Date. 20 मार्च 2024।
दोस्तों बड़े ही दुख और भारी मन के साथ आप लोगों को बताना चाहता हूँ की मैंने अपने 17 साल के पत्रकारिता के करियर पर पूर्णविराम लगाने का फ़ैसला किया है। मैं एक आलिम का बेटा हूं, मेरे वालिदेन ने मुझे हमेशा हलाल लुक्मा खिलाया और हराम लुक्मे से दूर रहने की हर क़दम नसीहत की। अल्हुम्दुल्लाह मेरे रब ने आज तक हराम लुक्मे से मुझे बचाए रखा और इंशाअल्लाह मरते दम तक बचाकर ही रखेगा। हराम लुकमा कभी भी इस गले से नीचे नहीं उतरा, शायद यही वजह थी कि बेताबी, बेक़रारी, बेबसी और मज़बूती के साथ इस हलक से मज़लूमों के लिये और इंसाफ़ के लिए दहाड़ कर आवाज़ दिल से निकला करती थी, चाहे सामने कितनी ही बड़ी कोई ताक़त क्यों ना हो!
मैं कभी भी शोहरत का भूखा नहीं रहा लेकिन मेरे रब ने आप लोगों के ज़रिये बेपनाह मुहब्बत और इज़्ज़त दी। इतनी इज़्ज़त दी जितनी मैंने ख़्वाबों में भी नहीं सोची थी। Desh Live का माइक देखकर मज़लूम की आँखों में इंसाफ़ की उम्मीद की चमक को मैंने काफ़ी क़रीब से देखा है। उन उम्मीदों के पहाड़ को अब ज़्यादा नहीं ढो सकता इसके लिए तहें दिल से आप लोगों से माफ़ी भी चाहता हूँ।
मैंने अपनी पत्रकारिता के पूरे 17 साल के करियर में हमेशा ग़रीब, मज़लूम, सच और इंसाफ़ की लड़ाई को हमेशा पहले पायदान पर रखा और कभी भी किसी भी हाल में अपने ज़मीर का सौदा नहीं किया!
मैं कभी भी उन तोड़बाज़ या ब्लैकमैलर पत्रकारों की गैंग का हिस्सा नहीं रहा या मैंने उन तोड़बाज़ या उगाही करनेवाले पत्रकारों की क़तार में कभी ख़ुद को नहीं रखा। खुदको अगर उनकी क़तार में रखता तो शायद आज ऐश की ज़िंदगी जी रहा होता! लेकिन मेरे रब को क्या मुँह दिखाता?
माना कि गुजरात का मुसलमान धनाढ्य है, पैसेवाला है लेकिन वह पैसा शायद डराने-धमकानेवाले ब्लैकमैलर और तोड़बाज़ पत्रकारों के लिए ही निकलता है, इंसाफ़ के पैरोकारों के लिये नहीं! वरना क्या पूरे गुजरात में या अहमदाबाद में ऐसे 100 साहिबेमाल नहीं होंगे जो हर महीने बिला नागा सिर्फ़ 1000 रुपया इंसाफ़ के नाम पर दे सके?
मेरा भी परिवार है बीवी बच्चे हैं, काफ़ी और ज़िम्मेदारियां भी है क्यों कि मैं भी एक पिता हूँ, पति हूँ, बेटा हूँ और भाई भी हूँ। उन तमाम ज़िम्मेदारियों को पूरा करना भी मेरा दायित्व है इसीलिए लाइट, कैमरा, एक्शन की चका चौंध से दूर पत्रकारिता को अलविदा कर अब मीडिया से अलग किसी नौकरी की तलाश में हूँ। (सेल्स, मार्केटिंग या रिसेपशनिस्ट)
मैंने हमेशा लोगों से आर्थिक समर्थन माँगा (कुछ लोगों ने इसके लिए मुझे बुरा-भला भी कहा) और 100-50 या उस से कुछ ज़्यादा जो पैसा मुझे मिला उसकी एक-एक पाई इंसाफ़ की लड़ाई में ही खर्च की मैंने (आप लोगों की तरफ़ से महीने में तक़रीबन 2-3 हज़ार रुपया मिलता था और किसी महीने कुछ भी नहीं)
आप लोगों की तरफ़ से की गई छोटी से छोटी मदद का एक-एक पैसा भी मैंने कहीं बेजा ख़र्च नहीं किया। और फ़ख़्र से कह सकता हूं कि कोई यह नहीं कह सकता कि किसी का एक पैसा भी हराम रास्ते से या काम करवाने के नाम पर मैंने लिया हो। वरना पत्रकार तो FIR करवाने के भी 5 हज़ार वसूल लेते हैं, बिल्डरों से भी 20-25 हज़ार हर महीने ले ही लेते हैं! ख़ैर उनका जवाब क़ब्र मैं वह ख़ुद देंगे! मुझे सुकून है कि मेरे रब के सामने मुस्कुराते हुवे ख़ाली हाथ खड़ा रहूँगा 😇
मेरे लायक़ कोई Respectful नौकरी हो तो बताइएगा, उम्मत से थोड़े से respect की उम्मीद तो मीडिया का माइक हाथ में लिए बिना भी कर ही सकता हुना? Desh Live अब कौन चलाएगा वह तो रब ही जाने!
आपकी दुआओं का तलबगार
आपका सहल क़ुरैशी Sahal Qureshi Official😊
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