चुनावी बॉन्ड की पूरी राम कहानी आज हम समझेंगे
आज आपको एहसास होगा कि किस तरह से घोटाले करने का एक रास्ता सरकार ने खोल दिया था और किस तरह से दो हज़ार अट्ठारह में मोदी जी ने एक ऐसी स्क्रिप्ट लिखी जिसके जरिए सारा काला कारोबार
लीगल हो जाए
हम समझने की कोशिश करेंगे कि इलेक्टोरल बॉन्ड में कौन कौन से खेल कर दिए गए जिसके जरिए हिन्दुस्तान का कानून डीवीडी सीडी सब एक तरफ और
नामा और कमाई एक तरफ कहीं में चाहिए चैनल को सब पर जहां भी जरूरत है
है
इलेक्टोरल बॉन्ड क्या है
इलैक्टिव इलेक्टोरल बॉन्ड
सरकार के द्वारा बनाया गया
काले धन को खत्म करने का एक ऐसा उपाय है
जिससे सबसे ज्यादा काले धन को मदद मिलती है
और जिसके जरिए
आप
जितना चाहे उतना खेल कर सकते हैं
और अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को धूल चटा सकते हैं
इसमें कुछ चीजें ऐसी हैं जो लीगल तरीके से हो सकती है सीधे तरीके से हो सकती है और कुछ चीजें ऐसी हैं जो धांधलेबाजी करने की गुंजाइश छोड़ दी गई है
तो शुरू करते हैं एक एक करके सारे तत्वों को लेकर आते हैं सुप्रीम कोर्ट में भी इन तत्वों को कहीं न कहीं किसी तरह से उठाया गया है और एक हम सिम्पली फिकेशन के जरिए को समझने की कोशिश करेंगे ताकि आप जान जाएं कि इस देश के नेता
कैसे कैसे लोग इस स्कीम ने चुनावी चंदे को गुप्त दान बना दिया एक हाथ पैसा देगा अगर पॉलिटिकल पार्टी को दूसरे हाथ को पता नहीं चलेगा
और इससे हुआ यह
कि आपको कोई भी उल्टा सीधा काम करना हो और किसी पार्टी को पैसे देने हो
तो आप उसको कुत्ते सकते हैं
एक उदाहरण से शुरू करता हूँ
आपकी एक पार्टी है जैसे मैंने मान लीजिए पार्टी खुली उसका नाम रखा आलू प्याज पार्टी आलू प्याज पार्टी ले जाकर रजिस्ट्रेशन करा लिया और आलू प्याज पार्टी को कहीं पे कोई यह नहीं है कि मिनिमम वोट कितने मिलें दस लाख वोट मिले एक रोबोट मैंने ऐसा कुछ नहीं है
एक लाख वोट मिला जब उसने पार्टी खोली रजिस्ट्रेशन करा लिया बात खतम दो मेरे पास माल
अब आपके पास दें
कुछ पैसा है
जो आप किसी को देना चाहते हैं
अब आप उसको दे नहीं सकते हैं क्योंकि रिकॉर्ड में आ जायेगा तो आप एक काम करो
एसबीआई चले जाओ
टीआई में जब इलेक्टोरल बॉन्ड खुले तो से इलेक्टोरल बॉन्ड एक दस करोड़ रुपये का खरीद लो और वो बंदा के आलू प्याज पार्टी को तोड़ कर दो और आपके कहने पर कुछ कमीशन लेकर उस पार्टी को आलू प्याज पार्टी किसी और काम से एक बिल ले लेगी और पैसे दे देती है
हो गया
सब व्हाइट ब्लैक सब बराबर हो गया
तरीका क्या है इलेक्शन गोद लेने का पहले उसको समझा जाए तो और भी मजा आएगा
कोई भी आदमी कोई भी कंपनी
जाकर वहां पर
एसबीआई की खास तौर पर एक ब्रांच मुकर्रम वक्त मुकर्रर होती है उस पर डेस्क होती है होकर वहां पर जो बाबू बैठा हुआ उस बाबू को जाकर बोला कि भाई मुझे इलेक्टोरल बॉन्ड दो जो आपके बहुत सारे का रिनोवेशन होते हैं कोई एक करोड़ रुपये का दस लाख रुपये का पांच लाख रुपए कैसे बने हुए बंद होते हैं
आप पैसे दे दो वह बॉन्ड इश्यू कर देगा यह बॉन्ड इश्यू किया इस पार्टी के लिए
ऐसा नहीं होता कि आप बॉन्ड ले आओ किसी को भी दोगुना वहां पर जब होगा तो पार्टी कौन सी को दिया जा रहा है उसमें लिखा जाएगा
