुकूमत के पिता होने से क्या ताल्लुक है
हम अपनी जडें क्या कर रहे हैं
न खुद कुछ करो न दूसरे को करने दो
दीगर अलावा दूसरी फिल्म में काम कर रहे हैं उसमें आगे बढ़ रहे हैं तो वह भी बहुत अच्छा काम है अगर यह इस ट्रैक पर काम कर रहे हैं तो बुद्धदेव सारणी राम का तरीका था मुझे इंसानी ने हुकूमत के खिलाफ फतवे बाद ही बन बन कर जीवन का कोई फायदा नहीं से कुछ नहीं बिगाड़ सकते तुम गवर्नमेंट का मुझे सारणी ने अकबर बादशाह कपूर हासिल किया और
पहले उसको यह पावर कराया कि मैं तुमसे तुम्हारे फायदे के लिए मिलता हूँ अपने फायदे के लिए अमल से साबित किया अमल से एक मुझे कुछ नहीं चाहिए सो यकीन आ गया के मौलवी मोहल्ले से
जब यकीन आता है न कि यह वरना आप जब भी कोई दीदार आदमी किसी के पास जा रहा और मादुरो से की बात करके आगरा वाले इतने पैसे चाहिए तो समझ जाएगा कि यह क्या कर रहे हैं
भाई तुम कहानी कुछ और है
मैं तो में होना तीन महीने से मेरी तन्हाई में लिए जामिद रशीद में
जो भी तनख्वाह नहीं मिली है एक करेंगे फौज के लोग है मैंने एयर फौज के लोग होते मेरा वाले हमारी तनखा तो हमें टाइम टेबिल देना
जी
थे में प्लॉट होता मुफ्ती अब्दुल रहीम साहब मेरे उस्ताद हैं उन बेचारों के बाद एक बार इस प्रॉपर्टी अब भी नहीं है
एक साहब आए मेरे सामने उनके मुरीद थे उन्होंने मेरे सामने उनके प्लॉट की फाइल हदिया दे दो ढ़ाई करोड़ का प्लॉट तक आपको गिफ्ट है उन्होंने कई शर्तें लूंगा मैं फौरन आगे
यह सटका कर रहा हूं मैं प्रॉपर्टी अपनी मिल्कियत में रखता ही मेरे सामने का वाकया कि कई तुम यह ने ऐतराज करोगे मैंने इतनी मेहनत से के प्रिय था आपने क्या कर दिया सत्ता कर दिया
मेरे सामने का दिया ये और चंद दिन पहले की बात है उसने दो ढ़ाई करोड़ की प्लॉट उठने का आप जो मर्जी करें उन्होंने लिया और मेरे सामने आ गए वो
कर दिया इदारे के लिए जामिया के लिए
तो लेने में भी बड़े खानदानी के लिए में फिर तो हमारे काफी सारे ऐसे ही है जो लोग कहते हैं मौलवी ऐसे आप जाओ पदों की खिदमत में जाकर बैठो
जोन में देवबंद हैं जिनको आज सुबह शाम बुरा भला कहा जाता है मुशरिक कहा जाता है आप और है मानव थाने की खबर देखो पता चल जायेगा मुस्लिमों की खबरें ऐसी नहीं होती तो कहते हैं अपने नाम का कलमा पढ़वाया जितना मौन असरफ अली थानवी के शागिर्दों ने खत में नबूवत का दीपा किया इतना किसी भी नहीं किया होगा तो कुर्बानियां दी है
दो बोल देना आसान होता है दाखिल करेंगी में आप जाओ कितनी थोडी थोडी तनख्वाहों पर
असाध्य की मेहनत देखो आप विनोदी टाउन में जाओ जामिया फारुख या में राव आपको इतनी कम भाव पर और फिर रिटायरमेंट में भी कुछ नहीं मिलता
ऐसे असाध्य पूरी पूरी जिन्दगी लगा रहे होते हैं उनके बच्चे बिचारे पांव में चप्पल नहीं होती उनके इतनी कुर्बानियां दुनिया में कोई तबका नहीं देता आपने दो नंबर मॉल भी देखे और देखकर चावल की तरह सबको एक ही लाठी से आंकना शुरू कर दिया खैर
क्या बात कर था कि की से ले गए