और फिर आप जाकर वह गॉड पार्टी को दे देते हैं पार्टी अपने खाते में समाज चला लेती है एक सौ इक्यावन रुपये आए हमारे पास में इलेक्शन वाच है
किसने दिया नहीं बता पाती जब इलेक्शन वॉच से चंदा रहती है तो नाटो चुनाव आयोग को बताने की जरूरत है
इनकम टैक्स को बताने की जरूरत है कितना पैसा कहां से आया
न किसी प्रकार की कोई रिकॉर्ड रखने की जरूरत है कि कोई से पूछा कितना बसाया क्या है तो उसको बताना पड़ेगा
बर्गर परमिशन के लिए
और ये सारा काम कैसे हो रहा है सरकार ने एक वन पॉइंट सिस्टम बना दिया स्टेट बैंक की एक डेस्क लक्षण बांड की वहां पर जो भी बाबू बैठता है
वह बाबू आज के इस दौर में हो सकता है भारतीय जनता पार्टी का कोई अपना एजेंट होता जासूस होता
और आप जब जाएंगे वहां बॉन्ड बनवाने के लिए तो वह फोन करके बता देगा कि भैया ये फला फला लाला मणिदास आए थे और इन्होंने जो है वह इतने करोड़ रुपए
इलेक्टोरल बोर्ड में बीजेपी को दे दिया
कांग्रेस को दे दिया है आपको ठीक है बेटा के घर पर यदि भेजता हूं
यही उगाना वह दर्शन हीरानंदानी का यही तो हुआ सरकार ने जैसे ही उसको का भृकुटी तेरी कि तोते की तरह बोलने लगा अब आप इसको समझिए कि इस तरह से आप जो है इलेक्शन कमीशन इनकम टैक्स डिपार्टमेंट सब को ताक में रख के
सारी ट्रांसपरेंसी का था किसी को जानने का हक दे दी केवल दोनों जानते चंदा देने वाला पार्टी और वह बाबूजी जो वहां मैथुन एसबीआई
इससे
एक नया रेवेन्यू खुल गया काला धन पार्टियों के पास आने का कैसे अब यह पैसा कितना भी कोई भी दे सके इसके लिए जुगाड़ किया गया
जुगाड़ यह किया गया कि पहले कोई भी कॉर्पोरेट अपनी इनकम का मुनाफे का एक प्रतिशत से ज्यादा चुनावी चंदा नहीं दे सकता
बीजेपी नेता आंग दो अभी तो हमारी सरकार जिसकी तरफ नजर उठाकर देखेंगे चंदो के ट्रक हमारी पार्टी के दफ्तर के बाहर खड़े कर देगा
मतलब बॉन्ड दे देगा
तो
नियम बनाया गया कि कोई भी कितना भी कॉर्पोरेट चंदा दे सकता है
अब अगर एक आदमी अपनी कंपनी बनाता है बशर्ते उस कंपनी को मुनाफा होता हूं
अब एक आदमी अपनी कंपनी बनाता उस कंपनी में एक रुपए का मुनाफा कमाता ये सवाल सुप्रीम कोर्ट ने पूछा गया और उसके बाद वह दस करोड़ रुपए का दान दे देता है
बीजेपी को
तो वो दे सकता है
जिसकी आमदनी भी नहीं है वह भी दे सकता है पहले यह था कि भैया जितना रहे उसके एक पर्सेंट से ज्यादा पॉलिटिकल चंदा नहीं दे सकते इस प्लॉट को हटा दिया गया
इसके अलावा एक और क्रॉस
लगा दिया गया एक और इजाजत दे दी गई कि अगर आप विदेशी कंपनियों हो आप वारेन बफेट हो आप जॉर्ज सोरोस हो या कोई भी व्यक्ति हो
आपकी अगर भारत में कोई पाँच है
तू ब्रांच जितना चाहे चंदा दे सकती है और चंदे को गुप्त रखा जाएगा यानी विदेशी कंपनियों से मिलने वाले धन को गुप्त रखा जाएगा
अब यह पॉलिटिकल पार्टी करती क्या है सबको पता है पॉलिटिकल पार्टी इस देश में सरकार चलाती है
या विपक्ष होती है
और वो किसी भी तरह से देश की नीतियों और बड़े बड़े फैसलों को प्रभावित करने में सक्षम होती है
अब एक पाती है अगर उस पार्टी को
में
दस करोड़ रुपए में के साथ ऐसा है कि मंत्री जी मेरा यह काम करा दो मुझे जो है वह एयरपोर्ट जिला तो मुंबई वाला था
के साथ मिल जाएगा
क्या दोगे
दस करोड़ दूंगा
ठीक है
दस करोड़ का इलेक्शन बॉन्ड आपने जाकर पार्टी में जमा करा दिया कोई आपको रंगे हाथों पकड़े या कहीं पाउडर नहीं निकलेगा कहीं इनके नहीं निकली कुछ नहीं मिलेगा आप बॉन्ड खरीद कर देगा
हो गया
इसी तरह से एक विदेशी इजराइल मान लीजिए है और वह इजरायल आगे कहता है भारत सरकार को कि हमारे देश के हित में नीतियां बना दो हमारे लिए यह दाएं बाएं कर दो
तो हम जो है वो आपको सौ करोड़ का चंदा देंगे
सरकार के कि ठीक आने दो
पैसा आता ज्यादा खजाने में और वो खजाना आप पार्टी देख रहे हो पाती सारी पार्टियां पार्टियां ऐसी नहीं है ना या तो छोटी छोटी पार्टियों की भी बात है क्योंकि जो एक लाख वोट वाली बंदिश थी पहले वह भी तोता दी गई है
यानी कोई भी आलूबुखारा पार्टी आलू प्याज पार्टी बनाएगा
और यह कर सकता है
भैया मैं तेरा पर में पास करा दूंगा मेरी सेटिंग मंत्री जी के पास न तो मेरी पार्टी को डोनेशन के नाम पर इतना पैसा दे दे यानी में जितनी चाहो रिश्वत हूँ मैं चाहिए करूंगा करूंगी मेरी आप कुछ नहीं कर पाओगे
एक कहानी इसके साथ में है तो इस जोड़े एफसीआरए एक्ट में बदलाव कर दिया कंपनी एक्ट में बदलाव कर दिया जो कर दिया
क्योंकि कंपनी बंधन मनाता था एक पर्सेंट से ज्यादा नहीं दे सकते हो
भैया विदेशी चंदा जो है उसका एक नियम है
और वह चंदा रेगुलेट होगा ट्रांसपेरेंट होगा बहुत सारी चीजें होंगी
इधर आना हमारे खजाना नजारा कर रखो
इससे साथ साथ बहुत सारे चार कानूनों को बदल दिया
अभी कानून होता था
रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट मैंने आपको बताया उसमें एक पर्सेंट वोट जो है एक लाख नहीं एक लाख गुना एक पर्सेंट वोट
आपको पूर्ण होना चाहिए
तभी आप बॉन्ड ले सकते हैं
ईमानदारी की बात है हर आदमी चुनावी चंदा कैसे ले लेगा तो इन्होंने उसको भी हटा दिया
यानी रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट जो है वह कहता है कि भैया आपका एक परसेंट
वोट आपको मिलेगा तभी आप इलेक्शन वॉच से चंदा लेने के लायक उसको भी हटा दिया
इस तरह के बहुत सारी चीजें होती जा रही हैं और तेरह हजार पाँच सौ करोड़ रुपए
जैसा बड़ा पैसा इसमें दिया गया अब सरकार ने यह सब उल्टा सीधा काम किया और यह करने के पीछे सरकार की नीयत क्या रही होगी इसका अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं
कि जब भी कोई कानून होता है तो कंसल्टेशन होता है
सरकार कानून पर काम करने से पहले जो संबंधित जानकार लोग हैं समाज के लोग हैं जनता के लोग हैं उनके उनसे इस बारे में राय मशविरा करती है और जानकारी जुटाती है देशभर में सेमिनार होते हैं अलग अलग तरह की जानकारियां होती हैं कुछ लोगों से राय ली जाती है और उसके आधार पर
कंसल्टेशन कमेटियां भी बनती हैं उनके आधार पर सरकार वित्तीय मोटा मोटा यहां इस कानून में यह कमी आई अच्छा है लेकिन सरकार को लगता था कि अगर पता चल गया तो फिर हम यह काम नहीं कर पाएंगे तो इसलिए कंसल्टेशन के प्रोसेस कोई नहीं अपनाया गया इसके अलावा
आरटीआई से चीज और पता चली है
कि इलेक्टोरल बॉन्ड के साथ में क्या क्या घपला घोटाला हो सकता है इसके बारे में सरकार को पता वहीं
यह था कि आरबीआई ने बाकायदा
एक
ऑब्जेक्शन लिखा केंद्र सरकार को कि यह प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट पीएमएलए का उल्लंघन कर सकता है