तो मैं वह खिलाफत उस्मानिया की बात कर रहा था वहां भी भर यही हुआ है नतीजा क्या निकला खिलाफत जहां मुझे डिटेल सारणी रहमतुल्ला लें तो उन्होंने मेहनत की जलालुद्दीन अकबर पर इतनी मेहनत की इतनी मेहनत की मोहब्बत से समझाया उसके शहजादों को समुदाय शहजादे से कहा कि मैं वादा करता हूं अगर अल्लाह मुझे जन्नत में लेकर गया ना मैं उस
तक नहीं जाऊंगा जब तक तुझे नहीं ले जाऊंगा
उनके दिलों में मोहब्बत यादव और फिर बर्बाद नहीं क्योंकि भाषा को पता होता है यह जो मक्खन लगा रहा है ना
अमल थे साबित करनी चाहिए हमें कुछ आपसे कुछ भी नहीं चाहिए हमें आपसे
नतीजा क्या निकला जलालुद्दीन अकबर कलमा पढ़ के दुनिया से गया है
हिंदुस्तान में जो इस्लाम बच गया ना तभी तो उनको मुझे दीदी अल्पेश शाह ने कहा जाता है आप फतवा देने वाले बहुत हैं यूट्यूब पर हर थोड़े दिन बाद कोई के लिए बार रहा है या मौलवी ऐसा यह निजाम की तब्दीली की तो बात ही नहीं करते
और भाई निजाम की तब्दीली का आप बाद आप भी सिर्फ बात कर रहे हो आपके पास रोड मैप क्या है आप प्रैक्टिकली निजाम की तब्दीली के लिए क्या कर रहे हो वो आप आवाम के सामने पेश कर दो लोग खुद देख लेंगे कि वह नहीं कर रहे आप कर रहे तो आपको फॉलो करना शुरू कर देंगे यह कहने की क्या जरूरत है बोनी कर रहे वह नहीं कर रहे नहीं कर रहे हैं
आज एक साहब का के लिए सुना वह कह रहे हैं कि यह मस्जिदों में जाना
लोगों की गाइडेंस मस्जिद से नमाज रोजा के लिए रह गई है और मस्जिदें जो है ना वो उसमें तो लोगों को सियासी रहनुमाई मिलनी चाहिए
आप यह कहने की क्या आप एक मस्जिद बना दो ऐसी उसमें वह काम करो जो आप चाह रहे हो जब सब देखेंगे यह वाली मस्जिद में इतने अच्छे काम हो रही है वाली शादियों की बातें हो रही है संवाद यहां पहुंचेंगे
काम धेले का नहीं छोड़ा और जो लफ्जो मस्जिदों में जुकाम हो रहे सभी लोगों को करता रहे हो
तो बनकर ही मिलाकर बन कर रहे भी यहां सभी करा दिया और यहां भी कुछ नहीं है
तो सिवाय इसके कि लोग अलावा से बदगुमान और आपके पास कोई पैकेज तब्दीली वर्मा तब्दीली की बात नहीं कर रहे आदिगुरु हर दूसरा बंदा उठेगा मौलवी तब्दीली की बात नहीं करते हैं मौलवियों तो जो की नस में लगे हुए बदले नजरी के खिलाफ टीवी नहीं देखो फिल्म नहीं देखो ये ये छोटी छोटी बातें लेकर बैठे में निजाम की तब्दीली भाई राम की तब्दीली की आप भी बात कर रहे हैं
आपके पास कोई इसका पैकेज नहीं है जिनके पास पैकेज है जाकर देखो वह कर रहे हैं
आप मिला उनसे पता चलेगा बहुत बहुत कुछ कर रहे हैं वो बातें कम कर रहे काम तो ज्यादा कर रहे हैं
दो
मुझे डीलर सारणी रहमतुल्ला अलैह की मेहनत से अकबर भाषा भी तीन एक बड़ी का प्रोजेक्ट उसने खत्म किया और आलमगीर रहमतुल्ला जैसे भाषा पैदा हुए उनकी औलादों में जो टोपियां देश के वो हिंदुस्तान था क्या बांग्लादेश भी था वर्मा भी था पाकिस्तान भी था इतनी जबरदस्त पावर थी उसके पास और उसका
भाषा क्या करता था टोपियां बेचकर गुजारा करता था टोपियां सीता था
यह हमारा शानदार मासी इसमें किसकी मेहनत थी