फोर जरी मनी लॉन्ड्रिंग और नकली काउंटर फिटिंग
ये तीनों चीजें इसमें संभव है यानी फर्जीवाड़ा
काले को सफेद करना यह सारा जो मैंने आपको बता संभव है तो यह बातें आरबीआई ने बाकायदा तब चिट्ठी लिखकर केंद्र सरकार को बताई थी
केंद्र सरकार का जवाब आया अब तो फाइनेंस बिल प्रिंट हो चुका है
आपने देर से बोला
और उसके बाद में मामले को बंद कर दिया गया तो अलग अलग देखें कि उसका आरबीआई का जो कंसर्न था उसको रिजेक्ट कर दिया गया
इलेक्शन कमीशन का
इलेक्शन कमीशन ने इस पर सवाल उठाया था लगा रहा हूँ स्क्रीन पर उसके सवालों को भी रिजेक्ट कर दिया गया
तो मतलब यह है कि अगर आपको यह लगता हो कि कई बार मासूमियत में गलती हो जाती है बाद बोले
पाशा भाषण में भी निकल जाता है कि पीना हो तो
तो हो सकता है कि समझ न पाए होंगे हम क्या कानून बना रहे हैं बना दिया कंसल्टेशन नहीं किया तूने क्या भैया
नीयत पर सवाल उठता है एक प्रक्रिया है वह तो करनी चाहिए
इसके अलावा अपने
जिन लोगों ने आपत्ति जताई थी इलेक्शन कमीशन ने कहा कि है रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट के खिलाफ ज्यादा भैया इग्नोर कर दिया आरबीआई ने जो का इग्नोर कर दिया तो यह पूरी चीज है एक बात बताती है यह सब जान बूझकर सोच समझकर किया गया मसला
अब चूंकि मामला संसद से पास हो चुका है
तो इस पर नए सिरे से बहुत सारी चीजें समझने की जरूरत है
मामला सुप्रीम कोर्ट में अब सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्शन कमीशन से कहा कि भैया ये बताओ तुम आप इनके पास में कितना पैसा आया चुनाव
अर्चना अगर हमको पता ही नहीं तोड़ना
बताना तो पड़ेगा तो वो इसलिए रखा गया है कि गुप्त रहे कौन किसको पैसा देना पता ना चले पोते का कैसी बातें कर रहे वहां तो आपने बाबूजी जो हुए हैं कोर्स कन्फर्मेशन निकली सकती है इसके अलावा आपने कहा कि वे इंफोर्समेंट एजेंसी दो मिनट में ईडी की देना पड़ेगा सीबीआई माहौल देना पड़ेगा
पुलिस मामले की तो देना पड़ेगा क्योंकि आपने प्रोविजन रखा हुआ है
कैसी प्राइवेसी रही
और तीसरा
प्राइवेसी प्राइवेसी की बात कर रहे हो
तो हम तुमसे पूछा भैया किसने दिया किसको कितना चंदा हम यह पूछने किसको कितना चंदा मिला
हमको पता भी तो होना चाहिए इस देश में कितना पैसा इलेक्शन वॉच के जरिए दिया जा रहा है
तो सिट्टी पिट्टी गुम इलेक्शन कमीशन तो आपको मालूम है
उसकी क्या स्थिति है इस देश में
हमको लगा कि आप दो हज़ार उन्नीस के चुनाव के लिए ही यह सब किया था तो हमने देख लिया अब हमारे पास गाथा ने सुप्रीम कोर्ट ने दो हफ्ते में डाटा लेकर आओ और कॉन्फिडेंस तरीके से आप हमको लिफाफे में बंद करके डाका हो गए
जो पूरे लोकतंत्र के सिद्धांत है
उसके हिसाब से
यह पूरा कानूनी गई
भाई एक ट्रांसपरेंसी को चीज होती है कि नहीं होती है
राइट टू इनफार्मेशन भारत में लोगों को सूचना का अधिकार है
और आपने कह दिया कि आम आदमी को जानने का कोई हक नहीं है कि किस पार्टी ने कितना चंदा लिया करो बुड्ढे सरकार सुप्रीम कोर्ट ने
तो ये जो है वहाँ पे भी मामला बर्दाश्त तो कुल मिलाकर अगर आप देखें
तो आपने कॉरपोरेट कर्ज कंपनी कानून बदल दिया आपने जो है वो रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट बदल दिया है वह कानून में जिसके हिसाब से जिसमें कानून चुनाव संचालित होते हैं उस कानून में बदलाव कर दिया
और जैसा कि मैंने आपको बताया कि इस सबको करने के बाद
भारत में अगर आप भारत में गरीब बच्चों को पढ़ाना चाहते हो ना
विदेशी चंदा लेना असंभव के जितना मुश्किल कर दिया गया
कितने आप प्रयास आमोद कंठ का कितने सारे बच्चों को पढ़ाता लिखा था था
खासकर प्रयास के एक्टिविटी पैसा ही नहीं सारे एनजीओ धीरे धीरे धीरे धीरे करके बुरी हालत में पहुंच गए
जिन लोगों ने पूरी जिंदगी लगाकर अच्छे से लाखों लोगों को फायदा पहुंचाया फंडिंग मिली तरस से
और दूसरी तरफ विदेशी चंदा लोग
विदेशी चंदा चलेगा को
ये पूरी की पूरी सिचुएशन जो है ना इससे पता चलता है कि काला धन उल्टा सीधा धन क्योंकि पीएमएलए भी इसमें लागू नहीं होता
मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट लागू होता काले को सफेद करने के लिए आप वाला जो तरीका है इलेक्शन वॉच वाला अपना सकते हो एक लिए जीटीवी तरीका बनाया गया
तो ये पूरी बात आपने जो समझी वह आपने मोटा मोटा समझ में आया होगा कुछ तकनीकी थी लेकिन को भी सरल करने की कोशिश की लेकिन फिर भी समुराई करके आपको एक छोटी सी कहानी ऐसे समझ लीजिए कि इलेक्शन कमीशन का भारत में दो हज़ार अट्ठारह में मोदीजी ने कह सका
जिस कानून के जरिए कोई भी पार्टी कितना भी चंदा ले सकती थी
उसको कोई जान नहीं सकता था किस पार्टी को कितना चंदा दिया है
सिवाय इसके कि सरकार सरकार जान सकती थी सत्ताधारी पार्टी जान सकती थी और वह लोगों को पर दबाव भी बना सकती थी चंदा लेने के लिए क्योंकि किसी को अगर सरकार से काम कराना हो कुछ उल्टा सीधा काम कराना और रिश्वत देनी हो तो चंदा दे भी दे ही सकता था सरकार भी अगर चाहे कोई सरकार में बैठा हुआ नेता
और वह फाइल लडका के यह कहे कि पहले पार्टी में डालकर तो अभी जो मामला चल रहा मनीष सिसोदिया वाला इस मामले में जो आरोप लगाया गया है वह यह लगाया गया है कि पार्टी ने अपने चुनाव के लिए
पैसा लिया
शराब माफिया से और शराब माफिया को छः सौ कुछ करोड़ रुपए जो भी अमाउंट है उसका फायदा पहुंचाया है
तो ये भी अब इजाजत हो एक तरह से देखा जाए तो भी तो चुनावी चंदा ले रहे हैं
तो इस तरह की जितनी भी गैर कानूनी गतिविधियां नेताओं का भ्रष्टाचार नेताओं का भ्रष्टाचरण नीतियों के प्रभाव डालना विदेशियों का असर पड़ना जितनी भी चीजें हैं उन सबको
कानूनी जामा पहना दिया मोदी जी ने दो हज़ार अट्ठारह में
अब सुप्रीम कोर्ट में संविधान पीठ पे इसकी सुनवाई पूरी हो गई है पांच दिन हो गए संविधान पीठ का काम होता है यह बताना कि संविधान के हिसाब से कानून के हिसाब से ये जायज है नहीं है
उसने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है
और उम्मीद करते हैं जो फैसला आएगा उसके बाद में इस इस कानून में ऐसे बदलाव होंगे जिससे नेताओं की पॉलिटिकल पार्टीज की चोरी चकारी पर रोक लगेगी उनके भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी उनकी लूट पर रोक लगेगी और उनकी ब्लैकमेलिंग पर रोक लगेगी उम्मीद करता हूं जो आपको अच्छा लगा होगा अच्छा लगा हो तो ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं पर सबसे पहले उसका
जाए

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