जिनको लोग कहते थे हुकूमत के पिट्ठू तो काम जिसने नहीं करना होता बैठकर बातें फेक तरह बहुत भी बुरा वह भी ऐसा वह भी ऐसा है जिसने रियासत से मोहब्बत होगी मुझे डिटेल सारणी को अकबर बादशाह से कोई मोहब्बत रिड्यूस काम काबिल नहीं था कि उसे मोहब्बत उनको था कि भाई रियासत जो हिंदुस्तान की बचेगी ना इस्लाम बचेगा वो हुकूमत ही
के हाथ में सब कुछ होता है
या तो बावत करो वह नहीं कर सकते तो फिर कुछ और इसी को ठीक करने की कोशिश करो ना अभय भाई जो औरत अपने शौहर औरतों के मियां बहुत सारे मार्केट में खराब चल रहे हैं तो हवा तीन जब से मशवरा लेती है मैं कहती उसे तलाक मांगने के लिए तलाक लेकर हम कहां जाएंगे हम दोनों नहीं जाएंगे हम तो बर्बाद गधे को बाप बना फिर क्या के
जब इससे तलाक लेने में नुकसान है तो फिर क्या को बर्दाश्त करो और इस्लाह की कोशिश में लगी तब लिए वालों से दबाकर बयान उसके लिए दुआ यही होगा अब लड़ाई से काम नहीं चलेगा कि आप आपका या अच्छा नहीं है तो आपने भत्ते कर करके उसको तो दो तरफा पत्ते चलेंगे
फिर वह मारपीट होगी और पड़े मसाइल खड़े हो जाएंगे यह तलाक दे देगा आपको जो आप चाहते ही नहीं हो तो या तो आपके पास पावर है
पावर का इस्तेमाल नहीं हो सकता तो कंप्रोमाइज के अलावा आपके पास कोई रास्ता नहीं है तो शौहर को बर्दाश्त करना पड़ता है बड़ी मुसीबतों से बचने के लिए छोटी मुसीबत को लेकिन साथ साथ की पॉजिटिव वे में कोशिश तो यही तमाम रियासत में इस्लाह का निजाम की तब्दीली गए यही है
या तो पावर आपके पास हो जब वो नहीं है तो फिर भाई पॉजिटिव में अच्छे लाभ के साथ बदतमीजी से हटते हुए आप इस की कोशिश करो यही निजाम की तब्दीली है जो बैठे भी उन्हीं को ठीक करने के कोशिश और यह दिमाग से निकाल तो यह ठीक नहीं होंगे यह भी तक पुराना जुमला भी कहते हैं ना यार ये इतने बुरे हैं यदि कोई नहीं सकते इसका मतलब दुनिया में अच्छे
सिर्फ आप ही हो आप ही हो जो कोई गुनाह करो तो तो की तौफ़ीक़ मिलती है आपके अलावा सारी दुनिया में दो नंबर है मेरा भी यही नजरिया था के सारे दो नंबर है जब आदमी चलता फिरता है ना तो टॉपर लेवल के लोगों से भी मुलाकात होती मैंने पीपल्स पार्टी में ऐसे ऐसे लोग देखे मुस्लिम लीग में देखे पीटीआई में देखें जीयूआई में देकर हर जमात में लगा कि यार
कहीं भी पूरी कोई जमात बुरी नहीं है
उसमें बड़े बड़े अच्छे लोग हैं उन अच्छे लोगों को प्रोमोट करके उनकी टाइप करके उनको उनको अच्छे मशवरे देकर उनको आगे लाया जा सकता है और जो अच्छे नहीं हैं उनको अच्छा बनाने की कोशिश की जा सकती लेकिन मेम्बर पर बुरा भला कह के नहीं होगा यह काम मेंबर पर जब मैं बोल डुमरा फहराना ऐसा धमकाना ऐसा आप
मेरी तारीफ पड़ोगे यूट्यूब पर मेरा के लिए बिलियन में चला जाएगा लोग कहेंगे इसको बोलते हम पड़ा डंके की चोट पर
बुरा कह रहा है किसी से डरता बता नहीं है लोगों ने बल्ले बल्ले हो जाएगी
रिजल्ट तक एक नहीं निकलेगा
आज यही हो रहा है स्कॉलर्स खुल खुल कर बोल रहे हैं वह ऐसा फलाना ऐसा अब इसका फायदा क्या हो रहा है तो रिपोर्ट पेश कर रहा है कि कौन कहता है
तो रिपोर्ट है क्योंकि दे रहे हैं वह में पर लेंगे कौन कैसा है
तब्दीली के लिए तो क्या कर रहे हैं तो तब्दीली के लिए हमारे मदारी कर रहे हैं
की हमें भी लगे हुए दीदी मदार इसके जो जमात है ना आठ साल जो हमारे दीदी मदार इसमें नेताओं ने दारुल उलूम फरंगी जामिया सिर्फ की आय में यह बार बार मदरसों के नाम हाईलाइट इसलिए करता हूं कि आप फतवा शख्सियतों से नालो इदारों से लो आज हर शख्स एक नया मसलक लेकर आ रहा है इदारे गलत
थी
इदारों में गलती का इमकान बहुत कम होता पूरा पैनल उतावला का में बार बार मदारी को हाइलाइट करता हूं
बाबैन मदारी में जाकर देखो कैसे कैसे गांव देहातों के बच्चों को आठ साल पढ़ाते हैं मैं हल्फिया बोलता हूं अगर यह मदार इसने इन हजारों बच्चों पर मेहनत न की होती इनमें नब्बे परसेंट चोर और डाकू निकल सकते थे वो आपके लिए आपके पास तो जापान की तरह कोई कूलिंग सिस्टम नहीं है कि लोगों को टमी सिखाई जा रही है सिस्टम
आप सिर्फ के रोड़े फिर कवायद सिखा रहा हालांकि मदारी सिकरवार अपनी सिखा रहे फिर करवा रही है जो भी मौलवी करना होगा किसी मदरसे का फायदा नहीं होगा
उठके कुछ उसने पढ़ ली और बन गया कुछ आमतौर पर जो मदारी से फायदे होते हैं उनमें ये चीज नहीं होती
लेकिन अगर यह इतना बड़ा तबका आपके पास जापान की तरह स्कूल नहीं है जहां बचपन से टमी सिखाई जाए आपके स्कूल में तमीज है
तो अगर यह मदारी वाले इतने बड़े तबके को आठ साल पड़ा के आलिम न बनाते मैं नहीं कह रहा को बहुत अच्छा रिजल्ट आ रहा है कुछ लोग तो अपनी काबिलियत से बहुत अच्छे भी हो जाते हैं लेकिन शहर को कम करने में जितना दीनी मदरसों का किरदार है इतना किसी तारे का किरदार नहीं है
ऐसा रिजल्ट निकलता नगरीय मदार इस ना होते तो मदद की मोहब्बत दिल में डाल देते हैं तो कुछ मजा भी पाबंदियों की वजह से आदमी बचाता है
वरना का बस्ता भाई देखो या तो कानून मजबूत हो
जापान की तरह बचपन से स्कूलों में ट्रेडिंग और कानून भी हो या फिर अल्लाह का खौफ है तो मदरसा का खौफ थोड़ा बहुत पैदा कर देता है
जिससे कुछ बुराइयों का जिससे मौलवी तैयार होते हैं जो बस में बैठ के निजाम की तब्दीली की बात नहीं कर रहे मगर को थोड़े बहुत सिखा देते हो कि बता देते तो तुम्हारे तुम्हारी बीवी देना मत करो घरेलू लाखों के नुकसान आप बता देते हैं विरासत बता देते हैं बहनों की विरासत की अगर रहते हैं तो आपको अगर चाहिए कि निजाम की तब्दीली की
बातें होनी चाहिए मस्जिद में और सियासत होनी चाहिए तो आप एक मस्जिद बना लो भाई में भी आगे बयान सुनकर में बहुत ऐसा मेरे पास आए कि मैं ऐसा घूमकर में प्रोजेक्ट शुरू कर रहा हूँ आप मुझे प्रोमोट कर मैंने का तो कर ले पहले शुरू ऐसा तो
प्रमोद करो बाद में टूटे दिल में मैंने उसको तो नहीं बोला मैं तुझे प्रोमोट करूं
कि तेरे इतने बड़े बड़े प्रोजेक्ट ने बाद में तो दो नंबर आठ में निकले पैसा खाकर भाग जाए तो आप कुछ करके दिखाओ
जब आप कुछ करके दिखाओगे तो आपके कहने की जरूरत नहीं होगी हम आपको ही क्या करेंगे
प्रमोद में और एक हॉस्पिटल में बड़ा अच्छा काम करने मैंने बा अमली मैं तो बयान के लिए गया था जब मैंने देखा यार इतने गरीबों का फ्री इलाज हो रहा मैंने बाकायदा के लिए उनको कहा कि बनाएं ट्रिलियन था उन्होंने मुझे कहा मैंने क्लिप बना में आपका हॉस्पिटल को प्रोमोट करूंगा कि लोग इसको चंदा दे क्योंकि इतना मैंने देखा वह गरीबों का इलाज हो रहा है डायलिसिस पर इतने महंगे महंगे इलाज फ्री में हो रहे हैं मैंने का
भाई आपको कहने ही तो हमारा भी फरीदा यार हम तो देख रहे कितना अच्छा काम और है तो मैंने उसको का तो प्रोजेक्ट भाई शुरू कर दें मैं देखूंगा तो आपके कहे बगैर प्रोमोट करूंगा नहीं तो आपके कहने से नहीं तो यहां भी यही मसला है कि आप जब निजाम की तब्दीली और होना चाहिए तो जो होना चाहिए वहां बनके दिखा दें
ठीक है ना लोग खुद गैंग वाली मस्जिद में बोनी और उसमें को वाला काम हो रहा तो लोग खुद आएंगे लेकिन यह नहीं करो कि मौलवी ऐसे मौलवियों मौलवियों और यह यह भी नहीं करते यह भी नहीं करते यह भी नहीं करते तो लोग मौलवियों से भी हट गए और लामा से भी बदगुमान हो गए आपके पास भी कोई पैकेज नहीं है
तो क्या होगा बीच में लटक गए वो फिर मूल हित बनेंगे थोडे दिनों में इनकी नस्लें एटीएस बनेगी
यह नतीजा निकलेगा तमाम दवाएं बच्चों की पहुंच से दूर रखें बयान वहां से चला था कि द चला गया खुलासा यह निकला कि असल में तो मैं यह बताना चाह रहा था कि आज जो प्रोपेगेंडा करना है कर लो लोगों को भी उल्लू बना लो पाकिस्तान के झंडे भी फाड़ दो पासपोर्ट भी जला दो और बड़ा लोगों का ना बाबा ले लो के बड़े परस है जैसे
मुशरिक को धमकी दी है ना नबी को तसल्ली दी है
एनएबी या तो यह बातें कर रहे हैं कल क़यामत के दिन इनको इस पर हसरत और अफसोस होगा तो अल्लाह ने आखिरत रखा है इंसाफ दिन आज बहुत से जलील है कल कयामत में इज्जतदार हो जाएंगे आज बहुत से हिस्सेदार हैं दल कयामत में जलील हो जाएंगे ठीक है ना इसलिए अल्लाह को सामने रखकर तब सड़क या करो कि
अलग के सामने इसका जवाब देना है
को सामने रखकर बात किया करो
आज में घर से निकला जो स्ट्रीट गार्ड होते हैं
जो गलियों गार्ड होते हैं
मैंने उनसे पूछिए आपकी तन्हा की दुनिया बारह घंटे ड्यूटी देता एक बंद बारह बारह घंटे दिन में फिर वो चेंज होगा तो रात में बारह घंटे के लिए अलग
परीक्षा बड़ा सा धूप में बैठे रहते हैं
तो मैने पूछा तन्हा कितनी है उसने कहा कि काटकर के साथ हजार रुपए मिलती है
बेचारा बड़ा परेशान बगैर है और हालात देखो दफा यह है
दूसरी गली के गार्ड यही पता चला दी सब पता चला दी जितने भी गार्ड हैं इनकी तनखा आठ हज़ार दस हजार सात हजार यह चल रही है
आपको क्या रिपोर्ट पेश कर रहा हूं मुझे ख्याल आया कि हम लोग सुबह शाम हुक्मरानों को बुरा भला कहते हैं इन्होंने हमारा खून चूसा हुआ है इन्होंने हमारा ये किया हुआ है यह किया हुआ है
मुझे लगा कि अब बिल्कुल सही को किया वे हमारे साथ जो होना चाहिए हम ला
वही हो रहा है
आप बताओ यार चालीस चालीस घर एक गली में होते हैं
पूरी गली की हिफाजत के लिए एक बंदा अट्ठारह गली मोहल्ले वालों की जेब से इतने पैसे नहीं निकलते हैं कि इस कमबख्त को पच्चीस तीस हजार रुपए तो कम कमसकम डोना मैं नहीं कह कि आप उसको ढाई लाख रुपए का तमगा दे दें
जब मैनेजमेंट से बात करो इंतजाम करते भाई लोग देते ही नहीं एक ऐसे से लोगों के घर से
क्या इतनी कुव्वत महंगाई है आप गैस का बिल भी तो दे रहे हो बिजली का बिल भी तो दे रहे हो
आप बच्चों की भारी भरकम फीस दे रहे हो एक आदमी जो भीख नहीं मांग रहा जो डाकू नहीं है चोर नहीं है
बारह घंटे आपको नजर आ रहे बैठा है वो
उसकी मेहनत तो आपको नजर आ रही है ना वह चोर होता तो यह काम थोड़ी करता हो
प्रेम गली मोहल्ले वालों की जेब से
पैसे निकलने के लिए जाना बहुत आ रही है
तो जो हो रहा है ना हमारे साथ मुझे लगा कि हम दुल्ला मूल के हालात एकदम बेहतरीन जा रहे हैं
बेहतरीन हालात जांच से पता चलता है कि हमें अगरबत्ती राजा बनाते तो हमने भी इसी तरह खून चूस मैं आपको खुद लोगों को के साथ में के आठ हजार रुपए चोरी नहीं करेगा क्या मुझे खुद बताओ यार
मेरा इंटरव्यू लिया कितने बच्चे क्या वह हो मैंने तो कैसे बैठ पागल है तो कहीं और काम कर झा के
में कहा जो तलाश करो
किधर जाऊं मुलाजिम तो नहीं है तो जो है उसको तो कम से कम दो इतना लेकिन आप जरा मांगना शुरू करो ना इस मोहल्ले से गली के कोने से कि हजरत वह गार्ड है बेचारा सात हज़ार आठ हजार टन खाद्य रहे हम चाहे उसकी पच्चीस तीस हजार तो होना से बारह घंटे एक आदमी तो बचा क्या उसके बाद आगे तो सोने का टाइम बच गया बैतुल खाला का टाइम
गया और कितना बचेगा उसके पास और फिर उनकी छोटी भी नहीं होती
भी तन्हा अलग कटेगी एक दिन छुट्टी करेगा वह वह कटेगी अलग टन था
तो लेकिन आप अभी सर्वे करोना गश्त करो यहां से जी हम गार्ड की तनखा पढ़ाना चाहते हैं तो एक आठ बन्दे के अलावा कोई भी
एग्री नहीं होगा बल्कि मैंने यहां लोगों से पूछा उन्होंने कई आठ हजार भी सब देख रहे हैं यह तो जिन घरों से तीन हजार तो मैं देता हूं मुझे याद आया
गैरी स्ट्रीट गार्ड जो मेरे गार्ड नहीं है पर्सनल गली के गार्ड है
तीन तो मई दे रहा हूं
पत्नी बाकी लोग क्या दे रहे होंगे
दो तो मैंने उनसे अकाउंट नंबर लिया वह पहली तारीख को में डायरेक्ट डाल देता हूं
दो ये किस कदर हम भिकारी को दे देंगे हमारी कौम की
का यह दिमाग रहना सेटिंग आउट चोर डाकू को तो आईफोन से निकालकर कराएंगे
वो सिर्फ यह वाला फोन मांग रहा था आपने शलवार की जेब में हाथ डालकर जो कुछ है उसको पकड़ा दिया तो बेहतर है कि डाकू बन जाओ चोर बन जाओ ठीक है ना उसकी इज्जत भी होगी उसकी खिदमत भी होगी
और अगर आप मेहनत मजदूरी पर आ गए तो जो सुबह शाम हुक्मरानों को चोर लुटेरा और क्या क्या बोल रहे होते हैं वह खुद भी आपके साथ बावन नहीं करेंगे तो यह जीती जागती मिसाल है मैं नहीं समझता है इस मोहल्ले में कोई सिक्योरटी गार्ड को बीस पच्चीस हजार नहीं दे सकता इस मेले में ऐसे लोग हैं अपने बच्चों की भी पच्चीस पच्चीस
रुपए स्कूलों में फीस दे रहे हैं
तो यही होता है आप कोई भी सिनेमाई काम करूंगा पैसे ही नहीं करता जेब से मुझे बड़ा दर्शाए बनेगा तो जिंदा यह तो चोर बड़ा अब तक बना क्यों नहीं छोड़ी है
ऐसा आप मेरा बयान सुनकर बन जायेगे रहे हैं और मुझे भी तो पोंटी चड्ढा का ख्याल आया था मुझे किसी ने मोटिवेट ने किया था
चोरी तो हराम है भाई तक यदि हराम है
मैं तो समझाने के लिए बता रहा हूँ भूखा मर जाए चोरी ना करें इंसान भूखा मर जाए
यदि न करें इंसान हराम का एक निवाला इंसान के खून को पलीद और गंदा कर देता है
लेकिन मैंने कहा शाबाश है भाई ये जवान लोग हैं बिल्कुल सारा दिन बैठे हुए और तुम तन्हा उनको क्या दे रहे हो फिर वीडियो साथ ही जी गली में डाकू आया और जो गाथा वह भाग गया
बेहतरीन काम किया गार्ड है सात हज़ार में अगर वो नहीं भागे ना तो वह पागल है
बेवकूफ एक नंबर का के जो काम उसकी तनख्वाह देने के लिए तैयार नहीं है वह उसकी खातिर अपनी जान पर खेलेगा मैंने तो खुद गार्ड से कहा कि जहां शक्ति होना भाग जाना
मैंने डरा सा होना कोई बंदा और है
छोड़ना भी एक चार सौ की चैता को फौरन भाग जाना इतनी बेवकूफ दुनिया में कोई नहीं होता जो तो जॉर्ज सात हजार और दस हजार टन देने वालों के लिए जाम देगा
तो असदुल्ला बेटे
उस दिन या दो हज़ार सात की बात है गली में गार्ड था
रात को बेटा बना खर्राटे लेकर हो रहा है
सही कह रहे दस हजार में सत्तर साल में
यह भी बड़ी कुर्बानी है कि बैठे बैठे सो रहे हैं
वरना तो लेट होना चाहिए ना लेकिन वो आपकी खातिर क्या कर रहा है
बैठकर बैठे रहना एक बंदा आया उसकी हो रहा है फल ले ली और बड़े आराम से लोड बोर्ड की किया चैक किया वहां पर हाथ में पकड़ा गया
चला गया अगले दिन क्या हुआ उसके करीब एक बाइक खड़ी थी एक चोर आया पूरी पाइप से लेकर चला गया मुझे बड़ा गुस्सा आया गार्ड ड्यूटी पूरी नहीं कर रहा यह कर रहा है
मुझे पता चला कि तन्हा कितनी है
सात हजार तो मैंने का यह इसको शाबाश देनी चाहिए कि यह भी पेट्रोल चोरी कर सकता था
इसने सात हजार टन के होते हुए भी पेट्रोल चोरी नहीं किया सिल्हूट
तैयार
क्या खयाल है
और ये यह कर सकता था के चारपाई पर जाकर सो जाए
जगाए बजाय पता ही न चले सब लोग हर वक्त थोड़ी देख रहे होते हैं लेकिन इसकी हिम्मत है के कुर्सी बैठती है हुए हैं
तो भाई हम सब ऐसे ही है ज्यादा गहरा जब हमारे हाथ में घूमता है कि न तो हम थेरॉन से दो हाथ आगे निकलेंगे तो हुक्मरानों को बुरा भला कहा लेकिन अपने आपको ज्यादा गालियां दिया करो
बड़े बहुत ही बुरे हालात हैं कि मैं उस बात को सत्तावन करता रहता हूँ आपको वह आप भी तो तकरीरें कर रहे हो ना मैं तो वैसे ही मुझे बता दें कि कितनी टन का तो मैं तो वैसे ही थोडा बहुत कभी मैंने देखा जा बेचारा सारा दिन रूप में बैठा रहता है
थोड़ा सा कुछ पैसे पकड़ा दिए कभी कुछ चटका कर दिया कभी कुछ लोगों ने मुझे पैसे दिए भी होते हैं वोट दे दिए गए को दे दो
वह तो मुझे नहीं देश को दे तो कोई मुस्तहब हो तो मुझे लगा यही मेहनत भी कर रहा है बढावा बारह घंटे आप तरह बैठकर तो देखो बारह घंटे तक गया एक दिन दो दिन पूरा महीना तो कौम की हालत ऐसी है
दो आगे कि आप क्या था वर्करों को